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वीडियो विश्लेषण : प्रेम करने वाले जोड़े की हत्या पर 90 फीसदी से ज्यादा दर्शकों ने कहा बहुत सही हुआ

Janjwar Desk
6 Jun 2021 2:10 PM GMT
वीडियो विश्लेषण : प्रेम करने वाले जोड़े की हत्या पर 90 फीसदी से ज्यादा दर्शकों ने कहा बहुत सही हुआ
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'इज्जत' के नाम पर की गयी हत्या के वीडियो को देख चुके हैं 13 लाख लोग, 60 फीसदी महिलाओं ने कहा नहीं करना चाहिए था परिवार को ऐसा, तो मर्दों की बड़ी जमात ने दी हत्यारों को शाबासी...

'जनज्वार' ने हर रविवार एक विशेष सीरीज शुरू की है। यह सीरीज जनज्वार के फेसबुक पेज पर आने वाले वीडियो के कमेंट्स पर आधारित होगा। यह भारतीय मीडिया में पहला प्रयोग है जब पाठकों की राय के आधार पर कोई विश्लेषण किया जाएगा। इसका मकसद सीधे पाठकों से जुड़ना है, जिससे समझा जा सके कि वह किसी समस्या को लेकर क्या समझते हैं। यह वीडियो विश्लेषण उन वीडियो का होगा जिनको कम से कम 5 लाख पाठकों ने देखा होगा और 500 से अधिक कमेंट होंगे। पढ़िए पाठकों पर किए गए पहले विश्लेषण को, जिसे किया है युवा लेखक हिमांशु जोशी ने...

जनज्वार। वर्ष 2015 में अनुष्का शर्मा की एक फ़िल्म आई थी 'एन-एच 10' याद होगी! झूठी शान के लिए की गई हत्या पर फ़िल्म आधारित थी। फ़िल्म की कहानी ग्रामीण इलाके पर आधारित थी, जिसमें शहर से आया दम्पत्ति भी घटनाक्रमों में शामिल हो जाता है।

'जनज्वार' के फेसबुक पेज पर 15 मई, 2021 को शाम साढ़े सात बजे उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर स्थित घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र बिराहीनपुर गांव में घर के अंदर अपनी नाबालिग बेटी और उसके प्रेमी को आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद ट्रक ड्राइवर पिता द्वारा दोनों को कुल्हाड़ी से काट डालने की ख़बर पर वीडियो पोस्ट किया गया था।

1 जून तक 13 लाख से भी ज्यादा लोगों द्वारा देखे जा चुके इस वीडियो पर तेरह हज़ार से ज्यादा लोग अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं, एक हज़ार से ज़्यादा लोगों ने इस पर टिप्पणी दी और पांच हज़ार से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो को साझा किया है।

झूठी शान और नाक की खातिर की गई इस हत्या पर समाज क्या सोचता है, यह हमें इस वीडियो पर लोगों द्वारा की गई टिप्पणियों से पता चल सकता है। उमेश पाल की टिप्पणी पर 136 लोग प्रतिक्रियाएं देते हैं। उमेश पाल कहते हैं पिता ने अगर एक ही को मारा होता तो वह गलत था, आपत्तिजनक हालत में देखने पर दोनों को मारा तो सराहनीय कार्य और वह ऐसा हर बाप को करने के लिए भी कहते हैं, जिससे सबमें डर बना रहे।

इस पर टिप्पणी करते हुए सोनी यादव लिखती हैं, हत्या करना अच्छा होता है तो तू भी अपनी बेटी को मार दे। उमेश के लिखे पर सोनी की इस टिप्पणी पर ही तीन-चार लोग सोनी नाम की महिला के लिए जिस तरह की भाषा का प्रयोग और गाली—गलौज करते हैं, उससे हमारे समाज की महिलाओं के प्रति मानसिकता को समझने में भी मदद मिलती है।

