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East Champaran News: भू माफियाओं के आगे बिहार पुलिस नतमस्तक, RTI एक्टिविस्ट पिता और बेटे की मौत के बाद भी इंसाफ की नहीं उम्मीद!

Janjwar Desk
25 March 2022 8:18 PM IST
East Champaran News: भू माफियाओं के आगे बिहार पुलिस नतमस्तक, दो मौतों के बाद भी इंसाफ की नहीं दिख रही उम्मीद!
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East Champaran News: भू माफियाओं के आगे बिहार पुलिस नतमस्तक, दो मौतों के बाद भी इंसाफ की नहीं दिख रही उम्मीद!

East Champaran News: बिहार में भू माफियाओं के साथ पुलिस गठजोड़ के सुनाई पड़ते रहे किस्से एक बार फिर सच साबित होते दिख रहे हैं।

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट

East Champaran News: बिहार में भू माफियाओं के साथ पुलिस गठजोड़ के सुनाई पड़ते रहे किस्से एक बार फिर सच साबित होते दिख रहे हैं।आरटीआई कार्यकर्ता के सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करनेवालों के खिलाफ आवाज उठाने पर दिनदहाड़े गोली मारकर छह माह पूर्व बदमाशों ने हत्या कर दी। हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर 14 वर्ष का बेटा पुलिसवालों के सामने लगातार गुहार लगाता रहा। आखिरकार न्याय की उम्मीद से टूट चुके बेटे ने अपने शरीर पर मिटटी का तेल छिड़ककर आग लगा लिया तथा तीन मंजिले से छलांग लगाकर जान दे दी। मौत के चैबीस घंटे बाद भी पुलिस परिवार को इंसाफ दिलाने के बजाए घर के मुखिया पर बयान बदलने का दबाव बना रही है।

नीतीश सरकार भले ही सुशासन का तमाम दावा कर ले पर जमीनी कीकत कुछ अलग ही है। पूर्वी चंपारण जिला के हरसिद्धि में विगत वर्ष आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस कार्यशैली से नाराज उनके पुत्र रोहित ने अपने शरीर में आग लगाकर तीन मंजिला भवन से छलांग लगा दी। आत्मदाह करने से गंभीर रुप से जख्मी रोहित का इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटे के इस हालात तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार पुलिस प्रशासन अपने रवैये में बदलाव लाकर इंसाफ दिलाने के बजाए एक बार फिर पुरानी गलतियों को दोहराने में लगी है।

हॉस्पीटल से जारी वीडियो में मृतक रोहित का दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस बयान बदलने के लिए दबाव बना रही है। उन्होंने बताया कि उनका पोता एसपी से मिलने आया था, ताकि वह अपने पिता के अन्य हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर सके। लेकिन एसपी से उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। वह एसपी ऑफिस से लौटा। उसने मिट्टी तेल छिड़क कर शरीर में आग लगा लिया और घर के सामने स्थित एक तीन मंजिला मकान से छलांग लगा दी। जिसे इलाज के लिए मोतिहारी एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया। जहां उसने दम तोड़ दिया, लेकिन पुलिस घटना को लेकर बयान बदलने के लिए दबाव बना रही है। विजय अग्रवाल के अनुसार, एसपी के नहीं मिलने पर कार्यालय कर्मियों से उसकी बहस हो गई। इसी कारण नाराज होकर घर लौटे रोहित ने पुलिस को फोन करके 15 मिनट में कार्रवाई नहीं करने पर आत्महत्या की धमकी दी थी। लेकिन पुलिस की कार्रवाई 15 मिनट में पूरा नहीं होने पर रोहित ने शरीर मे आग लगा कर तीन मंजिले भवन के छत से कूद गया। छत से कूदने के पहले रोहित ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाये थे। छत से कूदने पर वह बिजली प्रवाहित हाई टेंशन तार पर गिरा।जिस कारण वह वह बुरी तरह झुलस गया।

