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24 की उम्र में पाकिस्तान गया 52 की उम्र में घर लौटा, बताया पाक की जेलों में हैवानियत से भी बुरा है सलूक

Janjwar Desk
18 Nov 2020 11:40 AM GMT
24 की उम्र में पाकिस्तान गया 52 की उम्र में घर लौटा, बताया पाक की जेलों में हैवानियत से भी बुरा है सलूक
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शमशुद्दीन ने 'जनज्वार' को बताया कि पाकिस्तान की जांच एजेंसियों ने उनके साथ आतंकियों सा सलूक किया। वह लोग कई कई दिन तक खाने को नहीं देते थे, सिर पर चाकू की नोंक रखकर बयान दर्ज करवाये जाते थे.....

मनीष दुबे की रिपोर्ट

कानपुर। पाकिस्तान का नाम सुनकर घर मे बैठे सभी परिजनों की आंखों की कोरें आंसुओं से भीग जाती हैं। हम उस घर में बैठे थे जहां का एक व्यक्ति पूरे 28 साल बाद अपने मुल्क वापस आया है। अपने अपनो के बीच एक दूसरे को पाकर पूरा परिवार बार-बार भावनाओं में भीग जा रहा है।

थोड़ी ही दूर बैठी एक छोटी बच्ची बार-बार शमशुद्दीन की गोद मे आकर बैठने की कोशिश कर रही थी। पास ही बैठी उसकी मां उसे मना भी नहीं कर रही थी क्योंकि उसका वालिद पूरे 28 वर्ष के बाद घर वापसी आया है। छोटी बच्ची लाड़ दुलार कर रही है। ये सब देखकर एक बार हमारा भी दिल भीग गया, और कई बार कैमरा बन्द करना पड़ा।

कानपुर के कंघी मोहाल का निवासी शमशुद्दीन आज से 28 साल पहले यानी 24 वर्ष की उम्र में पाकिस्तान चला गया था। वहां उसकी एक जानकार रिश्तेदार रहती थी, जिसके पास काम-काज की जुगाड़ में वह गया था। शमशुद्दीन 20 साल तक पाकिस्तान में रहा। इस दौरान वह पाक का माहौल खराब होने के बाद अपना वीजा रिन्यू नहीं करवा सका।

वीजा खत्म होने के बाद उसे कुछ जांच एजेंसियां शक के आधार पर उठा ले जाती हैं। जांच के बाद शमशुद्दीन को पाकिस्तान की कराची स्थित जेल में बन्द कर दिया जाता है। उनपर आरोप लगता है कि वह भारतीय जासूस है जो इस मुल्क की जासूसी करने आया है जबकि शमशुद्दीन का कहना है कि उनका वीजा मात्र खत्म होने के बाद उन्हें जेल में डाला गया था।

शमशुद्दीन ने 'जनज्वार' को दिए बयान में बताया कि पाकिस्तान की अदालतों से सभी कैदियों के लिए एक जैसा सलूक करने का फरमान जारी किया जाता है और वहां की जेलों में सलूक भी ठीक ठाक ही होता है। लेकिन जब जेल में बन्द व्यक्ति को जांच एजेंसियां उठाती हैं तो हैवानियत से भी अधिक तकलीफदेह स्थिति हो जाती है।

हमारे पूछने पर शमशुद्दीन बताते हैं कि पाकिस्तान की जांच एजेंसियों ने उनके साथ आतंकियों सा सलूक किया। वह लोग कई कई दिन तक खाने को नहीं देते थे। सिर पर चाकू की नोंक रखकर बयान दर्ज करवाये जाते थे। कभी तो बगल में पिस्तौल लेकर एक व्यक्ति सिर में लगाकर मार देने की धमकी देता था। और तो और उनपर दबाव भी बनाया जाता था कि वह कहें कि वह पाकिस्तान की खुफिया रिपोर्ट पड़ोसी मुल्क हिंदुस्तान को पहुंचाते हैं।

शमसुद्दीन हिंदुस्तान की केन्द्र व राज्य सरकार की प्रशंशा करते नहीं थकते। वह कहते हैं कि इन लोगों की पहल से वह अपने मुल्क, अपने अपनो के बीच पहुंच सके हैं। इस दीवाली को अपनी वतन वापसी के रूप में याद करने वाले शमशुद्दीन बात करते-करते रुआंसे से हो उठते हैं। उनकी आवाज इस कदर भारी हो जाती है की मुंह से बोल नहीं निकलते।

शमशुद्दीन कहते हैं कि वह अपनी 24 साल की उम्र में पाकिस्तान मजाक-मजाक में चले गए थे। उनका यह मजाक उनपर इस कदर भारी पड़ा कि 52 साल की उम्र में 28 साल बाद अपने वतन अपने परिवार के बीच लौट सके। जिसमे जेल के बिताए गए 8 साल वह मरते दम तक नहीं भुला सकते।

शमशुद्दीन की बहन शबीना 'जनज्वार' से बात करते करते रोने सी लगती हैं। कहती हैं हम तो उम्मीद ही छोड़ चुके थे कि भाईजान अब दोबारा हमे देखने को भी मिलेंगे। लेकिन अल्लाह पाक का शुक्र है कि उनके भाई को सकुशल घर वापस भेज दिया। हम कभी इन दिनों को नहीं भुला सकते।

आखिर में शबीना मीडिया का भी शुक्रिया अदा करती हैं। कहती हैं मीडिया की बदौलत ही आज उनका भाई उनके पास है। मीडिया ने बहुत सहयोग किया। पल-पल की खबर उन्हें और उनके परिवार तक पहुंचती रही।

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