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कोरोना पॉजिटिव महिला की मौत के बाद बेटा नहीं चुका पाया बिल तो मैक्स मोदी अस्पताल ने रोक लिया शव

Manish Kumar
12 May 2020 7:57 AM GMT
कोरोना पॉजिटिव महिला की मौत के बाद बेटा नहीं चुका पाया बिल तो मैक्स मोदी अस्पताल ने रोक लिया शव
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फैज का आरोप है कि अस्पताल उनसे इलाज के 53 हजार रुपये मांग रहा है. अस्पताल उनकी मां को ईडब्ल्यूएस श्रेणी का मरीज मानने से इनकार कर रहा है...

जनज्वार। दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुरस्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत (मैक्स मोदी) पर बड़ा आरोप लगा है. फैज नाम के एक युवक ने आरोप लगाया है कि कि उसकी मां का शव अपस्ताल प्रबंधन ने उसे नहीं सौंपा. फैज का आरोप है कि अस्पताल उनसे इलाज के 53 हजार रुपये मांग रहा है।

फैज का कहना है कि अस्पताल उनकी मां को ईडब्ल्यूएस श्रेणी का मरीज मानने से इनकार कर रहा है। फैज की मां जीनत बेगम एक कोविड-19 पेशेंट थी।

फैज ने बताया कि आज मंगलवार 12 मई को सुबह 4 बजे उनके पास अस्पताल से फोन आया था कि उनकी मां का निधन हो गया है. फैज ने एक सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है.



फैज ने अपने वीडियो में वकील अशोक अग्रवाल से मदद करने की अपील की थी. अशोक अग्रवाल ने जनज्वार को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के कुछ साल पहले अपने एक फैसले में यह साफ कहा था कि बिल न चुका पाने की सूरत में कोई भी अस्पताल किसी के शव या किसा मरीज को रोक कर नहीं रख सकते.

उन्होंने कहा, मैंने मैक्स स्मार्ट अस्पताल के एमएस को पत्र लिखकर यह मांग की है कि फैज की मां को एक ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के मरीज के तौर लिया जाए और अस्पताल ने उनसे जो 10000 रुपये शुरुआत में लिए थे वह भी वापस कर दिए जाए.

वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल शव देने के राजी हो गया. खबर लिखे जाने तक फैज ने बताया अस्पताल शव देने के लिए राजी हो गया है लेकिन अभी तक उसे शव नहीं मिल सका है.

इस मसले पर जब अस्पताल के दो अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वे इस मुद्दे पर बात करने से बचते रहे.

क्या आदेश है दिल्ली हाईकोर्ट का?

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अस्पताल किसी भी पेशंट को बिल पेमेंट न होने के आधार पर रोक नहीं सकता। याचिकाकर्ता का आरोप था कि राजधानी दिल्ली के एक नामी प्राइवेट अस्पताल ने उसके पिता को रोक रखा है इस मामले में याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस की अर्जी दाखिल की है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सर गंगाराम हॉस्पिटल से कहा था, "यदि बिलों का भुगतान नहीं किया जाता है, तो रोगी को जाने दें। आप रोगियों को बंधक नहीं रख सकते। यह तरीका नहीं हो सकता।

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