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चीन ने अब भारतीय न्यूज वेबसाइटों को खोलने में अटकाया रोड़ा, न्यूज चैनल देखना भी मुश्किल

Janjwar Desk
30 Jun 2020 4:27 AM GMT
चीन ने अब भारतीय न्यूज वेबसाइटों को खोलने में अटकाया रोड़ा, न्यूज चैनल देखना भी मुश्किल

चीन में सूचनाओं पर सेंसरशिप पहले से लागू है। अब उसने भारतीय समाचार माध्यमों को तकनीक का प्रयोग करते हुए एक तरह से बैन कर दिया है...

जनज्वार। गलवान घाटी झड़प के बाद भारत एवं चीन का संबंध 45 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। भारत सरकार ने चीन के खिलाफ कई कदम उठाए हैं, इसके जवाब में वह भी अपनी ओर से कार्रवाई कर रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी टकराव की स्थिति बनी हुई है। 15 जून के गलवान घाटी झड़प (जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे) के बाद भारतीय मीडिया का रुख चीन के खिलाफ है। प्रेस के माध्यम से आम भारतीयों का गुस्सा प्रकट हो रहा है। इसके साथ ही भारतीय मीडिया में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की अवैध गतिविधियां और अवैध निर्माण कार्य की खबरें भी लगातार आ रही हैं। ऐसे में चीन ने अपने यहां वैसी खबरों को देखने-पढने पर अवरोध खड़ा कर दिया है।

चीन में भारतीय अखबारों की वेबसाइट, अन्य न्यूज वेबसाइट नहीं खुल रहे हैं और न ही यहां का टीवी चैनल देखना संभव हो पा रहा है। भारतीय मीडिया ने चीन की सेना पीएलए, वहां की प्रोपेगेंडा साइट के खिलाफ खबरें प्रसारित की तो उसके बाद उसने यह कदम उठाया है।

चीन में बिना वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) सर्वर के भारतीय न्यूज वेबसाइट को नहीं खोला जा सकता है। पर पिछले दो दिनों से चीन में वीपीएन आइ फोन या डेस्कटाॅप पर काम नहीं कर रहा है। वीपीएन एक ऐसा पाॅवरफुल टूल है, जिसके माध्यम से यूजर ब्लाॅक या सेंसर की गई वेबसाइट को भी खोल सकता है। पर, चीन ने उससे एडवांस टेक्नोलाॅजी विकसित कर ली है और वीपीएन को भी ब्लाॅक कर दिया है।

चीन अपने मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में सेंसरशिप को लेकर चर्चा में आता रहा है। उसने इसके लिए उच्च प्रौद्योगिकी युक्त हस्तक्षेप प्रणाली विकसित कर लिया है। उदाहरण के तौर पर अगर हांगकांग प्रोटेस्ट जैसा शब्द किसी अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल के समाचार प्रसारण में आता है तो स्क्रीन ब्लैक हो जाता है और जब वह समाचार खत्म होता है तभी फिर से प्रसारण दिख पाता है। ऐसा ही वह अपने खिलाफ दिखाये जाने वाली दूसरी खबरों के संबंध में भी करता है।

मालूम हो कि सोमवार को भारत ने चीन के 59 एप को अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया है। भारत ने ऐसा डेटा लीक होने के खतरे के मद्देनजर किया है और इन्हें भारत की संप्रभुता, एकता व सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

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