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UP : जालसाज अस्पताल ने चैरिटी बताकर किया मोतियाबिंद का इलाज, 15-15 सौ देकर सड़ी आंखों से आंसू बहा रहे आधा दर्जन लोग

Janjwar Desk
24 Nov 2022 3:55 AM GMT
जालसाज अस्पताल ने चैरिटी बताकर किया मोतियाबिंद का इलाज, 15-15 सौ देकर सड़ी आंखों से आंसू बहा रहे आधा दर्जन लोग
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जालसाज अस्पताल ने चैरिटी बताकर किया मोतियाबिंद का इलाज, 15-15 सौ देकर सड़ी आंखों से आंसू बहा रहे आधा दर्जन लोग

UP News: कानपुर के आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आधा दर्जन मरीजों के आंखों की रोशनी चली गई। जिनमें से चार मरीजों की आंखों में सड़न पैदा होनी शुरू हो गई। संक्रमण बढञने से आंखों की कार्नियां गलकर सफेद हो चुकी है...

UP News: कानपुर के आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आधा दर्जन मरीजों के आंखों की रोशनी चली गई। जिनमें से चार मरीजों की आंखों में सड़न पैदा होनी शुरू हो गई। संक्रमण बढञने से आंखों की कार्नियां गलकर सफेद हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने GSVM मेडिकल कॉलेज में इन रोगियों के आंखों की जांच की तो पाया गया आंखें संक्रमण के कारण खराब हुई हैं। अब संक्रमण हुआ कैसे जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक 70 साल की मुन्नी देवी, 70 के शेर सिंह, 50 वर्षीय रमेश कश्यप, 75 वर्ष की सुल्ताना देवी, 70 वर्ष की ज्ञानवती, 70 वर्ष के राजराम की आंखों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कानपुर साउथ के बर्रा स्थित आराध्या आई हॉस्पिटल में किया गया था। डॉक्टरों ने इन सभी मरीजों को चैरिटी इलाज का हवाला देकर भर्ती किया था, लेकिन वहीं मरीजों का कहना है कि उन सभी से डेढ़-डेढ़ हजार रूपये बतौर ऑपरेशन फीस वसूली गई थी।

पट्टी हटते ही छाया अंधेरा

शिवराजपुर स्थित सुघरदेवा गांव की रहने वाली सुल्ताना देवी की दाहिनी आंख का ऑपरेशन हुआ है। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद आंख से पट्टी हटी तो एक पल के लिए रोशनी कौंधी फिर घुप्प अंधेरा छा गया। यह कहते हुए सुल्ताना रोने लगीं। बगल में बैठे रमेश कश्यप बताते हैं कि पट्टी हटने के बाद अंधेरा ही रहा है। दर्द इतना होता है कि बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। रमेश को लगता है कि इस दर्द से बचने के लिए जहर खा लें। ऑपरेशन करने वाले सभी रोगी आयुष्मान लाभार्थी हैं।

गुड़रा गांव निवासी ज्ञानवती ने बताया कि पट्टी हटने के बाद कुछ दिखा नहीं, लेकिन आंख और सिंर में तेज दर्द शुरू हो गया। यही कुछ हाल बाकी के लोगों का भी रहा। इस मामले में डॉक्टरों का मानना है कि संक्रमण ऑपरेशन के बाद हुआ है। इसी वजह से रोगियों को तेज दर्द हुआ। ACMO डॉ. एसके सिंह ने रोगियों के बयानों को रिपोर्ट में शामिल किया है।

ठगी का शिकार होकर खोई रोशनी

मोतियाबिंद रोगियों के ऑपरेशन को आराध्या आई हॉस्पिटल के डॉ. नीरज गुप्ता चैरिटी बता रहे हैं। लेकिन वहीं रोगियों का कहना है कि उनसे डेढ़ हजार रूपये वसूले गये। जब ACMO डॉ. एसके सिंह ने रोगियों के बयान दर्ज किये तब इस बात का खुलासा हुआ। रोगियों ने बताया कि ऑपरेशन के लिए उन्हें उत्तरीपूरा का रहने वाला दुर्गेश कुमार शुक्ला लेकर आया था। उन्होने उसी को पैसे दिये थे।

पहले भी बिगड़े हैं केस

आराध्या आई हॉस्पिटल में इलाज करवा चुके बर्रा निवासी 70 वर्षीय रामआसरे शुक्ला ने हैलट के अधिकारियों से बातचीत में बताया कि इसी साल 6 फरवरी को उन्होंने एक आंख की सलमबाई का ऑपरेशन कराया था, और दूसरी आंख का मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया था, लेकिन उनका मामला बिगड़ गया। कल्यानीपुरवा के द्राइवर अवधेश ने बताया कि उनकी साढ़े चार साल की बेटी गोरी को दिखाया तो डॉक्टर ने कहा मोतियाबिंद है। ऑपरेशन कराया लेकिन बेटी को दिखा नहीं।

अवधेश कहते हैं कि अस्पताल द्वारा गलत ऑपरेशन किया गया था। उन्होंने जब लखनऊ में दिखाया तो पता चला बच्ची की आंख में मोतियाबिंद नहीं बल्कि गांठ थी। बच्ची को दाईं आंख से अब भी कुछ नहीं दिखता। हालांकि इन 6 लोगों की आंखों के ऑपरेशन और संक्रमण के बाद पुल्स ने अस्पताल प्रबंधन पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। आगे की जांच करने की बात कही जा रही है।

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