FIR against Dr Kafeel: महिला का इलाज करने पर सपा नेता डा. कफील पर FIR, ये है पूरा मामला

FIR against Dr Kafeel: महिला का इलाज करने पर सपा नेता डा. कफील पर FIR, ये है पूरा मामला
जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
FIR against Dr. Kafeel: देवरिया-कुशीनगर स्थानीय निकाय विधान परिषद सदस्य के सपा प्रत्याशी डॉ. कफील के खिलाफ देवरिया कोतवाली में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई एंबुलेंस चालक की तहरीर पर हुई है। एंबुलेंस में जबरन घुसकर महिला का इलाज करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
बाल रोग विशेषज्ञ से नेता बने डा. कफील की मुस्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। चार वर्ष पूर्व मेडिकल कालेज में आक्सीजन के अभाव में सैकड़ों बच्चों के मौत के दौरान चर्चा में आए चिकित्सक डा. कफील को नायक का दर्जा दिया गया था। यह कहा गया कि मरीजों की मदद के लिए डा. कफील ने बाहर से आक्सीजन मंगाकर मुहैया कराया। हालांकि एक सप्ताह के अंदर ही उन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया गया। जिसकी कार्रवाई के क्रम में जेल में बंद रहने के बाद अब वे बर्खास्त हो चुके हैं। इस बीच एक और नया मामला डा. कफील पर दर्ज हो चुका है।
ताजा मामला यह है कि 108 नंबर की एंबुलेंस के चालाक प्रकाश पटेल ने पुलिस को तहरीर देकर बताया है कि 26 मार्च को महुई संग्राम गांव निवासी गीता मिश्रा पत्नी वशिष्ठ नारायण मिश्र को उन्होंने सदर अस्पताल पहुंचाया था। वहां इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया था। अचानक डॉ. कफील पहुंचे और और जबरन एंबुलेंस में घुस गए।
मना करने के बाद भी उन्होंने सरकारी कार्य में बाधा डाली। चालक ने आरोप लगाया कि डॉ. कफील ने व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इंस्पेक्टर अनुज कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी डॉ. कफील पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि देवरिया-कुशीनगर प्राधिकारी चुनाव में सपा के प्रत्याशी डॉ. कफील खान के एक ट्वीट के बाद से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। एमएलसी चुनाव में सपा के प्रत्याशी डॉ. कफील खान ने एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी से महिला की मौत का हवाला देते हुए ट्वीट किया था। जिसके बाद से ही सभी आलाधिकारियों के होश उड़ गए। शासन के निर्देश पर सीडीओ, एडीएम प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है। सोमवार को दोनों अधिकारियों ने जिला अस्पताल पहुंच सीएमओ और सीएमएस से ब्योरा लिया। एंबुलेंस कर्मियों के बयान भी दर्ज किए गए।
शासन को किए गए ट्वीट में डॉ. कफील ने लिखा कि मिश्रा जी की मां जिस 108 एंबुलेंस से लाई गई थीं, उसका ऑक्सीजन सिलेण्डर खाली था। सदर हॉस्पिटल देवरिया में ना अंबु बैग था, न लेरिंगोस्कोप, न ईटी ट्यूब, न जीवन रक्षक औषधि। मिश्रा जी की मां का भी देहांत हो गया।
मामला यह है कि खुखुन्दू क्षेत्र के महुई संग्राम निवासी गीता देवी (50) पत्नी वशिष्ठ नरायन मिश्र की तबीयत खराब होने पर परिजन 108 नंबर एबुलेंस से महिला को लेकर रात करीब साढ़े बारह बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां एक अन्य घायल महिला को लेकर पहुंचे डॉ. कफील खान एंबुलेंस में चढ़ गए और गीता देवी का इलाज करने लगे। उन्होंने अंबुबैग की मांग की तथा ऑक्सीजन देने का प्रयास किया। बाद में गीता को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं डीएम के अनुसार ऑक्सीजन समाप्त होने से मौत की बात गलत है। इस प्रकरण की विभागीय जांच के बाद रिपोर्ट कमीश्नर गोरखपुर के तरफ से शासन को भेजी गई थी। इस मामले में कोई भी विभागीय कार्रवाई करने के बजाए माना गया कि डा. कफील का जबरन एंबुलेंस में घुसकर इलाज करना घोर लापरवाही व कानून विरोधी है। प्रशासन के मुताबिक डा.कफील ने जहां नियम विरूद्ध कार्य किया वहीं विभाग की छवि धूमिल करने के लिए दो-दो टृवीट कर अनावश्यक व बेबुनियाद आरोप लगाया।
वर्ष 2017 में चर्चा में आए थे डा. कफील
मेडिकल कॉलेज में 2017 में हुई त्रासदी के दौरान डॉ. कफील खान चर्चा में आए थे। गोरखपुर ऑक्सीजन कांड पर लिखि किताब में डा. कफील कहते हंै कि 10 अगस्त 2017 की शाम को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सरकारी बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो गई! कथित तौर पर, अगले कुछ दिनों में, अस्सी से अधिक मरीजों जिनमें 63 बच्चे और 18 वयस्कों ने अपनी जान गंवा दी। कॉलेज के बाल रोग विभाग में सबसे जूनियर प्रवक्ता डॉ कफील खान ने ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की और अन्य कर्मचारियों के साथ आपातकालीन स्थिति मे उपचार करने मे लगे रहे ताकि अधिक से अधिक बच्चों को बचाया जा सके।
जब त्रासदी की खबर सुर्खियों में आई तब खान को संकट की घड़ी में डटे रहने, आपातकालीन स्थिति को नियंत्रित करने और और बच्चों को बचाने में लगातार प्रयास को देखते हुए उन्हें हीरो नायक कहा गया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद, उन्हें निलंबित कर दिया गया, और उनके साथ 9 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और चिकित्सीय लापरवाही जैसे अन्य गंभीर आरोपों के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई। आनन फानन उन्हें जेल भेज दिया गया। जनवरी 2020 में, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित रूप से भड़काऊ भाषण के लिए खान को फिर से गिरफ्तार किया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत आरोपित किया गया। बाद में उन्होंने सात महीने जेल में बिताए। 1 सितंबर 2020 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सभी आरोपों को से बरी कर दिया।











