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बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में कोर्ट ने आरिज खान को सुनाई मौत की सजा, 8 मार्च को ठहराया था दोषी

Janjwar Desk
15 March 2021 2:27 PM GMT
बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में कोर्ट ने आरिज खान को सुनाई मौत की सजा, 8 मार्च को ठहराया था दोषी
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बाटला हाउस के आरोपी की फाइल फोटो

नई दिल्ली। बाटला हाउस मुठभेड़ के 13 साल बाद दिल्ली की एक अदालत ने आज सोमवार 15 मार्च को इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या और अन्य अपराधों के दोषी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने मौत की सजा सुनाते हुए इसे 'दुर्लभतम मामला' बताया।

अभियोजन पक्ष ने मामले में आरिज खान के लिए मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि उसके वकील ने उसकी कम उम्र का हवाला देते हुए कोर्ट से उदारता दिखाने की पैरवी की थी। अदालत ने कहा कि आरिज खान ने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या की थी, 8 मार्च को इस मामले में आरिज खान को दोषी ठहराया गया था।

दिल्ली पुलिस ने आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से कथित रूप से जुड़े आरिज खान को मौत की सजा दिए जाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि यह केवल हत्या का मामला नहीं है, बल्कि न्याय की रक्षा करने वाले कानून के रक्षक की हत्या का मामला है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने कहा था कि आरिज खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर साजिशन इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की गोली मारकर हत्या की थी। बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद आरिज कथित रूप से फरार चल रहा था। लगभग एक दशक बाद फरवरी, 2018 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

आरिज को धारा 186 (अधिकारियों के काम में बाधा पहुंचाना), 333 (किसी को कष्ट देने की गंभीर साजिश), 353 (लोक सेवक पर आपराधिक हमला), 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया है। उसे भारतीय दंड संहिता की 277, 174 ए, 34 और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत भी दोषी ठहराया गया है।

गौरतलब है कि 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ जामिया नगर के बाटला हाउस में मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन के दो संदिग्ध आतंकवादियों और इंस्पेक्टर शर्मा की मौत हो गई थी।

पुलिस ने अपनी जांच में कहा कि आरिज कथित रूप से आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा है। पुलिस ने दावा किया कि वह चार अन्य लोगों के साथ बाटला हाउस में मौजूद था, और मुठभेड़ के दौरान पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा।

पुलिस के मुताबिक बाटला हाउस के अपार्टमेंट में रहने वाले पांच लोगों में से मोहम्मद साजिद और आतिफ अमीन मुठभेड़ के दौरान मारे गए, जबकि जुनैद और शहजाद अहमद भाग गए और सालों बाद पकड़े गए। मोहम्मद सैफ ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। एक ट्रायल कोर्ट ने जुलाई, 2013 में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी शहजाद अहमद को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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