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संस्कृति

दुनियाभर में पहचान कायम करती पहाड़ की 'ऐपण' कला

Janjwar Team
19 Sep 2017 1:47 PM GMT
दुनियाभर में पहचान कायम करती पहाड़ की ऐपण कला
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प्रदर्शनी के साथ 2 दिवसीय ऐपण कार्यशाला आयोजित

रुद्रपुर, उत्तराखण्ड। नई पीढ़ी को पारम्परिक कला से जोड़ने के उद्देश्य से साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'क्रिएटिव उत्तराखण्ड' ने हस्तकला ऐपण की दो दिवसीय निशुल्क कार्यशाला का आयोजन रुद्रपुर के गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज में किया।

कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों को अल्मोड़ा की ऐपण विशेषज्ञ मीरा जोशी ने ऐपण के उपयोग, विभिन्न प्रकार और इसके व्यावसायिक उपयोग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

16 सितम्बर को पहले दिन कार्यशाला का शुभारम्भ प्रधानाचार्य कुलविंदर कौर संधु जी द्वारा किया गया। मीरा जोशी ने पौ, पट्टा, धुलियर्ग चौकी, शिव चौकी, वसन्धारा आदि ऐपण के विभिन्न प्रकारों को समझाया। जिसके बाद 17 सितंबर को प्रतिभागियों ने ऐपण के प्रयोग से पेपर वेट, चौकी, ग्रीटिंग कार्ड, बैज आदि कलाकृतियों का निर्माण किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय से आई कलाकार कुसुम पांडे ने कहा कि कला के क्षेत्र में अब सुनहरे भविष्य के अवसर हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ ऐपण कला में भी तेजी से बदलाव आए हैं, फिर भी यह कला अपने मूल रूप को बरकरार रखते हुए पूरी दुनिया में पहचान बना रही है।

17 सितम्बर को हस्तनिर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी देखने के लिए कई कलाप्रेमी एकत्रित हुए। लोगों ने इन कलाकृतियों को खरीदने में भी रुचि दिखाई। सभी लोगों ने क्रिएटिव उत्तराखण्ड संस्था के इस अनूठे प्रयोग की प्रशंसा की।

ऐपण कार्यशाला की संयोजक उषा टम्टा ने बताया कि इस कार्यशाला के द्वारा युवतियों को स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। दीपावाली के त्यौहार में ऐपण कलाकृतियों की बहुत मांग होती है। आजकल इन कलाकृतियों को ऑनलाइन भी बेचा जाना सम्भव है।

पूरी कार्यशाला के दौरान रीता जोशी, कस्तूरी लाल तागरा, संजय राधू, स्नेह राधू, सन्तोष खन्ना, उषा टम्टा, सुनीता पांडे, अनीता पन्त, पल्लवी बिष्ट, तारा सुयाल, हरीश त्रिपाठी, सन्दीप सिंह, मोहित गाबा, हेम पन्त, ललित मोहन, अली सिद्दीक़ी, मनोज पांडे, शशांक, शिवानी, नेहा आर्या, दीपिका, प्रभजोत, हीरा जंगपांगी, शायरा, निशा कोली आदि उपस्थित रहे।

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