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Environmental Performance Index : दुनिया के 180 देशों में सबसे नीचे फिसला भारत, 11 श्रेणिया के 40 मानकों में सबसे फिसड्डी निकले हम

Janjwar Desk
6 Jun 2022 6:28 AM GMT
Environmental Performance Index : दुनिया के 180 देशों में सबसे नीचे फिसला भारत, 11 श्रेणिया के 40 मानकों में सबसे फिसड्डी निकले हम
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Environmental Performance Index : दुनिया के 180 देशों में सबसे नीचे फिसला भारत, 11 श्रेणिया के 40 मानकों में सबसे फिसड्डी निकले हम

Environmental Performance Index : EPI 2022 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत का सबसे कम स्कोर करना गंभीर चिंता का विषय है। EPI की रिपोर्ट हर दूसरे साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) येल सेंटर फॉर इन्वायरनमेंट लॉ एंड पॉलिसी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर इंटरनेशन अर्थ साइंस इन्फॉर्मेंशन नेटवर्क (CIESIN) के द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाती है...

Environmental Performance Index : पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक-2022 (EPI 2022) में पिछले 10 सालों से लगातार लुढ़कता भारत अब दुनिया के 180 देशों में सबसे नीचे फिसल गया है। हर दो साल में सामने आने वाले पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index) की 11 श्रेणियों के 40 मानकों में भारत की रैंकिंग 180वीं रही है।

EPI 2022 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत का सबसे कम स्कोर करना गंभीर चिंता का विषय है। EPI की रिपोर्ट हर दूसरे साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) येल सेंटर फॉर इन्वायरनमेंट लॉ एंड पॉलिसी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर इंटरनेशन अर्थ साइंस इन्फॉर्मेंशन नेटवर्क (CIESIN) के द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाती है। 2022 की रिपोर्ट येल और कोलिबिया अर्थ इंस्टीट्यूट ने संयुक्त रूप से तैयार की है। पर्यावरण संबंधी सभी रिपोर्टों में EPI की रिपोर्ट को सबसे सटीक माना जाता है।

इन सभी में फिसड्डी रहा भारत

पर्यावरण जोखिम का खतरा, पीएम 2.5 और हवा की शुद्धता, वायु प्रदूषण, पानी और सफाई के निर्धारकों, पेयजल की गुणवत्ता, जैव विविधता, जल स्रोतों के स्वास्थ्यवर्धक प्रबंधन, कूड़े के निष्पदान, ग्रीन एनर्जी में निवेश, नवाचार और जलवायु परिवर्तन को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व जैसे 11 निर्धारकों और इनमें सभी 180 देशों के प्रदर्शन के 40 अलग सूचकों के आधार पर रिपोर्ट को तैयार किया गया है। इन सभी निर्धारकों में भारत का प्रदर्शन सबसे नीचे रहा है।

डेनमार्क सबसे ऊपर, लेकिन भारत फिसड्डी क्यों है ?

EPI 2022 की रैंकिंग में डेनमार्क को सबसे टॉप पर रखा गया है। भारत 180वीं पायदान पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने मौजूदा पर्यावरण कानूनों को मजबूत करने और नए कानून बनाने की जगह उन्हें और शिथिल कर रखा है। तटीय नियमन जोन, वन्यजीव कानून, जंगलों में खनन से जुड़े कानून, सभी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। केंद्र सरकार का जोर पर्यावरण को सुधारने की जगह उद्योगों को सहूलियत देने पर है।

पश्चिमी घाट पर औद्योगिक इकाईयों का दबाव है। सरकार मेगा इन्फ्रा प्रोजेक्टस को विकास ठहराती है, जबकि यही परियोजना देश के जंगलों को नुकसान पहुंचा रही हैं और शहरों की हरियाली को नष्ट कर रही हैं। पानी का प्रबंधन भी ठीक नहीं है, क्योंकि देश के तकबरीन सभी राज्यों में बोरवेल खोदने के लिए मनमाफिक तरीके से अनुमति दी जा रही है। नतीजतन पानी खारा हो रहा है और जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। ऐसे समय, जब दुनिया के अधिकांश देश कोयले पर आधारित बिजली पर निर्भरता को कम कर रहे हैं, भारत में कोयले का उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़ाया जा रहा है। इससे पैदा हुआ कार्बन डाइऑक्साइड पूरे देश में भयंकर गर्मी पैदा कर रहा है।

इन दो देशों का प्रदर्शन सबसे अच्छा

EPI 2022 की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में केवल डेनमार्क और ब्रिटेन ही ग्रीनहाउस गैसों में 2050 तक कमी लाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। भारत, चीन और रूस जैसे कई देश गलत रास्ता पकड़ चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यही हाल रहा तो भारत, रूस, चीन और अमेरिका जैसे चार देश 2050 तक कुल ग्रीन हाउस गैसों का 50% उत्पादन करने लगेंगे। इनके अलावा 24 और देश हैं, जो दुनिया में कुल ग्रीन हाउस गैसों के 80% ऊपादन करेंगे।

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