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बुल्डोजर से जनता के घरों और कारोबार को रौंदती भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह कमल से बदलकर कर देना चाहिए बुल्डोजर !

Janjwar Desk
17 Feb 2026 5:03 PM IST
बुल्डोजर से जनता के घरों और कारोबार को रौंदती भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह कमल से बदलकर कर देना चाहिए बुल्डोजर !
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उत्तराखंड में 33 प्रतिशत वनों के मानकों के मुकाबले 71 प्रतिशत से भी अधिक वन भूमि है। सरकार उत्तराखंड में वनों के लिए 50 प्रतिशत भूमि भी रखें तब भी ये काफी होगा, शेष 50 प्रतिशत वन भूमि पर जनता को अधिकार मिलना चाहिए...

रामनगर। आज 17 फरवरी को उत्तराखंड में बढ़ती बुलडोजर कार्रवाइयों और भूमि एवं आवास से जुड़े गंभीर संकट के विरोध में आयोजित जन सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन में सर्वसम्मति से तत्काल प्रभाव से सभी प्रकार की बेदखली की कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की गई। सम्मेलन में बेदखली की मार झेल रहे गांव, गोठ खत्तों व शहरी बस्तियों में पीपुल्स एसेंबली आयोजित करने तथा देहरादून को घेरने का प्रस्ताव पारित किया गया।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि भाजपा जिस तरह से लोगों को बुलडोजर कार्रवाई के द्वारा घरों खेतों व कारोबार से बेदखल कर रही है उसे देखते हुए भाजपा का चुनाव चिह्न कमल के फूल की जगह बुलडोजर कर देना चाहिए, ताकि वोट के समय जनता भाजपा की सही से पहचान कर सकें।

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में 33 प्रतिशत वनों के मानकों के मुकाबले 71 प्रतिशत से भी अधिक वन भूमि है। सरकार उत्तराखंड में वनों के लिए 50 प्रतिशत भूमि भी रखें तब भी ये काफी होगा, शेष 50 प्रतिशत वन भूमि पर जनता को अधिकार मिलना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि मलिन बस्ती अधिनियम में साफ लिखा है कि किसी को भी उसकी सहमति से पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर हटाया नहीं जाएगा। इसके बावजूद भी शहरों से गरीबों को बेदखल कर सरकार द्वारा कानून व संविधान का उल्लंघन किया जा रहा है।

उत्तराखंड के कोने-कोने से पहुंचे प्रभावित समुदायों और राजनीतिक सामाजिक संगठनों ने वन अधिकार अधिनियम, 2006 को पूरी गंभीरता से लागू किए जाने, वन भूमि पर बसे सभी लोगों को उनकी भूमि और वनों पर मालिकाना एवं प्रबंधन अधिकार दिए जाए, शहरी बस्तियों के नियमीकरण के लिए बनाया गया 2016 का बस्ती अधिनियम (मालिन बस्ती अधिनियम) तुरंत प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, किसी भी व्यक्ति या परिवार को उनके घर या आजीविका से बेदखल न किया जाए। यदि बेदखली अपरिहार्य हो, तो प्रभावित व्यक्ति की सहमति एवं सक्रिय भागीदारी के साथ उचित एवं मानवोचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए, न्यायालय के आदेशों और प्रचलित कानूनों की अवहेलना करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा 7 दिसंबर को पूछड़ी व अन्य क्षेत्रों से बेदखल किए गए सभी परिवारों का पुनर्वास किया जाए।

सभा को समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के तरुण जोशी, बापू ग्राम संघर्ष समिति के सुरेंद्र सिंह नेगी, महिला किसान मंच की हीरा जंगपांगी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की ललिता रावत, वन गूजर युवा ट्राइबल संगठन के नजाकत अली, अमानत अली, शमशाद भाई,बग्गा चौवन के धर्म सिंह, राष्ट्रीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के मुन्नी लाल, चरण सिंह,जन अधिकार मंच के विश्वजीत, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मौ आसिफ, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल, वन समिति देवी चौड़ा खत्ता के खीम राम, पूछड़ी वन समिति की रेनु, पान सिंह रौतेला, राजा, मजदूर नेता सुनीता,क्रालोस के नासिर अहमद आदि ने संबोधित किया।

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