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नेपाल में फिर प्रचण्ड राज, आज लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, जिस ओली को पीएम पद से हटवाया उन्हीं के समर्थन से तीसरी बार आये सत्ता में

Janjwar Desk
26 Dec 2022 10:04 AM GMT
नेपाल में फिर प्रचण्ड राज, आज लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, जिस ओली को पीएम पद से हटवाया उन्हीं के समर्थन से तीसरी बार आये सत्ता में
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नेपाल में फिर प्रचण्ड राज, आज लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, जिस ओली को पीएम पद से हटवाया उन्हीं के समर्थन से तीसरी बार आये सत्ता में

Pushpa Kamal Dahal Prachand : 11 दिसंबर 1954 को नेपाल पोखरा के निकट कास्की जिले के धिकुरपोखरी में जन्मे पुष्प कमल दहल "प्रचण्ड" करीब 13 साल तक अंडरग्राउंड रहे। सीपीएन-माओवादी ने जब एक दशक लंबे सशस्त्र विद्रोह का रास्ता त्यागकर शांतिपूर्ण राजनीति का मार्ग अपनाया तो प्रचण्ड तब मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होकर नेपाली अस्मिता का मुख्य चेहरा बन गए थे...

काठमांडू। पड़ोसी देश नेपाल में रविवार को नेपाल में तेजी से बदले सियासी समीकरण के बाद चीन के करीब माने जाने वाले नेपाली नेता पुष्प कमल दहल "प्रचण्ड" के तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। नेपाल की कमान एक बार फिर पुष्प कमल दहल "प्रचण्ड" के हाथों में सौंपते हुए नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उनको देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि तीसरी बार देश की कमान संभालने वाले प्रचण्ड इस बार उन्हीं केपी शर्मा ओली की पार्टी के समर्थन से प्रधानमंत्री बन रहे हैं, जिन्हें प्रचण्ड की वजह से ही प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। हालिया चुनाव से पूर्व प्रचण्ड ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की पार्टी के साथ अपना गठबंधन किया था। लेकिन चुनाव के बाद की बनी परिस्थितियों के मद्देनजर प्रचण्ड ने देउबा से अपना गठबंधन तोड़कर केपी शर्मा ओली के साथ हाथ मिला लिया है। बताया जा रहा है कि केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के बीच ढाई-ढाई साल की सत्ता के लिए समझौता हुआ है। पहले ढाई साल प्रचंड प्रधानमंत्री रहेंगे उसके बाद केपी शर्मा ओली यह पद संभालेंगे।

यह है सदन की स्थिति

275 सदस्यीय नेपाली संसद में बहुमत का जादुई आँकड़ा 138 सीट है। देश के हालिया चुनाव में देउबा की नेपाली कांग्रेस 89 सीटें जीतकर सदन की सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई लेकिन प्रचण्ड खेमे की 32 सीटें मिलाकर भी बहुमत से बहुत ज्यादा दूर है। 78 सीटें केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन/यूएमएल के पास हैं। 20 सीटें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, 14 सीटें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, 6 सीटें जनमत पार्टी, 12 जनता समाजवादी पार्टी व 4 सीटें नागरिक उन्मुक्त पार्टी के पास हैं।

भारत से सीमा विवाद के बाद अलग हो गई थीं प्रचण्ड और ओली की राहें

जिन केपी शर्मा ओली के समर्थन से प्रचण्ड इस बार सत्ता संभालने जा रहे हैं, दो साल पहले तक प्रचण्ड उन्हीं ओली सरकार का हिस्सा थे। भारत के साथ कालापानी और लिपुलेख सीमा विवाद के बाद उन्होंने अपने सात मंत्रियों से इस्तीफे दिलाकर ओली को कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद प्रचण्ड नेपाली कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शेर बहादुर देउबा के साथ हो गए। प्रचण्ड के समर्थन के बाद देउबा प्रधानमंत्री बने थे।

