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मप्र के स्कूलों में रामायण पर होगी प्रतियोगिता, जीतने वालों को हवाई जहाज से कराए जाएंगे रामलला के दर्शन

Janjwar Desk
15 Sep 2021 11:36 AM GMT
मप्र के स्कूलों में रामायण पर होगी प्रतियोगिता, जीतने वालों को हवाई जहाज से कराए जाएंगे रामलला के दर्शन
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तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि इसे धार्मिक प्रतियोगिता न समझा जाए। उनका कहना है कि दरअसल रामायण के पाठ आम आदमी को जिंदगी जीने की शिक्षा देते हैं....

जनज्वार। देश में भाजपा की सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप लगते रहे हैं। अब खबर है कि मध्यप्रदेश के स्कूलों में अब रामायण (Ramayana) के अयोध्या कांड (Ayodhya Kand) पर प्रतियोगिता होगी जिसमें जीतने वाले छात्रों को हवाई जहाज से अयोध्या (Ayodhya) ले जाकर राम मंदिर में वीआईपी दर्शन कराए जाएंगे। राजा राम से वनवासी राम की इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रदेश का संस्कृति विभाग और तुलसी मानस प्रतिष्ठान करवा रहे हैं।

खबरों के मुताबिक इस प्रतियोगिता (Compition) के तहत स्कूलों के छात्रों के साथ आम जनता को भी जोड़ा जाएगा। इसके पहले जिला स्तर और फिर संभाग स्तर और फिर राज्य स्तर की ऑनलाइन प्रतियोगिता होगी।

तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि इसे धार्मिक प्रतियोगिता न समझा जाए। उनका कहना है कि दरअसल रामायण के पाठ आम आदमी को जिंदगी जीने की शिक्षा देते हैं। इसलिए रामायण से जुड़े कार्यक्रम करना हमारा लक्ष्य है जिसके तहत ये राज्यव्यापी प्रतियोगिता करवाई जा रही हैं। इस प्रतियोगिता का फोकस अयोध्या कांड होगा। इस दौरान भगवान राम ने अपनी पढ़ाई, बचपन, विवाह और वनवासी का रूप धरा था।

रघुनंदन शर्मा ने कहा कि इस परीक्षा के बहाने सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचाना ही हमारा मकसद है जिसे लेकर राज्य सरकार और संस्थान बहुत उत्साहित हैं।

बता दें कि स्कूलों में धार्मिक शिक्षा हमेशा से विरोध होता रहा है। साल 2015 में तब के संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा के एक बयान के बाद बवाल हो गया था। दरअसल शर्मा ने कहा था कि देश को सांस्कृतिक प्रदूषण से मुक्ति दिलाने और युवाओं में मूल्यों का संचार करने के मकसद से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार स्कूलों और कॉलेजों में पाठ्यक्रम में जल्द ही महाभारत, रामायण और गीता के पाठों को शामिल करेगी।

महेश शर्मा ने कहा था कि सरकार इस आलोचना की परवाह नहीं करेगी कि वह आरएसएस की विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। शर्मा ने कहा, 'हम इसे अपनी संस्कृति के एक हिस्से के तौर पर लाना चाहते हैं, ताकि छात्रों को मूल्यों की शिक्षा दी जाए। उन्हें महाभारत की शिक्षा, रामायण की शिक्षा दी जानी चाहए। उन्हें गीता और जाति, वर्ग एवं धर्म से परे सभी आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए।'

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