एडीवी मंजूर शेख तो यह निर्णय ही नहीं ले पा रहे कि वास्तव में लिखना क्या चाहिए, उनकी टिप्पणी है कि अपनी नाबालिग लड़की को ऐसे हालत में बालिग के साथ देखा होगा तो ज़ाहिर सी बात है गुस्से में मार दिया, हालांकि किसी को जान से मारना गलत है।

सतीश यादव हिंदू धर्म के ठेकेदार जान पड़ते हैं और लिखते हैं बहुत सही किया, हर एक परिवार वालों को ऐसा ही करना चाहिए, ताकि हिन्दू संस्कृति खत्म होने से पहले बच सके और कोई दूसरा ऐसा करने से पहले सौ बार सोचे।

ओम प्रकाश वैष्णव ओम अपने नाम के मुताबिक विचार वाले लगते और न ही उनकी लिखी हिंग्लिश समझ आती है, इसलिए विनय कुमार की टिप्पणी ली, हिंग्लिश में लिखी यह टिप्पणी समझनी थोड़ा आसान है। वह लिखते हैं कि जब वार्निंग दी थी तो नही जाना चाहिए, सही किया।

https://www.facebook.com/janjwar/videos/321305832888935

पिंकी वर्मा शालिनी वर्मा को उन बच्चों की मां से हमदर्दी थी और उन्होंने इस बात को गलत कहा। संदीप पटेल कहते हैं, यह उस तरह की लड़कियां हैं जो प्यार में पड़कर बाद में कहती हैं मुझे मेरा बाप मार डालेगा। इनको मार के इनकी दोनों लाशों को भी ठिकाने लगा देना चाहिए था, पुलिस से कहना था * फलाने के साथ भाग गई।

अल सबर लिखते हैं, बहुत ही सराहनीय काम किया है भाई ने, बहुत परिश्रम से परवरिश होती है बच्चों की। जगबीर कुमार लिखते हैं, बाप ने बिल्कुल सही किया है और हर एक बाप का ये करना भी जरूरी है।

दलजीत सिंह ने लिखा बहुत बढ़िया करे भाई, सत्यम सिंह भी सही किया लिखते हैं। आफ़ताब आलम भी अच्छा किया लिख हत्यारे पिता के पक्ष में हैं। यानी यहां एक बात समझ में आती है कि धर्म के ठेकेदार चाहे हिंदू हों या मुस्लिम वह इस तरह बाप द्वारा हत्या किये जाने का समर्थन करते नजर आते हैं।


ख़ुर्शीद अहमद ने लिखा, सही किया, पागल हो गए हैं आशिक़ी के चक्कर में पूरा घर रुलाया। प्यार मध्यमवर्गीय के लिए नही, अमीरों की मज़े लेने की चीज़ है। भोगेन्द्र राज रॉय ने भी लिखा, बहुत सही किया। किशोर भाई लिखते हैं लाइफ़ में पहली बार किसी बाप ने अपना फ़र्ज़ निभाया। अब आंखें खोलो दुनिया वालों और इनका साथ दो।

बसंत प्रजापति ने लिखा कि गुस्सा किसी तूफान से कम नहीं होता, लेकिन जो हुआ अफ़सोस की बात है। सेना के जवान की पेंटिंग को अपनी प्रोफाइल पिक्चर बनाए रियाज़ अहमद लिखते हैं कानून को अपने हाथ में नही लेना था पिता को बट सही किया!!!

