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राजनीति

पनामा का भ्रष्टाचार शिष्टाचार और लालू का भ्रष्टाचार अपराध

Janjwar Team
29 July 2017 10:02 AM GMT
पनामा का भ्रष्टाचार शिष्टाचार और लालू का भ्रष्टाचार अपराध
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टैक्स छूटों, नोट बंदी से अर्थ व्यवस्था को नुकसान, गैरजरूरी भारी-भरकम रक्षा सौदों, यानी कोई भी आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कर लीजिये। किसी के भी खिलाफ। बस सत्ता आपके हाथ में होनी चाहिए...

वीएन राय, पूर्व आईपीएस

आपने ठीक सुना है। केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने हजारों करोड़ काले धन के पनामा लीक मामले में नहीं, अरसे पुराने चंद करोड़ के रेलवे कैटरिंग ठेके मामले में एफआईआर दर्ज की है। पनामा मामले में फंसे प्रधानमंत्री मोदी के दोस्तों को चिंता करने की जरूरत नहीं, सीबीआई के निशाने पर मोदी के चिर दुश्मन लालू ही बने रहेंगे।

यूं किसी ने भी नहीं सोचा कि पनामा पेपर्स लीक से उजागर हुए वैश्विक पैमाने के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गये पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पद से छुट्टी की शर्म इस मामले में निष्क्रिय रही मोदी सरकार में महसूस की जायेगी। शाह-मोदी के काम करने के तरीके का कोई भी जानकार बता देगा कि उनका ‘न खाऊँगा न खाने दूंगा’, का असली मतलब क्या है।

पनामा स्कैंडल में शामिल स्टार अमिताभ बच्चन, कॉर्पोरेट अदानी, मुख्यमंत्री रमण सिंह के सांसद पुत्र या डीएलएफ़ के केपी सिंह जैसी हस्तियों में मोदी शासन के रहते तनिक भी चिंता व्याप्त नहीं सकती। जबकि नीतीश के पाला बदलने के बाद लालू और उनके कुनबे की चिंताओं का अंत नहीं।

राबड़ी देवी ने बेशक ठीक कहा कि राजनीति में किसके पास पैसा नहीं, पर वे फर्क भूल गयीं कि लालू के पास मोदी का आशीर्वाद नहीं। तभी शायद अधिकांश पैसे वाले आज मोदी के पाले में खड़े हैं और लालू कुनबे पर एफआईआर दर्ज होने का सिलसिला नये सिरे से चल पड़ा है।

लालू कुनबे पर दर्ज ताजातरीन एफआईआर बेहद दिलचस्प है। यदि इस तरह वर्षों गुजर जाने के बाद मंत्रियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करने का रिवाज चल निकला तो सत्ता से हटने के बाद मोदी और उनके मंत्रियों पर भी जितनी चाहे उतनी एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं।

ताजातरीन लालू एफआईआर में आरोप है कि उनके रेल मंत्री काल में प्रेमशंकर गुप्ता को कैटरिंग के ठेके दिए गए और बदले में बेनामी संपत्ति लालू और उनके कुनबे के नाम की गयी। दरअसल, किसी भी मंत्री पर यह आरोप लगाया जा सकता है। सबके कार्यकाल में ठेके दिए जाते हैं और सभी संपत्तियां बनाते हैं। बस दोनों को जोड़ कर देखने की देर है।

टैक्स छूटों, नोट बंदी से अर्थ व्यवस्था को नुकसान, गैरजरूरी भारी-भरकम रक्षा सौदों, यानी कोई भी आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कर लीजिये। किसी के भी खिलाफ। बस सत्ता आपके हाथ में होनी चाहिए! और कौन नहीं जानता कि सत्ता स्थाई चीज नहीं होती, आज यहां कल वहां।

लालू को भ्रष्ट जताते रहने के लिए उनके विरुद्ध अंधाधुंध एफआईआर दर्ज करते रहना एक सफल राजनीतिक युक्ति सिद्ध हो सकती है। फिलहाल इससे बिहार के सत्ता-पलट सन्दर्भ में नीतीश का एकसत्ता लालची नहीं, ईमानदार योद्धा का अक्स लोगों में घर करेगा। लेकिन, मोदी जी और नीतीश जी, यह वार पलटकर आप पर भी आ सकता है। आज सीबीआई का सदुपयोग-दुरुपयोग आप के हाथ में है, कल सीबीआई दूसरों के हाथ में होगी।

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