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कुवैत ने अप्रवासी कोटा विधेयक को दी मंजूरी, करीब 8 लाख भारतीयों की छिन जाएगी नौकरी

Janjwar Desk
6 July 2020 11:18 AM GMT
कुवैत ने अप्रवासी कोटा विधेयक को दी मंजूरी, करीब 8 लाख भारतीयों की छिन जाएगी नौकरी
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विधेयक के मुताबिक, भारतीयों की आबादी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, कुवैत से 8,00,000 भारतीय निकल सकते हैं, क्योंकि भारतीय समुदाय किसी भी देश में सबसे बड़ा अप्रवासी समुदाय है....

जनज्वार ब्यूरो। कोरोना वायरस की महामारी के बीच कुल आठ लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है चूंकि कुवैत की नेशनल असेंबली कमेटी ने अप्रवासी कोटा विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह बिल खाड़ी देशों में विदेशी श्रमिकों की संख्या को कम करने की बात करता है।

नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने निर्धारित किया है एक्सपेट कोटा बिल संवैधानिक है। बिल के मुताबिक, भारतीयों की आबादी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। गल्फ न्यूज ने कुवैत के एक अखबार का हवाला देते हुए बताया कि कुवैत से 8,00,000 भारतीय निकल सकते हैं, क्योंकि भारतीय समुदाय किसी भी देश में सबसे बड़ा आप्रवासी समुदाय है।

कोरोना के बढ़ते संक्रण के साथ ही वहां प्रवासियों के खिलाफ बयानबाजी शुरू हो चुकी थी। इसके बाद स्थानीय शासन और सरकारी अधिकारियों ने कुवैत से विदेशियों की संख्या कम करने की बात कही। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, कुवैत में कोरोनो वायरस के 49,000 से अधिक मामले सामने आए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने कुवैत के प्रधानमंत्री, शेख सबा अल खालिद अल सबाह ने अप्रवासियों की आबादी 70 से घटाकर 30 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा था।

कुवैत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक असेंबली स्पीकर घनेम ने कहा कि कुवैत की अपनी जनसंख्या संरचना में एक वास्तविक समस्या है जिसमें 70 प्रतिशत बाहरी होते हैं। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक जो अधिक गंभीर मुद्दा है वो यह है कि 3.35 मिलियन विदेशियों में से 1.3 मिलयन या तो अनपढ़ या कुछ लिख-पढ़ सकते हैं जिनकी कुवैत को आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि हमें डॉक्टरों और कुशल श्रमशक्ति की भर्ती करनी चाहिए, अकुशल मजदूरों की नहीं। यह एक विकृति का संकेट है। इस आंकड़े को बढ़ाने में वीजा व्यापारियों ने योगदान दिया है।

अरब न्यूज के मुताबिक, यह अप्रवासी कोटा विधेयक अब संबंधित विचार समिति को भेजा जाएगा। विधेयक के मुताबिक भारतीय प्रवासी समुदाय राष्ट्रीय जनसंख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए जिसका मतलब है कि उनमें से लगभग 8,00,000 को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है।

कुवैत में भारतीय दूतावास के अनुसार, विभिन्न तेल कंपनियों, राष्ट्रीय तेल कंपनियों में इंजीनियरों और कुछ वैज्ञानिकों के रूप में विभिन्न नौकरियों में कुवैती सरकार के लिए लगभग 28,000 भारतीय काम कर रहे हैं। अधिकांश भारतीय (5.23 लाख) निजी क्षेत्रों में तैनात हैं। इसके अलावा, लगभग 1.16 लाख आश्रित हैं।

इनमें से 23 भारतीय स्कूलों में 60,000 भारतीय पढ़ते हैं। इसके अलावा कुवैत से भारत को धन भेजने के मामले में कुवैत में रहने वाले भारतीय अब तक शीर्ष पर रहे हैं। साल 2018 में अकेले कुवैत से भारत ने 4.8 बिलियन डॉलर की रेमीटेंस प्राप्त की थी।

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