धर्मराज सिंह लिखते हैं कि वेरी गुड, बहुत सही किया है बाप ने। जसवीर ठाकुर ने लिखा बहुत अच्छा किया है। संतोष सिंह लिखते हैं ऐसे पिता को सैल्यूट बनता है। नीरज कुमार ने लिखा बहुत सही किया बाप ने। विनय जाटव भी पिता की तरफ़ रहते हुए लिखते हैं एकदम सही किया। अहमद खान किसी विद्यालय के मास्टर या किसी क्रिकेट टीम के कोच जान पड़ते हैं, वह लिखते हैं गुड जॉब अच्छा किया बाप ने।

पाल अग्रवाल तो राजनीति और एक हिंदी फ़िल्म में अमरीश पुरी के निभाए किरदार मोगेम्बो से ज्यादा ही प्रेरित दिखाई लगते हैं, वह लिखते हैं योगी खुश हुआ, लड़की के बाप को बुलाइए इनाम मिलेगा।

रमेन्द्र द्विवेदी लिखते हैं लड़की का पिता सही है अपनी जगह। आरती मिश्रा सवाल पूछना चाहती हैं या अपनी राय दे रही हैं यह समझ नही आता। वह लिखती हैं कि गलत क्या किया दोनों को मार दिया।

एमडी शरीफ नाम के अनुसार बेहद शरीफ़ नज़र आते हैं और चुपके से टिप्पणी पर करेक्ट का स्टिकर चिपका देते हैं। संदीप पाल पहले ऐसे व्यक्ति नज़र आते हैं, जिन्हें प्यार करने वालों से हमदर्दी है वह लिखते हैं क्या प्यार करना गलत है भाई। वीडियो में की गयीं अधिकतर टिप्पणियां नफ़रत से भरी हुई थी, इतनी लिजलिजी कि इंसानियत शरमा जाये।

मोटामोटी आंकड़ा निकाला जाये तो केवल चार प्रतिशत लोगों को मरने वालों से सहानुभूति थी, बाकि सबका यही कहना था कि पिता ने ऐसा कर ठीक ही किया। टिप्पणी करने वाली महिलाओं की बात करें तो लगभग साठ प्रतिशत महिलाओं को प्रेमी जोड़े से सहानुभूति थी और चालीस प्रतिशत ने पिता को ही सही बताया।

सबसे बड़ी बात यह है कि नफ़रत भरी टिप्पणी करने वाले अधिकतर वह लोग हैं, जिन्हें न हिंदी अच्छे से लिखने आती है और न ही अंग्रेज़ी और इनका ज्यादातर ज्ञान वाट्सएप यूनिवर्सिटी से जुटाया गया लगता है। अगर इनके परिवार वालों को ही यह टिप्पणियां पढ़ा दी जाएं तो मारे शर्म के इनका मुंह लाल हो जाए।

इस वीडियो के साथ की गयी टिप्पणियों में जिस अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग किया गया है, उससे लगता है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध ऐसे ही लोगों की वज़ह से लगाया जाता है, जो ऐसे मौकों का फ़ायदा उठा हिंसा फैलाते हैं, इन लोगों की न कोई जाति होती है न धर्म। किसी मशहूर व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट पर यह लोग उसकी टांग खींचने या उसे मुफ्त का ज्ञान देने से पीछे नहीं रहते।

जनज्वार ने यह प्रयोग पत्रकारिता में अब तक लगभग असंभव माने जाने वाले फीडबैक को प्राप्त करने के लिए किया गया है, जिससे यह पता चले कि समाचारों में दिखाई जा रही इन खबरों के प्रति समाज के लोगों का क्या नज़रिया है, क्या ऐसी खबरों को दिखाए जाने के बाद लोग ऐसे अपराध कम करते हैं , क्या अपने मन में इतनी नफ़रत पाले इन लोगों को पत्रकारिता के माध्यम से जागरूक कर सुधारा जा सकता है।

भारतीय समाज आज चाहे कितना भी पश्चिम का आडम्बर ओढ़ ले, पर अपने समाज में उसे आज भी प्रेम सम्बन्धों से नफ़रत है। वह इसे अनैतिक मानता है, यह हमारी शिक्षा प्रणाली और संस्कारों की ही कमी है जो हम आज तक अपनी अगली पीढ़ी को प्रेम, महिलाओं के सम्मान के अर्थ नही समझा पाए। यह झूठी आन की वज़ह से ली जा रही मौतें जाने कब ख़त्म होगी।

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