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सुप्रीम कोर्ट ने रेहाना को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, कहा- बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

Janjwar Desk
7 Aug 2020 4:42 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने  रेहाना को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, कहा- बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
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जस्टिस मिश्रा ने वीडियो में बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा 'इस तरह के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है, आप इसके लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? बच्चे किस तरह की संस्कृति सीखेंगे?....

नई दिल्ली। केरल की कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अग्रिम जनानत देने से इनकार कर दिया है। रेहाना पर उनके अर्धनग्न शरीर पर अपने बच्चों से पैंटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने का आरोप है। इसको लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। फिर केरल हाईकोर्ट ने भी रेहाना को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद रेहाना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने फातिमा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से पूछा कि 'आप हमारे सामने किस तरह का मामला लाए हैं? मैं थोड़ा चकित हू।' इस पर शंकरनारायणन ने कहा कि यह मुद्दा लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO)के तहत अश्लील साहित्य के प्रावधानों को लागू करने से संबंधित है।

जस्टिस मिश्रा ने वीडियो में बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा 'इस तरह के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है। आप इसके लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? बच्चे किस तरह की संस्कृति सीखेंगे?' इस पर फातिमा के वकील ने जवाब दिया कि अश्लीलता के बारे में कामुकता और संकीर्ण विचारों पर उचित जागरूकता फैलाने के इरादे से उक्त वीडियो बनाया गया था।

शंकरनारायणन ने आगे कहा, 'उनका स्टैंड हमेशा से रहा है अगर कोई पुरुष अर्धनग्न खड़ा है, तो उसके बारे में कुछ भी सेक्सुअल नहीं है, लेकिन अगर कोई महिला ऐसा करती है, तो यह अश्लील है। वह कहती हैं कि इसमें सुधार लाने का एकमात्र तरीका लोगों को इस बारे में संवेदनशील बनाना है।' इस पर जस्टिस मिश्रा ने जवाब दिया, 'वह इन बातों को समझने के लिए काफी उम्रदराज़ हैं।'

शंकरनारायणन ने फातिमा का पक्ष रखते हुए कहा, 'मैं यहां नैतिकता के मुद्दे पर नहीं हूं। मैं उस तरह के प्रावधानों के पहलू पर हूं जो मेरे लिए लागू किए गए हैं। वीडियो में बच्चे पूरी तरह से कपड़े पहने हुए हैं। यह मामला POCSO की धारा 13 के तहत कैसे आ सकता है?' इस पर जस्टिस मिश्रा ने जवाब दिया, 'हां, प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है। हाईकोर्ट पहले ही मामले के गुण देख चुका है।'

जब वकील ने पूछा कि उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश क्यों लगाया जाना चाहिए, तो पीठ ने संकेत दिया कि यह आवश्यक था ताकि वह इसे फिर से ऐसा न करे। रेहाना फ़ातिमा की इस दलील को केरल हाईकोर्ट ने नामंज़ूर कर दिया था कि यौन शिक्षा देने के लिए उन्होंने उस वीडियो को प्रकाशित किया जिसमें उनके बच्चे को उनके नग्न शरीर पर पेंटिंग करते दिखाया गया है। कोर्ट ने रेहाना को इस आधार पर अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया था।

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