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निरक्षर दलित के पूरी तरह जले हुए शव से पुलिस ने बरामद किया सुसाइड नोट!

Prema Negi
3 March 2019 6:33 AM GMT
निरक्षर दलित के पूरी तरह जले हुए शव से पुलिस ने बरामद किया सुसाइड नोट!
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इट्स हैपेन ओनली इन इंडिया

गंगाराम बलाई का शरीर पूरी तरह जल जाने के बावजूद जेब में रखा सुसाइड नोट बचा रह गया, उसने आत्महत्या करने से पहले खुद को बाइक के टायर से बाँधा और अविवाहित होने के बावजूद वह बेटी के गम में खुदकुशी करता है, यह कहना है राजस्थान की भीलवाड़ा पुलिस का...

सुशील मानव की रिपोर्ट

जनज्वार। एक निरक्षर मरने से पहले सुसाइड नोट कैसे लिख सकता है। एक 65 वर्षीय ग्रामीण अविवाहित की बेटी भी हो सकती है। एक आदमी की शरीर पूरी तरह जल जाने के बावजूद जेब में रखा सुसाइड नोट बच सकता है। एक आदमी आत्महत्या करने से पहले खुद को बाइक के टायर से बाँध सकता है। चौंकिए नहीं ये सब किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि राजस्थान की भीलवाड़ा पुलिस कह रही है।

गौरतलब है कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के तिलस्वा में एक कांग्रेस नेता की खदान पर बागवानी का काम करने वाले दलित मजदूर गंगाराम बलाई का पेड़ से बंधा अधजला शव मिला। शव एक सूखे पेड़ के नीचे पड़ा था। पेड़ भी अधजला है और बाइक के टायरों के तारों से शव इसमें लिपटा था। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या माना है, जबकि परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर हत्या की आशंका जताई है।

पुलिस के मुताबिक पास पड़े मिले आधार कार्ड से मरे हुए व्यक्ति की शिनाख्त गंगाराम पुत्र बरदा बलाई, उम्र 65 वर्ष, निवासी उम्मेदनगर (शाहपुरा) के रूप में हुई। वह बहादुरजी का खेड़ा में पत्थर कारोबारी कंपनी कैलाश माइनिंग में 3 साल से बागवानी का काम करता था। इसी कार्यालय के सामने सड़क की दूसरी ओर कुछ ही दूर पेड़ के पास शव मिला।

मृतक गंगाराम के भतीजे मदनलाल ने पुलिस को बताया कि उसके चाचा करीब 30 साल से तिलस्वां क्षेत्र में ही मजदूरी कर रहा था। करीब 27 साल तक तिलस्वा महादेव मंदिर की बगीची में बागवानी की। पिछले 3 साल से वह बहादुरजी का खेड़ा में कंपनी एवं तिलस्वा महादेव में बन रही सराय के काम काम पर जा रहा था। गंगाराम शादीशुदा नहीं था।

लेकिन पुलिस की थ्योरी में गंगाराम ने आत्महत्या की है। पूरी तरह जल चुके शव उसके शव की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपनी आत्महत्या का कारण बेटी की मौत बताया है। कांस्या चौकी प्रभारी जोगेंद्र सिंह का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का लग रहा है।

जबकि मरहूम गंगाराम के भाई और भतीजे ने बताया कि गंगाराम की शादी नहीं हुई है और वो निरक्षर था। सवाल ये भी उठता है कि जिंदा जलाये गये मजदूर गंगाराम बलाई की जेब में सुसाईड नोट मिला है, शरीर जल गया, पेड़ जल गया, पर जेब मे कागज का टुकड़ा बचा रह गया!

मृतक अनपढ़ था, उसने सुसाईड नोट कैसे लिखा? मृतक अविवाहित था, तो उसने सुसाईड नोट में अपनी बेटी का ज़िक्र क्यों किया? आत्महत्या करनेवाला खुद को पेड़ से क्यों बाँधेगा। कानून का डर खत्म होता जा रहा है, नेताजी ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस ने भी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तक छलांग लगा दी।

कोई कुछ नहीं बोला, सब खामोश हैं, जलाया गया इंसान एक आम दलित मजदूर था, उसकी फिक्र न शासन को है और न ही प्रशासन को। ये कैसी अंधेरगर्दी है कि बथानीटोला, शंकरबीघे, लक्ष्मणपुर बाथे जैसे दलित जनसंहार में कभी न्याय कभी हुआ ही नहीं। दलित और मुस्लिम समाज के मामलों में शासन प्रशासन औऱ न्यायपालिका ऐसे ही बर्ताव करते हैं। इट्स हैपेन ओनली इन इंडिया।

इस घटना पर दलित सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी लिखते हैं, 'राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के तिलस्वा में एक कांग्रेस नेता की खदान पर बागवानी का काम करने वाले दलित मजदूर गंगाराम बलाई को पेड़ से बांधकर ज़िंदा जलाकर मार डाला गया है। मृतक शाहपुरा क्षेत्र के ईटमारिया गांव का निवासी था। घटना बिजोलिया थाना क्षेत्र के बहादुर जी का खेड़ा के पास जंगल की है। कानून का डर खत्म होता जा रहा है,नेताजी ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस ने भी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तक छलांग लगा दी। जातियों के नाम पर खेल कूद और उछल कूद करने वाले, रक्तदान,प्रतिभा सम्मान करने वाले ठेकेदार भी अपने अपने दड़बों में छुपे रहे। कोई कुछ न बोला, सब खामोश है,जलाया गया इंसान एक आम मजदूर था,उसकी फिक्र न शासन को है और न ही प्रशासन को। शर्मनाक बात है। जंगलराज की स्थितियां हैं, तुंरत कार्यवाही हो, मृतक को मुआवजा मिले, वर्ना लोग आंदोलित होंगे।'

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