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हरियाणा पुलिस पर दलित महिला मजदूर नेता नोदीप कौर को पीटने और गुप्तांग में चोट पहुंचाने का आरोप, MAS अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर भी उठ रहे सवाल

Janjwar Desk
7 Feb 2021 12:28 PM GMT
हरियाणा पुलिस पर दलित महिला मजदूर नेता नोदीप कौर को पीटने और गुप्तांग में चोट पहुंचाने का आरोप, MAS अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर भी उठ रहे सवाल
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किसान आंदोलन में शामिल दलित मजदूर नेता नोदीप कौर और शिवकुमार को हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार, परिजनों और साथियों ने पुलिस पर लगाये बहुत ही गंभीर आरोप....

जनज्वार। मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले मजदूर अधिकार संगठन की महिला सदस्य नौदीप कौर और संगठन के प्रदेशाध्यक्ष शिव कुमार को हरियाणा पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार किया है। मजदूर संगठनों का आरोप है। कि इन दोनों पर झूठे मुकदमे लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया है।

हरियाणा छात्र एकता मंच ने मांग की है कि नोदीप कौर और शिव कुमार की तुरन्त रिहाई की जाये और मजदूरों को निशाना बनाने वाली हरियाणा पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ कठोर कार्यवाही भी की जाये।

गौरतलब है कि 24 वर्षीय महिला नोदीप कौर दलित परिवार से सम्बन्ध रखती हैं और मजदूर अधिकार संगठन की सक्रिय कार्यकर्ता हैं, जो किसान आंदोलन की शुरुआत से ही सिंघु बॉर्डर पर इसमें हिस्सेदारी कर रही थीं। उन्हें पुलिस लगभग एक महीने पहले गिरफ्तार कर चुकी है। नोदीप 12 जनवरी से करनाल जेल में बंद हैं। पुलिस ने नौदीप पर धारा 148, 149, 186, 332, 353,379-B, 384 तथा 307 का मुकदमा लगाया है। सेशन कोर्ट ने नोदीप की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

पुलिस ने नौदीप पर घातक हथियार रखने, गैरकानूनी असेंबली, दंगाई सहित कई तरह की धाराएँ,जिसमें सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट, आपराधिक बल, अतिचार, जबरन वसूली, छीनैती, आपराधिक धमकी और हत्या करने का प्रयत्न जैसी धाराएँ लगाई हैं।

हरियाणा छात्र एकता मंच ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में नोदीप कौर को पुरुष पुलिस अधिकारियों द्वारा बेरहमी से पीटा गया, जिसमें उसके गुप्तांग पर भी चोट पहुंचाई गई हैं और उसके पैरों से आज भी खून बह रहा है। जेल के अंदर उन्हें किसी भी प्रकार का बुनियादी उपचार नहीं दिया जा रहा है।

वहीं मजदूर अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार जोकि दलित जाति से ताल्लुक रखते हैं, को पुलिस ने 23 जनवरी को गिरफ्तार किया है, जिस पर छात्र एकता मंच का आरोप है कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से सिंघु मोर्चे से गिरफ्तार कर लिया गया था। ताज्जुब की बात यह है कि लगभग 10-12 दिन तक उनके साथियों को व परिवारजनों को शिव कुमार का कुछ अता-पता नहीं होता। उनके दोस्त और परिजन उनको ढूंढकर परेशान हो गये थे। फिलहाल शिव कुमार सोनीपत जेल में बंद हैं। छात्र एकता मंच का आरोप है कि पुलिस हिरासत में शिव कुमार के के साथ बेहरमी से मार-पिटाई की। शिव कुमार के पूरे शरीर पर गम्भीर चोटों के निशान हैं और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं।

जनज्वार से हुई बातचीत में शिवकुमार के दिहाड़ी मजदूर पिता राजवीर कहते हैं, 'हमें तो पता ही नहीं था कि हमारा बेटा किस जुर्म में जेल पहुंचा है। शुरुआत में हमें लगा वह किसान आंदोलन में ही है, इ​सलिए हमसे संपर्क नहीं कर पा रहा। 12 जनवरी से उसका फोन भी बंद आ रहा था। बाद में जब 15 दिन ​बीतने के बाद भी उससे संपर्क नहीं हुआ तो हमें फिक्र हुयी। हम सोनीपत एसपी के पास पहुंचे तो उनसे पता चला कि उसे गिरफ्तार करके 10 दिन की रिमांड पर थाने पर रखा गया था। 2 फरवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया था, यह जानकारी हमें मिली, मगर लाख कोशिशों के बाद भी हम उससे मिल नहीं पा रहे, न जाने किस हाल में होगा हमारा बेटा, चिंता के मारे हमारी जान निकल रही है।'

