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देश में इस साल पैदा 80 फीसदी गेहूं रखने के लिए नहीं गोदाम, पॉलीथीन शेड में कैसे होगा आंधी तूफान से बचाव

Janjwar Desk
18 May 2021 9:43 AM GMT
देश में इस साल पैदा 80 फीसदी गेहूं रखने के लिए नहीं गोदाम, पॉलीथीन शेड में कैसे होगा आंधी तूफान से बचाव
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

वर्ष 2017 से 2020 तक 9808 मीट्रिक टन खाद्यान्न (गेहूं व चावल) खराब हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 2664 मीट्रिक टन, 2018-19 में 5214 मीट्रिक टन और 2019-20 में 1930 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ है....

जनज्वार ब्यूरो/चंडीगढ़। इस बार गेहूं कटाई सीजन में ही हरियाणा में तीन बार बरसात हो चुकी है। दूसरी ओर मंडियों में हजारों टन गेहूं खुले में पड़ा है। पंजाब में भी कमोबेश इसी तरह के हालात है। खरीदे गए गेहूं के भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। नतीजा हर साल गेहूं खराब हो जाता है। इस बार तो हालात और भी ज्यादा खराब वाले हैं। क्योंकि मौसम विभाग बार बार चक्रवात तूफानों की चेतावनी दे रहा है। इन तूफानों का असर हरियाणा, पंजाब समेत उत्तरी भारत में भी पड़ता है।

अमेटी यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर के फाइनल ईयर स्टूडेंट और अनाज भंडारण पर इंटर्नशिप करने वाले रोहित चौहान ने बताया कि यदि तूफान का दस प्रतिशत असर भी इन राज्यों में आ गया तो तय है, आधे से ज्यादा गेहूं खराब हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अनाज भंडारण बहुत ही अवैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। इसके रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।

स्थानीय ठेकेदार जो कि किसी ने किसी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता होते हैं, ज्यादातर ठेके उनके पास या उनके लोगों के पास होते हैं, वह अनाज की सुरक्षा करने की बजाय ज्यादा से ज्यादा कमाई करने में यकीन रखते हैं। रोहित चौहान ने बताया कि अनाज की बर्बादी तो हर साल हो रही है। देश में 130 लाख टन अनाज के रखरखाव का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। इस बार यदि तूफान और बरसात आती है तो निश्चित है खुले में भंडारित आधे से ज्यादा अनाज खराब हो जाएगा।

इस बार एफसीआई ने रिकार्ड गेहूं खरीदा

इस बार देश में गेहूं का 10.9 करोड़ टन उत्पादन होने की उम्मीद है। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को खुश करने के लिए भारतीय खाद्य आपूर्ति निगम ज्यादा से ज्यादा गेहूं खरीद रहा है। एफसीआई की गेहूं खरीद पिछले साल के रिकॉर्ड खरीद के लगभग 3.9 करोड़ टन से अधिक हो चुकी है। 1 अप्रैल को एफसीआई के गोदामों में गेहूं का स्टॉक लक्ष्य से लगभग चार गुना अधिक 2.73 करोड़ टन था। 13.6 मिलियन के लक्ष्य के बावजूद कुल चावल 49.9 मिलियन टन जमा था।

पिछले साल एफसीआई ने अस्थायी शेड में 14 मिलियन टन से अधिक गेहूं का स्टोरेज किया था। अब 2021/22 में अधिक अस्थायी स्टोरेज खोलने होंगे।

आधे से ज्यादा अनाज खुले में स्टोर

मध्यप्रदेश में 50 लाख टन गेहूं व दाल खुले में स्टोर है। यूपी में करीब 50 लाख टन अनाज के भंडारण की सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत देश में अनाज के भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। नतीजा हर साल बड़ी मात्रा में अनाज बर्बाद हो जाता है। क्योंकि एफसीआई के जो गोदाम है,उसमें चावल रखा जाता है। गेहूं रखने के लिए गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं होती। इसलिए गेहूं का भंडारण खुले में ही किया जाता है।

जाने माने कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि अले पंजाब में पिछले साल खुले में भंडार किए गए गेहूं का स्टॉक जमा है। इस बार का गेहूं भी आ गया। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में 80 लाख टन गेहूं खुले में भंडारित किया गया है। हरियाणा में में कम से कम 44 लाख टन गेहूं खुले में भंडारित किया गया है। उन्होंने बताया कि वह तीस सालों से देख रहे हैं, अनाज का प्रबंधन बहुत ही लापरवाह तरीके से किया जा रहा है। जिससे अनाज बड़ी मात्रा में बर्बाद हो रहा है।

सामान्य परिस्थितियों में ही खराब होने वाले अनाज का आंकड़ा बहुत बड़ा है

पीआईबी की विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष 2017 से 2020 तक 9808 मीट्रिक टन खाद्यान्न (गेहूं व चावल) खराब हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 2664 मीट्रिक टन, 2018-19 में 5214 मीट्रिक टन और 2019-20 में 1930 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ है। इसी बात से साबित हो रहा है कि खुले में रखा अनाज खराब होता है।

कैग ने एक रिपोर्ट जारी की, इसमें पंजाब 2016 तक 700 करोड़ रुपए का गेहूं बर्बाद हो गया। हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत गेहूं उत्पादक राज्यों में भी हालत इससे अलग नहीं है।

भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008 से 2010 तक 35 मीट्रिक टन अनाज भंडारण सुविधाओं की कमी की वजह से नष्ट हो गये। उत्तर प्रदेश के हापुड़, उरई और हरदुआगंज स्थित एफसीआई गोदामों में भी हजारों टन अनाज बर्बाद हो रहे हैं। 1997 और 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल, 2.200 लाख टन धान और 111 लाख टन मक्का एफसीआई के विभिन्न गोदामों में सड़ गए।

कोई अतिरिक्त इंतजाम नहीं है

रोहित चौहान ने बताया कि तूफान से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। होना तो यह चाहिए था कि अनाज की सुरक्षा को लेकर भी एक नीति बनानी चाहिए थी। जिस तरह से आपदा में हर चीज का ध्यान रखा जाता है, अनाज की सुरक्षा के लिए भी इसी तरह से आपातकालीन योजना बनानी चाहिए थी। लेकिन इस दिशा में अभी तक तो कुछ नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कम से कम खुले में पड़े गेहूं को बचाने की लिए तो काम किया जाना चाहिए था। क्योंकि जिस तरह से लकड़ी के प्लेटफार्म पर काली पॉलिथीन में गेहूं भंडारित हो रहा है, जरा सी तेज हवा भी इसे फाड़ देगी। इसके साथ यदि बरसात हो जाती है तय है बड़ी मात्रा में गेहूं सड़ सकता है।

योजनाएं बनी, अमल नहीं हुआ

अप्रैल 2015 में केंद्र सरकार ने गेहूं और चावल के सुरक्षित भंडारण के लिए 100 लाख टन क्षमता के स्टील साइलो के निर्माण लक्ष्य रखा गया था। चार चरणों में इसे 2019-20 तक पूरा किया जाना था। अभी यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। एफसीआई के रिपोर्ट के मुताबिक, 12 मार्च 2020 तक 7.25 लाख टन क्षमता के ही स्टील साइलो बनी है। इसमें मध्य प्रदेश में 4.5 लाख टन और पंजाब में तीन लाख टन की क्षमता वाले स्टील साइलो बनाए गए है। जबकि हरियाणा में तीन लाख टन के स्टील साइलो बनना प्रस्तावित है। जिस पर अब तक कोई काम नहीं हुआ।

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