24 सितंबर 2021 हुई थी पिता की हत्या

बता दें कि 24 सितंबर 2021 को हरसिद्धि प्रखण्ड कार्यालय गेट के पास आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की दिनदहाड़े अपराधियों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। परिजनों ने अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध हरसिद्धि थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के बाद पुलिस अनुसंधान में कई लोगों के नाम सामने आए। जिसमें सात लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। लेकिन विपिन अग्रवाल के परिजन हरसिद्धि बाजार के कुछ अन्य भू-माफिया और सफेदपोश लोगों के गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। जिसे लेकर कई बार विपिन के परिजन अधिकारियों के यहां गुहार लगा चुके है। साथ ही कई बार वे लोग सड़क पर भी उतरे थे। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता था।

दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल हरसिद्धि बाजार के सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। जिस कारण भू-माफिया समेत कई सफेदपोश विपिन अग्रवाल को टारगेट किए हुए थे। इस दौरान विपिन अग्रवाल पर कई झूठे मुकदमे कराये गए और उन पर कई बार हमला भी हुआ था। लेकिन 24 सितंबर 2021 को प्रखंड कार्यालय के पास बाइक सवार अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी।

हत्याकांड के अनुसंधान में कई भू-माफियाओं के अलावा सफेदपोश लोगों के नाम भी सामने आए हैं। जिसमें से अब तक सात लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अन्य हत्यारोपियों की गिरफ्तारी को लेकर विपिन अग्रवाल का परिवार पुलिस प्रशासन से लगातार गुहार लगाता रहा। लेकिन पुलिस उनके गुहार को अनसुना करती रही। जिससे आजीज होकर दिवंगत विपिन अग्रवाल के बेटा रोहित कुमार में आत्मदाह करके जान दे दी।

एक दशक में दो दर्जन आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या

बिहार की नीतीश सरकार भले ही सुशासन का दावा कर ले पर हकीकत यह है कि पिछले 2010 से लेकर अब तक दो दर्जन से अधिक आरटीआई एक्टिविस्ट सूचना मांगने में अपनी जान गवां चुके हैं। 2010 में बेगूसराय में आरटीआई कार्यकर्ता शशिधर मिश्रा की हत्या हुई थी। उसके बाद 2011 में लखीसराय के आरटीआई कार्यकर्ता रामविलास सिंह की हत्या की गई। 2012 में ही मुंगेर के डॉक्टर मुरलीधर जायसवाल, 2012 में मुजफ्फरपुर में राहुल कुमार, भागलपुर के राजेश यादव की अपराधियों ने हत्या कर दी थी। 2013 में मुजफ्फरपुर में रामकुमार ठाकुर अधिवक्ता हत्या हुई थी। 2015 में पटना के सुरेंद्र शर्मा 2015 में ही बक्सर के पूर्व सैनिक गोपाल प्रसाद, मुजफ्फरपुर के जवाहर तिवारी की हत्या कर दी गई थी। 2017 में भोजपुर के मृत्युंजय सिंह की हत्या हुई थी। 2018 में सहरसा के आरटीआई कार्यकर्ता राहुल झा की हत्या हुई थी। 2018 में वैशाली के जयंत कुमार, मोतिहारी के राजेंद्र प्रसाद सिंह, जमुई के बाल्मीकि यादव, धर्मेंद्र यादव एवं बांका के भोला साह की हत्या कर दी गई। 2020 की अगर बात करें तो पटना के बिक्रम में पंकज कुमार सिंह एवं बेगूसराय के आरटीआई कार्यकर्ता श्यामसुंदर कुमार सिन्हा की हत्या की गई. वहीं अब मोतिहारी में विपीन अग्रवाल की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वर्ष 2021 में मुंगेर में एक युवा आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या कर बदमाशों ने शव को जला दिया था। इसके बाद सितंबर माह में विपिन अग्रवाल की दिनदहाड़े बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

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