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कोविड -19

21 सितंबर से स्कूल खोलना छात्रों के लिए हो सकता है जानलेवा

Janjwar Desk
10 Sep 2020 7:36 AM GMT
21 सितंबर से स्कूल खोलना छात्रों के लिए हो सकता है जानलेवा
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file photo
हमारे नौनिहाल उस समय स्कूल जायेंगे जब कोविड 19 के संक्रमण के मामले में हरेक दिन हम एक नया और अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित करते जा रहे हैं, और इन दिनों इससे मौत के आंकड़ों में भी किसी भी देश से आगे हैं...

महेंद्र पाण्डेय की टिप्पणी

लम्बे इंतज़ार के बाद स्कूलों के खुलने का समय आ गया है। सरकार ने ऐलान किया है कि 21 सितम्बर से 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए स्कूल के दरवाजे खुल जायेंगे। आश्चर्य यह है कि विद्यार्थी उस समय स्कूल जायेंगे जब कोविड 19 के संक्रमण के मामले में हरेक दिन हम एक नया और अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित करते जा रहे हैं, और इन दिनों इससे मौत के आंकड़ों में भी किसी भी देश से आगे हैं।

इस दौर में स्कूल खोलने से संभव है कि कोविड 19 के मामले और तेजी से बढ़ें। ऐसा अमेरिका और इजराइल समेत अनेक देशों में हो चुका है। इसके अनेक कारण हैं, पर सबसे बड़ा कारण यह है कि विद्यार्थियों की उम्र में अधिकतर संक्रमण बिना लक्षण वाले हो रहे हैं, जिसमें बच्चों या उनके अभिभावकों को पता ही नहीं होता कि वे संक्रमित हैं और इसके बाद वे स्वयं ठीक भी हो जाते हैं।

जिन बच्चों में कोविड 19 के लक्षण उजागर भी होते हैं, तो वे सामान्य लक्षण – तेज बुखार, लगातार खांसी और स्वाद या महक का नहीं पता चलना - नहीं होते जिनसे हम कोविड 19 की पहचान करते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों में प्रमुख लक्षण हैं, थकान, सिरदर्द, और पेट का खराब होना। इन सारे लक्षणों के बाद कोविड 19 का टेस्ट भी कोई नहीं करवाता, और कुछ दिनों में बच्चे खुद ही ठीक होते हैं। पर, समस्या यह है कि कोविड 19 से अधिकतर बच्चे भले ही खुद ठीक होते हों, मगर इस दौरान वे इसका संक्रमण कर सकते हैं और बड़े-बुजुर्ग, या फिर मधुमेह से पीड़ित लोगों पर इसका खतरनाक असर सकता है। बिना लक्षण वाले बच्चे से जिन्हें संक्रमण हो, यह जरूरी नहीं कि वह भी बिना लक्षण वाला ही हो।

लन्दन के किंग्स कॉलेज के प्रोफ़ेसर टिम स्पेक्टर की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक दल ने बच्चों में कोविड 19 के लक्षणों का गहन अध्ययन किया है। इस दल ने कोविड 19 से ग्रस्त 198 बच्चों का विस्तृत अध्ययन किया, और इसमें से 50 प्रतिशत से अधिक बच्चों में पीड़ित बच्चों में भी तीन सामान्य लक्षण – खांसी, बुखार और स्वाद की कमी – का कोई निशान नहीं था।

लगभग एक-तिहाई बच्चों में कोविड 19 का कोई लक्षण ही नहीं था। लगभग 55 प्रतिशत बच्चों में मुख्य लक्षण थकान था और 54 प्रतिशत बच्चों में सिरदर्द के लक्षण थे, लक्षण वाले बच्चों में से आधे बच्चों को भी बुखार नहीं था। जिन बच्चों में कोविड 19 के लक्षण मौजूद थे, उनमें से 38 प्रतिशत के गले में खराश, 35 प्रतिशत में स्वाद की कमी, 15 प्रतिशत के शरीर पर अलग किस्म के चकत्ते और 13 प्रतिशत में डायरिया के लक्षण थे।

इन वैज्ञानिकों के अनुसार कोविड 19 के लक्षणों की सूची आयु-वर्ग के अनुसार विकसित करने की जरूरत है। दुनियाभर की स्वास्थ्य सेवाएं बच्चों में भी वही लक्षण खोज रही हैं, जो वयस्कों में दिखते है और यहीं चूक हो रही है। बच्चों के मुख्य लक्षण सिरदर्द और थकान के अनुभूति है।

इससे पहले बेल्फेस्ट स्थित क्वींस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 990 बच्चों पर कोविड 19 के मुख्य लक्षणों का अध्ययन करने के बाद दस्त और उल्टी को मुख्य लक्षण माना था। इस दल के अध्ययन के नतीजों के अनुसार लगभग 76 प्रतिशत बच्चों में कोई लक्षण नहीं देखे गए, और जितने बच्चों में कुछ लक्षण स्पष्ट थे, उसमें से 97 प्रतिशत बच्चों में उल्टी और दस्त ही मुख्य लक्षण थे।

अब जब, एक ऐसे दौर में जब लगातार संक्रमण की दर तेजी से बढ़ रही है फिर भी धीरे धीरे स्कूलों को खोलने की मुहिम चल रही है, इन तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है कि अधिकतर कोविड 19 से संक्रमित बच्चों में कोई लक्षण नहीं उभर रहे हैं, और यदि लक्षण हैं भी तो सामान्य से अलग हैं।

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