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अंधविश्वास

राजस्थान पुलिस को 60 साल बाद आया कानून का ख्याल, मृत्युभोज आयोजित किया तो मिलेगी सजा

Janjwar Desk
8 July 2020 11:44 AM GMT
राजस्थान पुलिस को 60 साल बाद आया कानून का ख्याल, मृत्युभोज आयोजित किया तो मिलेगी सजा

प्रतीकात्मक फोटो सोशल मीडिया से.

मृत्युभोज जैसी कुप्रथा पर रोक के लिए राजस्थान पुलिस ने एक आदेश जारी किया है। राजस्थान पुलिस ने जो आदेश जारी किया है वह 60 साल पुराने कानून पर आधारित है...

जयपुर। राजस्थान सरकार ने मृत्युभोज के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके लिए राजस्थान के पुलिस महानिदेशक की अपराध शाखा द्वारा तीन जुलाई, 2020 को एक आदेश जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि कानून के अनुसार राज्य में मृत्युभोज नहीं किया जा सकता और ऐसा करने पर दंड का प्रावधान है।

राजस्थान पुलिस महानिदेशक कार्यालय की अपराध शाखा के आदेश में कहा गया है कि राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम का पालन करना आवश्यक है। इसके लिए जयपुर व जोधपुर के पुलिस उपायुक्त सहित सभी जिलों के एसपी को पत्र भेज गया है और उन्हें कहा गया है कि वे अपने इलाके में यह सुनिश्चित करें कि ऐसा नहीं हो सके।

इस आदेश में कहा गया है कि पंच, पटवारी और सरपंच पर यह जिम्मेवारी है कि वह मृत्युभोज की सूचना अदालत को दें। पुलिस अधिकारियों को डीजीपी कार्यालय से 1960 के उस कानून की प्रतिलिपि भी भेजी गई है जिसके तहत मृत्युभोज नहीं किया जा सकता है।


हालांकि यह कानून 60 साल पुराना है और अब राजस्थान पुलिस को इसका ध्यान आया है कि इसे लागू करवाया जाए। भारत में खासकर हिंदुओं में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर मृत्युभोज का आयोजन किया जाता है।

उत्तर भारत के गांवों में हालत इतनी खराब है बुजुर्ग मां-पिता की मौत होने पर पैसे नहीं होने की स्थिति में गांव के लोग मृत्युभोज के आयोजन के लिए जमीन भी बेचवा देते हैं। ऐसी स्थिति से वैसे परिवारों को गुजरना पड़ता है जिनकी माली हालत अच्छी नहीं होती। गांवों में यह भी कहा जाता है कि भोज खाकर जितने लोग हाथ धोएंगे मृत व्यक्ति की आत्मा को उतनी अधिक शांति मिलेगी। जबकि यह एक कुप्रथा है जो सीमांत किसानों को भूमिहीन बना देती है व निम्न मध्यवर्गीय परिवारों को अतिरिक्त कर्ज के बोझ में डाल देती है। श्राद्ध कर्म में विभिन्न प्रकार के दान की भी कुप्रथा समाज में है।

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