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गायक दंपति को रहने के लिए झोपड़ी तक नसीब नहीं

Janjwar Team
11 Aug 2017 11:26 PM GMT
गायक दंपति को रहने के लिए झोपड़ी तक नसीब नहीं
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दृष्टिहीन गायक दंपति आजकल बरसात के दिनों में कभी भूखे पेट सोने को मजबूर है, तो कभी स्थानीय लोगों द्वारा दिये गए भोज्य पदार्थों अपना पेट भर रहे हैं...

अल्मोड़ा से राजेश आर्य

ये धौलछीना अल्मोड़ा के रहने वाले दृष्टिहीन दिव्यांग पति-पत्नी श्री संत राम जी और आनंदी देवी जी हैं। अल्मोड़ा के आकाशवाणी केंद्र से जनपद अल्मोड़ा-बागेश्वर-पिथौरागढ़-चम्पावत के 4 जनपदों की जनता ने दशकों तक इनको नियमित रूप से आकाशवाणी अल्मोड़ा के माध्यम से सुना होगा।

यह बात ज्यादा पुरानी नहीं है। सिर्फ 10 साल पहले तक कुमाऊँ के गांव-गांव में रेडियो मनोरंजन का मुख्य साधन था, गांवों में दिन में रेडियो के सेल धूप में सुखाकर कभी श्री संत राम जी और श्रीमती आनंदी देवी जी के लोकगीत सुनकर हम अपना मनोरंजन करते थे तो शाम को बीबीसी न्यूज़ सुनकर देश दुनिया के समाचारों से हम वाकिफ होते थे

आज यह पोस्ट लिखने का कारण यह है कि हमारे कुमाऊँ लोकगीतों के सुपरस्टार दिव्यांग पति पत्नी के पास ना रहने को घर है, ना सोने को बिस्तर है, बरसात में टूटे हुए जर्जर टपकते 1 कमरे में बिना सोये रात काट रहे हैं।

समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली पेंशन भी आधार कार्ड ना बन पाने के कारण बंद हो गयी है। जिस कारण ये दंपति धौलछीना के छोटे से बाज़ार में सड़क पर स्थानीय लोगों को अपने लोकगीत सुनाकर अपना पेट पाल रहे हैं, आजकल बरसात के दिनों में कभी भूखे पेट सोने को मजबूर हैं तो कभी स्थानीय लोगों द्वारा दिये गए भोज्य पदार्थों अपना पेट भर रहे हैं।

अनुसूचित समाज से आने वाले संतराम राम जी और उनकी पत्नी की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सुर सागर रहे दंपति असल में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की हकदार है, इस दंपति को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाई जानी चाहिए।

समाज कल्याण के अधिकारियों को इस दंपति की वृद्धावस्था पेंशन योजना की सारी अनौपचारिकता पूरी करनी चाहिए।

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