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पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश आयशा मलिक की नियुक्ति | First Women Justice Ayesha Malik in Pakistan Supreme Court

Janjwar Desk
8 Jan 2022 8:42 AM GMT
पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश आयशा मलिक की नियुक्ति | First Women Justice Ayesha Malik in Pakistan Supreme Court
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पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश आयशा मलिक की नियुक्ति | First Women Justice Ayesha Malik in Pakistan Supreme Court

First Women Judge in Pakistan Supreme Court: पाकिस्तान में लाहोर उच्च न्यायालय की चर्चित महिला न्यायाधीश, आयशा मलिक (Justice Ayesha Malik) की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति का अनुमोदन वहां के सर्वोच्च न्यायिक आयोग (top judicial commission) ने किया है|

महेंद्र पाण्डेय की रपोर्ट

First Women Judge in Pakistan Supreme Court: पाकिस्तान में लाहोर उच्च न्यायालय की चर्चित महिला न्यायाधीश, आयशा मलिक (Justice Ayesha Malik) की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति का अनुमोदन वहां के सर्वोच्च न्यायिक आयोग (top judicial commission) ने किया है| जस्टिस आयशा मलिक पाकिस्तान के इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनाने वाली पहली महिला होंगी| 55 वर्षीय न्यायाधीश आयशा मलिक की नियुक्ति का स्वागत सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद (Justice Gulzar Ahmed, Chief Justice of Pakistan Supreme Court) ने भी किया है| इस नियुक्ति का जोरदार स्वागत मानवाधिकार, लैंगिक समानता और जनता के सरोकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भी किया है और इसे ऐतिहासिक घटना करार दिया है| इन संगठनों को उम्मीद है कि इससे पाकिस्तान में लैंगिक समानता को एक नई दिशा मिलेगी और मानवाधिकार को भी बल मिलेगा|

जस्टिस मलिक पिछले वर्ष चर्चा में तब आयीं थीं, जब उन्होंने बलात्कार पीड़ित महिलाओं के कौमार्य परीक्षण पर प्रतिबन्ध (Ban on virginity test for rape survivors) का फैसला सुनाया था| उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि इस परीक्षण से हम बलात्कार पीडिता को ही गुनाहगार साबित करने लगते हैं| क़ानून और न्याय से सम्बंधित संसदीय समिति की सचिव सचिव मलिका बाखरी (Maleeka Bakhari) ने भी इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है और कहा है कि इससे पाकिस्तान में महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेणना मिलेगी| अधिकतर लोग और संगठन इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, पर कुछ विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं| सर्वोच्च न्यायालय के वकीलों के एक समूह ने इस कदम का विरोध किया है और कहा है कि इस नियुक्ति में न्यायाधीशों की वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया है| दरअसल जस्टिस मलिक का नाम लाहौर उच्च न्यायालय के तीन सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों में भी शामिल नहीं है| पर, दूसरे संगठन इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, और उनकी दलील है कि आजादी के बाद से न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की लगातार उपेक्षा की गयी है, और उनकी वरिष्ठता को हमेशा अनदेखा किया गया है| पिछले वर्ष भी जस्टिस मलिक के नाम पर चर्चा की गयी थी, पर उस समय उनके नाम का अनुमोदन नहीं किया गया था|

इस कदम का स्वागत पूरे दक्षिण एशिया में किया जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया में सबसे अधिक लैंगिक असमानता वाला क्षेत्र (Region having greatest gender disparity) है| वर्ल्ड इकनोमिक फोरम के जेंडर गैप इंडेक्स में पिछले वर्ष कुल 156 देशों की सूचि में केवल बांग्लादेश का स्थान इंडेक्स में 100 के कम था, यह 65वें स्थान पर था| इसके बाद नेपाल 106वें, श्रीलंका 116वें, मालदीव्स 128वें, भूटान 130वें, भारत 140वें, पाकिस्तान 153वें और अफ़ग़ानिस्तान 156वें स्थान पर था| इंडेक्स में पाकिस्तान से नीचे केवल इराक, यमन और अफ़ग़ानिस्तान ही थे| इंडेक्स के अनुसार पाकिस्तान में लैंगिक समानता आने में अगले 136.5 वर्ष लगेंगे|

हमारे देश में सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश, जस्टिस फातिमा बीवी (Justice Fatima Beevi), की नियुक्ति 6 अक्टूबर 1989 में की गयी थी और अब तक कुल 11 महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की गयी है| 31 अगस्त 2021 को तीन महिला न्यायाधीशों – जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना (Justice Hima Kohli, Justice Bela Trivedi & Justice B V Nagarathna) की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय में की गयी है| कानून के जानकारों के अनुसार वर्ष 2027 में जस्टिस बी. वी. नागरत्ना, देश की पहली प्रमुख न्यायाधीश बन सकती है|

नेपाल में सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख न्यायाधीश जस्टिस सुशीला कार्की (Justice Sushila Karki), 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक रह चुकी हैं| बांग्लादेश में वर्ष 2018 में जस्टिस नजमुं आरा (Justice Nazmun Ara), सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश बनीं| जस्टिस नजमुं आरा बांग्लादेश में उच्च न्यायालय में भी न्यायाधीश बनाने वाली पहली महिला थीं| अफ़ग़ानिस्तान भले ही लैंगिक समानता में सबसे पीछे रह गया हो, पर वर्ष 2015 में ही वहां जस्टिस अनीसा रसूली (Justice Anisa Rassouli) की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय में की गयी थी, जो पहले महिला न्यायाधीश थीं| पिछले वर्ष तालिबान के कब्जे से पहले अफ़ग़ानिस्तान के न्यायालयों में 200 से 250 तक महिला न्यायाधीश थीं| अब अधिकतर न्यायाधीश या तो देश छोड़कर कहीं और जा चुकी हैं, या फिर देश में ही अज्ञात स्थान पर छिपकर रह रही हैं| पहले भी, इन न्यायाधीशों का जीवन खतरे में था – जनवरी 2021 में काबुल में सर्वोच्च न्यायालय के दो महिला न्यायाधीशों की ह्त्या कर दी गयी थी|

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