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आंदोलन

युद्धों का सबसे ज्यादा असर पड़ता है महिलाओं और बच्चों पर, इसलिए समूची दुनिया की जनता को करना चाहिए हिंसा का विरोध !

Janjwar Desk
6 March 2026 5:05 PM IST
युद्धों का सबसे ज्यादा असर पड़ता है महिलाओं और बच्चों पर, इसलिए समूची दुनिया की जनता को करना चाहिए हिंसा का विरोध !
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8 मार्च हम महिलाओं का अपना दिन है। इस दिन हम महिलाएं कार्यक्रम आयोजित कर अपने सुख-दुख बांटती हैं और भविष्य की योजनाएं बनाती हैं। अतः सभी महिलाओं को अधिक से अधिक संख्या में महिला दिवस के कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए...

Ramnagar news : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च को महिला एकता मंच द्वारा वन‌ ग्राम पूछड़ी व 11 मार्च को मालधन चंद्रनगर में सभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

ग्राम पूछड़ी में आयोजित बैठक में धना तिवारी ने कहा कि 8 मार्च हम महिलाओं का अपना दिन है। इस दिन हम महिलाएं कार्यक्रम आयोजित कर अपने सुख-दुख बांटती हैं और भविष्य की योजनाएं बनाती हैं। अतः सभी महिलाओं को अधिक से अधिक संख्या में महिला दिवस के कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए।

जन संपर्क के दौरान कालूसिद्ध गांव में आयोजित बैठक में सरस्वती जोशी ने कहा कि अमेरिका दुनिया पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए युद्ध थोप रहा है। 28 फरवरी से अब तक अमेरिकी हमले में 12 सौ से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हो गए हैं। महिलाओं को अधिकार देने के नाम पर ईरान में अमेरिका और इजरायल ने हमला करके 165 से भी अधिक छात्राओं को मार दिया है। अमेरिका द्वारा थोपे जा रहे युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति व व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, जिसके कारण देश में महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस युद्ध विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।

कौशल्या ने कहा कि युद्ध का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है, इसलिए युद्धों का समूची दुनिया की जनता को विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध का कारण पूंजीवादी और साम्राज्यवादी लूट है, अतः दुनिया से युद्धों को समाप्त करना है तो पूंजीवादी व साम्राज्यवादी लूट को समाप्त करना होगा।

शांति मेहरा ने क्षेत्र की जनता से 8 मार्च रविवार को दिन में 11 बजे रामलीला परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया।

बैठक में शांति मेहरा, दीपा ध्यानी, ममता,धर्मा, दुर्गा,गीता, मनी, श्यामा, लीला, हंसी देवी, पुष्पा, कमला, बचुली, आशा, भागुली, कौशल्या, सरस्वती जोशी समेत दर्जनों लोग शामिल हुए।

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