हाल ही में हुए आम चुनाव के बाद नेपाली संसद में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला लेकिन नेपाली कांग्रेस 89 सीटें जीतकर सदन की सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी। लेकिन इस बार प्रचंड ने सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों का दो साल पुराना गठबंधन टूट गया।

देउबा को भरोसा नहीं था प्रचण्ड पर

आम चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद देउबा की नेपाली कांग्रेस और प्रचण्ड की सीपीएन-माओवादी मिलकर बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद की शर्त पर सरकार बनाने को तो तैयार थे। लेकिन प्रधानमंत्री पद पर पहली ताजपोशी का विवाद नई सरकार के गठन में रोड़ा साबित हुआ। प्रचण्ड की पार्टी की ओर से इसमें सबसे बड़ी शर्त थी कि प्रचण्ड पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन इस पर देउबा की पार्टी राजी नहीं थी।

नेपाली कांग्रेस सीपीएन का रिकॉर्ड देखते हुए उस पर भरोसा करने को तैयार नहीं थी। उसे इस बात की आशंका थी कि ढाई साल सत्ता में रहने के बाद सीपीएन कोई बहाना बनाकर समर्थन वापस ले सकती है। यहीं आकर वह पेंच फंसा, जिसने प्रचण्ड को एक बार फिर से ओली की पार्टी (सीपीएन-यूएमएल) की तरफ जाने को मजबूर कर दिया।

ओली के निजी आवास पर बुना गया नई सरकार का तानाबाना

नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री देउबा के साथ बातचीत विफल होने के बाद प्रचण्ड ने अपने प्रधानमंत्री बनने के लिए समर्थन के लिए सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के निजी आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की। यहां प्रचण्ड के अलावा अन्य छोटे दलों के नेताओं ने जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगडेन और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भी ओली के आवास पर आयोजित इस संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया। इसी बैठक में ओली और प्रचण्ड के बीच यह सहमति बन गई।

नेपाल राष्ट्रपति भवन ने दी जानकारी

नेपाल के राष्ट्रपति कार्यालय की सूचना के अनुसार नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने माओवादी केंद्र के नेता पुष्प कमल दहल "प्रचण्ड" को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।

PM मोदी ने दी बधाई

नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में पुष्प कमल दहल की ताजपोशी तय होने के बाद भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए एक ट्वीट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प कमल दहल को नेपाल का पीएम चुने जाने पर ट्वीट किया है कि भारत और नेपाल के बीच अद्वितीय संबंध गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच गर्मजोशी के संबंधों पर आधारित है। मैं इस दोस्ती को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने की आशा रखता हूं।

तीसरी बार नेपाल की कमान संभालेंगे प्रचण्ड

सोमवार की शाम चार बजे काठमांडू में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले प्रचण्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। पहली बार वे 2008 से 2009 और दूसरी बार 2016 से 2017 में इस पद पर रह चुके हैं। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के पुष्प कमल दहल छः दलों के गठबंधन वाले समझौते के तहत नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। बीते डेढ़ दशक में नेपाल में 13वीं बार प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण का मंच तैयार है।

हथियारबंद संघर्ष से लेकर चुनावी राजनीति तक प्रचण्ड का है दिलचस्प सफर

11 दिसंबर 1954 को नेपाल पोखरा के निकट कास्की जिले के धिकुरपोखरी में जन्मे पुष्प कमल दहल "प्रचण्ड" करीब 13 साल तक अंडरग्राउंड रहे। सीपीएन-माओवादी ने जब एक दशक लंबे सशस्त्र विद्रोह का रास्ता त्यागकर शांतिपूर्ण राजनीति का मार्ग अपनाया तो प्रचण्ड तब मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होकर नेपाली अस्मिता का मुख्य चेहरा बन गए थे। वैचारिक रूप से चीन की ओर झुकाव वाले नेता प्रचण्ड ने 1996 से 2006 तक एक दशक लंबे सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था। जो अंततः नवंबर 2006 में व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ था।

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