Bible Controversy Karnataka : बाइबिल विवाद पर आर्कबिशप ने पेश की सफाई, कहा - 'दूसरे धर्म का कोई छात्र नहीं बना ईसाई'

Bible Controversy Karnataka : बाइबिल पर विवाद पर आक्रबिशप ने पेश की सफाई, कहा - दूसरे धर्म को कोई छात्र नहीं बना ईसाई
Bible Controversy Karnataka : कर्नाटक में हिजाब के बाद अब बाइबिल ( Bible controversy karnataka ) को लेकर राजनीति चरम पर है। प्रदेश शिक्षा विभाग ने इसाई स्कूलों में बाइबिल पढ़ाने का मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए हैं। कर्नाटक शिक्षा विभाग के इस आदेश पर बेंगलूरु के आर्कबिशप पीटर मचाडो ( Archbishop Peter Machado ) ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि बाइबिल पढ़ाने की बात पूरी तरह से गलत है। उन्होंने दावा किया है कि इसाई स्कूलों में दूसरे धर्म का कोई भी छात्र ईसाई नहीं बना है।
Karnataka | Education Department has ordered an inquiry about whether the Bible is used or religion is taught in our (Christian) schools. I feel very hurt. We can bravely say that no student of other religion has become Christian in our school: Bengaluru Archbishop Peter Machado pic.twitter.com/YhGZLDBcJB
— ANI (@ANI) April 28, 2022
संविधान का अपमान
दरअसल, कर्नाटक के इसाई स्कूलों पर आरोप लगाया गया है कि बेंगलुरु के एक स्कूल ने माता-पिता से अंडरटेकिंग ली थी कि वे अपने बच्चों के क्लास में बाइबिल ले जाने पर आपत्ति नहीं करेंगे। हिंदू जनजागृति समिति ने सोमवार को बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल के प्रशासन पर छात्रों के लिए बाइबिल ले जाना अनिवार्य करने का यह आरोप लगाया था। समिति के राज्य प्रवक्ता गौड़ा ने आरोप लगाया कि स्कूल ने गैर-ईसाई छात्रों को अनिवार्य रूप से बाइबिल ले जाने और पढ़ने के लिए कहा है जो संविधान के अनुच्छेद 25 और 30 का उल्लंघन है। यह संविधान का अपमान है।
हम देश का कानून नहीं तोड़ेंगे
वहीं क्लेरेंस हाई स्कूल के प्रिंसिपल जेरी जॉर्ज मैथ्यू ने बताया है कि हम जानते हैं कि कुछ लोग हमारे स्कूल की नीतियों में से एक को लेकर परेशान हैं। हम एक शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाले स्कूल हैं। हमने इस मामले को लेकर अपने अधिवक्ताओं से परामर्श किया है और हम उनकी सलाह का पालन करेंगे। हम देश का कानून नहीं तोड़ेंगे।
स्कूलों में धार्मिक प्रथाओं की इजाजत नहीं
Bible Controversy Karnataka : कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि कोई भी शिक्षण संस्थान लोगों को एक निश्चित धार्मिक प्रथा का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। यदि कोई संस्थान ऐसा करते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी चीजें हमारे संस्थानों में नहीं सिखाई जा सकती हैं। चाहे वह अल्पसंख्यक संस्थान हो या अन्य संस्थान। किसी भी धार्मिक प्रथाओं की अनुमति नहीं है।





