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बीते 5 वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण में कैसे कामयाब हुआ चीन?

Janjwar Desk
2 Jan 2021 7:24 AM GMT
बीते 5 वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण में कैसे कामयाब हुआ चीन?
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चीन में अक्तूबर से मार्च महीने के बीच प्रदूषण की समस्या देखने में आती है क्योंकि देश के कुछ क्षेत्रों में हीटिंग के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है, हालांकि बीजिंग में अब कोयला चालित हीटिंग पूरी तरह से बंद हो चुकी है....

बीजिंग से अनिल आजाद पांडेय की रिपोर्ट

जनज्वार। चीन में कुछ साल पहले तक प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर थी। खासतौर पर उत्तरी चीन के कुछ बड़े शहरों में वायु प्रदूषण प्रमुख चिंता का विषय था। जिसमें राजधानी बीजिंग भी शामिल था लेकिन चीन सरकार ने हाल के वर्षो में इस समस्या को हल करने के लिए पूरी कोशिश की है। इसी का नतीजा है कि आजकल चीन के तमाम क्षेत्रों में प्रदूषण बेहद कम हो चुका है।

बीजिंग की बात करें तो, यहां के लोगों को इस साल अब तक ठंड के मौसम में न के बराबर प्रदूषण या धुंध की परेशानी झेलनी पड़ी है लेकिन कुछ वर्ष पहले तक ऐसा सोचना भी संभव नहीं था। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं, जो कि मैंने यहां पर रहते हुए महसूस किया है। असल में, चीन में हरियाली बढ़ाने और पार्कों की स्थापना करने पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है। इसका परिणाम हमारे सामने है।

यहां बता दें कि चीन में अक्तूबर से मार्च महीने के बीच प्रदूषण की समस्या देखने में आती है क्योंकि देश के कुछ क्षेत्रों में हीटिंग के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है। हालांकि बीजिंग में अब कोयला चालित हीटिंग पूरी तरह से बंद हो चुकी है।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो इस वर्ष के अक्तूबर महीने से अब तक बीजिंग-थ्येनचिन-हबेई प्रांत के क्लस्टर व यांग्त्जी नदी के डेल्टा आदि क्षेत्रों में प्रदूषण में साल 2015 की तुलना में 86 फीसदी की कमी रिकार्ड की गयी है। जबकि पिछले वर्ष के मुकाबले 47 प्रतिशत की गिरावट प्रदूषण के लेवल में देखी गई है। यह दर्शाता है कि चीन ने प्रदूषण की समस्या को कितनी गंभीरता से लिया है।

जाहिर है कि चीन के सभी प्रभावित क्षेत्रों में एयर क्वालिटी में बेहद सुधार आया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल बीजिंग में सर्दियों के दौरान भारी प्रदूषण नहीं हुआ। इतना ही नहीं पिछले चालीस दिनों में वायु की गुणवत्ता बहुत अच्छी रही है।

चीन के एक संबंधित अधिकारी ने बताया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण में सरकार के प्रयासों के चलते, इस साल देश के 337 प्रमुख शहरों में पीएम 2.5 पार्टिकुलेट मैटर का औसत घनत्व 31 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया जो कि डब्ल्यूएचओ के अंतरिम टारगेट 35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम है।

इसके साथ ही संबंधित विभाग उन क्षेत्रों में स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर पूवार्नुमान को बढ़ाने की दिशा में काम करेगा और संभावित वायु प्रदूषण से निपटने के उपाय भी लागू किए जाएंगे।

(लेखक चाइना मीडिया इंटरनेशनल से जुड़े हैं)

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