शिव कुमार के साथियों और परिजनों के मुताबिक दलित परिवार से संबंध रखने वाले शिव कुमार ने छोटी सी उम्र में गरीबी, तंगहाली के दिन देखे हैं जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और फैक्टरी के अंदर मजदूरी करने के लिए विवश होना पड़ा। शिव कुमार बिना चश्मे के देख नहीं सकते, उनकी आंखों का इलाज चल रहा है। लेकिन पुलिस के द्वारा शिव कुमार को अवैध तरीके से गिरफ्तार करने के बाद उनकी आंखों का इलाज व परिवार का खर्च चलना मुश्किल हो गया है।

गौरतलब है हाल के दिनों में सबसे बड़े किसान आंदोलन में कुंडली औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिकों ने आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई थी। छात्र एकता मंच का आरोप है कि हरियाणा पुलिस ने इस एकता को तोड़ने के लिए ही मजदूर अधिकार संगठन के प्रदेशाध्यक्ष शिव कुमार और सदस्या नोदीप कौर को गिरफ्तार किया है। इस बीच कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में और भी मजदूरों पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है।

जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में कुंडली में पुरुषों और महिलाओं समेत पूर्व और वर्तमान कार्यकर्ताओं के संगठन, एमएएस से संबंधित लोगों को कंपनी और उनके निजी सशस्त्र बल का सामना करना पड़ा है। लॉकडाउन के दौरान हरियाणा राज्य से खाद्यान्न राहत सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रवासी कामगार इकट्ठे हुए थे। छात्र एकता मंच का कहना है कि इन प्रयासों के बाद लोकल फैक्ट्री गुंडों और हिन्दू जाग्रति मंच नाम के समूहों द्वारा पहली बार मज़दूर अधिकार संगठन पर उनकी मीटिंग के दौरान हमला किया गया।

लॉकडाउन हटाए जाने के बाद कुंडली में श्रमिकों की स्थिति मजदूरी का भुगतान नहीं होने के कारण दयनीय थी और एमएएस ने श्रमिकों के मामलों को उठाकर अपने प्रयासों से उनके भरोसे जीतने का कार्य किया है।

किसान आन्दोलन के दिल्ली सीमा, कुंडली के निकट आने से किसान-मजदूर एकता के नारे लगाये गये थे। किसानों के आंदोलन के लिए समर्थन जुटाते हुए कुंडली में मजदूरों ने रैलियों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया था। उसके बाद किसानों की मदद से मजदूर अधिकार संगठन 300 से अधिक श्रमिकों को उनका बकाया भुगतान मालिकान और प्रबंधन से जुटाने में सफल हुआ था।

छात्र एकता मंच का आरोप है कि मजदूरों की एकता को निशाना बनाने के लिए कारखाने के मालिकों और ठेकेदारों ने क्यूआरटी को खुला हाथ दे दिया और इसके बाद श्रमिकों पर हिंसक हमलों में और अधिक वृद्धि हुई। क्यूआरटी ने विशेष रूप से उन श्रमिकों को निशाना बनाना शुरू किया जो पूरे दिन फैक्टरी में काम करने के बाद बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों की सहायता कर रहे थे।

बकौल छात्र एकता मंच, 28 दिसम्बर को जब श्रमिक अपनी बकाया मजदूरी की मांग लेकर कंपनी पहुंचे, तो क्यूआरटी ने श्रमिकों पर गोलियां चलाईं। एमएएस सदस्य तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए। कुंडली पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। मजदूरों ने इसके बाद सोनीपत में पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन भेजा। फिर भी पुलिस ने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। इसके उलट पुलिस ने श्रमिकों के खिलाफ 'जबरन वसूली' के आरोप लगाए, जबकि क्यूआरटी ने स्वीकार किया कि उन्होंने "आत्मरक्षा" में गोली चलाई, पुलिस ने किसी भी गोलीबारी से इनकार किया।

इस घटना के बाद 12 जनवरी को श्रमिक मजदूरी मांगने के लिए कम्पनी गए थे। मगर प्रबंधन ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनपर क्रूरता से लाठीचार्ज करवाया और उन पर गोलीबारी करवायी। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार की भी बातें सामने आयीं। महिलाओं के कपड़े फाड़े गए।

शिवकुमार के परिजनों का कहना है कि जिस जुर्म में शिवकुमार को गिरफ्तार किया गया है, वह उन्होंने किया ही नहीं है। जुर्म तो दूर वह उस दिन वहां मौजूद ही नहीं थे। 12 जनवरी के दिन शिव कुमार मजदूरों की मजदूरी के भुगतान दिलाने के लिए किए गए कम्पनी-कम्पनी अभियान का हिस्सा नहीं थे।

छात्र एकता मंच का आरोप है कि जब विभिन्न दबावों के जरिये कंपनी मैनेजमेंट का किसान आंदोलन से मजदूरों और उनकी एकता को तोड़ने का प्रयास विफल हो गया, तो उन्होंने नोदीप कौर व किसी अन्य सांगठनिक काम के कारण अभियान में शामिल न होने के बावजूद शिव कुमार को केवल संगठन के अध्यक्ष होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

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