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अफजल गुरु की दया याचिका खारिज की थी कांग्रेस सरकार के कहने पर : प्रणब मुखर्जी

Janjwar Team
21 Oct 2017 12:47 PM GMT
अफजल गुरु की दया याचिका खारिज की थी कांग्रेस सरकार के कहने पर : प्रणब मुखर्जी

फांसी की दया याचिका राष्ट्रपति तक पहुंचने से पहले कई स्तरों से होकर गुजरती है और इस प्रकिया में पहले ही कई सारे निर्णय लिए जा चुके होते हैं...

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैंने सरकार की सलाह पर ही संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका खारिज कर फांसी देने का आदेश दिया था। इस मामले में पहले ही अदालतें हर स्तर पर फांसी की सजा को बरकरार रखे हुए थीं।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ये बातें 20 अक्टूबर को हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार औरंगजेब नक्शबंदी से एक साक्षात्कार के दौरान कहीं। पूर्व राष्टपति ने इस बातचीत में यह भी कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर फांसी का विरोधी हूं और चाहता हूं कि कानून में बदलाव कर सजा के तौर पर फांसी की व्यवस्था को भारत में खत्म कर दिया जाए।

2012 से 2017 के बीच राष्ट्रपति रहते हुए प्रणब मुखर्जी ने फांसी की 30 दया याचिकाएं खारिज कीं। प्रणब मुखर्जी देश के संभवत: पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में दया याचिकाएं खारिज की हैं। हालांकि इस बारे में उनका कहना है, 'मैं इसमें भरोसा नहीं करता कि फाइलें पड़ी रहें और उन पर मैं कोई कार्रवाई न करूं। या तो मैं इन फांसी की फाइलों को फेंक देता या सरकार ने जो सुझाव दिया है, उसको मंजूरी दूं। एक—दो मामलों में मैंने गृहमंत्री से बात की होगी, बाकि के मामले में मैंने वही किया जो सरकार का सुझाव था।'

प्रणब मुखर्जी ने बातचीत में कहा कि फांसी की दया याचिका राष्ट्रपति तक पहुंचने से पहले कई स्तरों से होकर गुजरती है और इस प्रकिया में पहले ही कई सारे निर्णय लिए जा चुके होते हैं। एक राष्ट्रपति फांसी की माफी की याचिकाओं के मामले में स्वाभाविक तौर पर सरकार की सलाह पर निर्भर होता है। और मैंने भी वही किया।

13 दिसंबर 2011 को संसद हमले के दोषी और फांसी की सजा पा चुके अफजल गुरु को सबसे पहले 18 दिसंबर 2002 को निचली अदालत ने फांसी की सजा मुकर्रर की। उसके बाद 2004 में हाईकोर्ट ने भी फांसी को बरकरार रखा, पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया।

बाद में अक्टूबर 20, 2006 को फांसी दिया जाना मुकर्रर हो गया, पर परिवार ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका डाली, जिसके बाद 3 फरवरी 2013 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका को खारिज कर दी और 9 फरवरी को इसी साल अफजल को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। गौरतलब है कि तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए—2 की सरकार थी।

पूर्व राष्ट्रपति की बात से यह साफ होता है कि फांसी के मामलों में दया याचिकाओं को स्वीकारने या खारिज करने पर राष्ट्रपति का कोई बस नहीं चलता है। संभवत: प्रणब मुखर्जी ने अपने पक्ष में यह सफाई उस भ्रम को दूर करने के लिए दी है जिसमें फांसी दिए जाने पर राष्ट्रपति की मर्जी की बात कही जाती है।

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