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LPG Subsidy News: केवल 9 करोड़ उज्जवलाओं के लिए 90% जनता की सब्सिडी छीनना कहां तक जायज़ है?

Janjwar Desk
4 Jun 2022 7:55 AM GMT
LPG Subsidy News: केवल 9 करोड़ उज्जवलाओं के लिए 90% जनता की सब्सिडी छीनना कहां तक जायज़ है?
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LPG Subsidy News: केवल 9 करोड़ उज्जवलाओं के लिए 90% जनता की सब्सिडी छीनना कहां तक जायज़ है?

LPG Subsidy News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता संभालने के दो साल बाद से ही देश की जनता को दो झटके लगे। इनमें लोग केवल नोटबंदी की ही बात करते हैं, लेकिन एलपीजी (LPG) की सब्सिडी छीने जाने की बात नहीं करते।

सौमित्र रॉय की रिपोर्ट

LPG Subsidy News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता संभालने के दो साल बाद से ही देश की जनता को दो झटके लगे। इनमें लोग केवल नोटबंदी की ही बात करते हैं, लेकिन एलपीजी (LPG) की सब्सिडी छीने जाने की बात नहीं करते। पहली जनवरी 2016 से केंद्र सरकार ने उन सभी लोगों की एलपीजी सब्सिडी बंद कर दी थी, जिनकी आय सालाना 10 लाख से ऊपर है। उस समय देश में 24 लाख लोगों की सालाना आय 10 लाख से अधिक थी। अभी यह संख्या केवल 10 लाख है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उज्जवला योजना की 9 करोड़ महिलाओं को छोड़कर बाकी सभी की एलपीजी सब्सिडी छीन ली।

यानी सरकार ने मान लिया कि देश में 45 करोड़ लोगों को छोड़कर बाकी सभी 1 हजार रुपए से अधिक कीमत के गैस सिलेंडर खरीदने का खर्च बिना सरकारी सहायता के उठा सकते हैं। कोविड महामारी के बाद जब देश में 23 करोड़ लोग गरीबी में पहुंच चुके हों, 40% आबादी के पास कोई काम-धंधा न हो, सरकार ने यह किस आधार पर मान लिया कि बाकी 70 करोड़ लोग महंगा गैस सिलेंडर खरीदने की क्षमता रखते हैं? सरकार ने इसी साल उज्जवला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडी 200 रुपए की सब्सिडी का ऐलान किया था। इस पर सरकार को केवल 6 हजार करोड़ खर्च करने होंगे।

गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने की सरकार की सुनियोजित योजना

अगर पिछले साल जी न्यूज की खबर को देखें तो केंद्र सरकार ने पिछले साल से ही इस पर विचार करना शुरू कर दिया था कि कैसे गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ाए जाएं। थोड़ा और पीछे चलें तो एलपीजी सिलेंडरों के दाम मई 2020 से बढ़ने शुरू हुए थे। उसके बाद केंद्र सरकार ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से 29 करोड़ परिवारों को एलपीजी सब्सिडी देनी अचानक बंद कर दी। बिजनेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण के अनुसार, इससे केंद्र सरकार को 27 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई। तब गैस सिलेंडर के दाम 600 रुपए थे, लिहाजा लोगों को बड़ा झटका नहीं लगा। खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2022 का बजट पेश करते हुए यह बात मानी है। उन्होंने कहा कि एलपीजी सब्सिडी पर सरकार का खर्च 14073 करोड़ होगा, जो कि पिछले साल की अनुमानित राशि 36178 करोड़ से कम है।

उज्जवला योजना का हाल

इस साल मई का आंकड़ा कहता है कि देश की 90 लाख उज्जवला योजना की लाभाथी महिलाओं ने एलपीजी सिलेंडर लेना बंद कर दिया है। इनके अलावा एक करोड़ महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने साल में केवल एक सिलेंडर उठाया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल, राजस्थान, असम जैसे राज्यों में एलपीजी का उपयोग 40-42% तक रह गया है। यानी 60% परिवारों से लकड़ी, कोयला या गोबर के ऊपलों का इस्तेमाल परेपरागत रूप से फिर शुरू कर दिया है। उत्तरप्रदेश के चुनाव में बीजेपी ने उज्जवला योजना का हवाला देते हुए 'लाभार्थी कार्ड' खेलकर खूब वोट बटोरे, लेकिन उसी उत्तरप्रदेश में उज्जवला योजना की आधी लाभार्थी महिलाएं चूल्हा फूंक रही हैं। उज्जवला योजना की शुरूआत 1 मई 2016 को उत्तरप्रदेश के ही बलिया जिले से की गई थी। सरकार ने एलपीजी पर बाकियों की सब्सिडी हटाकर ही इस योजना को लाने पर विचार किया था।



सरकार के पास गरीबी का डेटा नहीं है

सरकार ने उपभोक्ताओं के खर्च का आंकड़ा 2011 में जारी किया था, जिससे पता चला कि लोग किन मदों पर कितना खर्च कर पा रहे हैं और उन पर आर्थिक बोझ कितना है। उसके बाद राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSO) 2017-18 के आंकड़ों पर आधारित एक सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंपी, लेकिन उसे यह कहकर दबा दिया गया कि आंकड़े गलत हैं। मीडिया में लीक हुए सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, देश के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में लोगों के प्रतिमाह खर्च में बड़ी गिरावट आई है।


अब कोविड महामारी के बाद पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने और रूस-यूक्रेन युद्ध से सप्लाई चेन प्रभावित होने से महंगाई दर जिस तेजी से बढ़ी है, उसके बीच देश की 90% जनता से सब्सिडी का छिन जाना बड़ा झटका है। जनता कराह रही है। लेकिन सरकार अभी भी देश में गरीबी की दर 6% के पुराने आंकड़े को ही मानती है और यही लोगों का सबसे बड़ा दर्द भी है।

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