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दिलीप मंडल की ABVP को शास्त्रार्थ की चुनौती, बोले सांची स्तूप पर गोडसे-गोलवलकर की किताब लेकर आएं लाइव डिबेट के लिए तैयार हूं

Nirmal kant
13 Dec 2019 4:00 PM GMT
दिलीप मंडल की ABVP को शास्त्रार्थ की चुनौती, बोले सांची स्तूप पर गोडसे-गोलवलकर की किताब लेकर आएं लाइव डिबेट के लिए तैयार हूं
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प्रोफेसर दिलीप मंडल ने एबीवीपी से जुड़े छात्रों को शास्त्रार्थ करने की दी चुनौती, मंडल ने कहा, किसी तय तारीख को सांची स्तूप के पास आएं और मुद्दों पर बहस करें। स्वागत है। संवाद की तैयारी कीजिए। मैं अपने साथ संविधान, संविधान सभा की बहस और तमाम राष्ट्र निर्माताओं की किताबें लेकर आऊंगा...

जनज्वार। इंडिया टुडे के पूर्व ग्रुप एडिटर और माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर दिलीप मंडल लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। मंडल सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर पर काफी सक्रिय हैं और जातिवाद समेत तमाम सामाजिक मुद्दों पर विमर्श करते हैं। वहीं इस बीच माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों ने मंडल पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ कर दी। इन छात्रों का आरोप है कि दिलीप मंडल सोशल मीडिया पर जातिवादी टिप्पणी करते हैं। छात्र उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

छात्र विपिन तिवारी कहते हैं प्रोफ़ेसर दिलीप सी मंडल को छात्र आदर्श की तरह देखते हैं, ऐसे में उनकी ट्विटर से एक जाति विशेष के लिए ट्वीट करना हम छात्रों में आपस में भेदभाव पैदा करता है। ऐसे प्रोफेसर का यूनिवर्सिटी में कोई जगह नहीं होनी चाहिए इसीलिए हम लोग उनका विरोध कर रहे हैं और उन्हें कॉलेज से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।

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माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के छात्र ऋषभ राज सिंह जनज्वार से बातचीत में कहते हैं, 'प्रोफेसर दिलीप मंडल की नियुक्ति हमारे विभाग में पढ़ाने के लिए हुई है। हमारे विभाग के विद्यार्थियों को उनसे कोई शिकायत नहीं है। वह क्लास रूम में कोई भेदभाव नहीं करते और हम उनसे पढ़ते और सीखते रहना चाहते हैं।विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र अभिराज सिंह राजपूत कहते हैं, 'विश्वविद्यालय में ऐसा कोई भी माहौल नहीं है। यह सारा प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित है।'

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर दिलीप मंडल की बर्खास्तगी के लिए अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधिमंडल जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा से मिला और प्रोफेसर मंडल की बर्खास्तगी को लेकरविश्वविद्यालय के कुलपति के नाम ज्ञापन दिया। वहीं दिलीप मंडल ने जनज्वार से बातचीत में कहा कि जबसे माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के भीतर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्री बाई फुले, साहू महाराज आदि पर विमर्श शुरू हुआ, तभी से ये माहौल बना हुआ है।

विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा, 'विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र है यहां कोई भी व्यक्ति परिसर के अंदर धर्म एवं जाति के आधार पर विविध करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही होगी। दिलीप मंडल व अन्य कोई भी विश्वविद्यालय के बाहर क्या लिख रहे हैं, इससे विश्वविद्यालय का कोई लेना देना नहीं है। मैं भी कलावा पहनता हूं छात्रों को किसी भी प्रकार से अपने विचार रखने के लिए नहीं रोका गया है। छात्रों ने तोड़फोड़ की है, मजबूरी में कार्रवाई भी करनी पड़ सकती हैं। विश्वविद्यालय को पूर्व में एक विशेष विचारधारा का गढ़ बनाया गया था, वह अब प्रभावित होने लगा है इसलिए हलचल होने लगे हैं।'

रिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में लिखकर एबीवीपी से जुड़े छात्रों को शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी है। मंडल ने लिखा, 'विद्यार्थी परिषद को शास्त्रार्थ का निमंत्रण, आज भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने फुले-आंबेडकर विचारधारा को लेकर मेरे खिलाफ हंगामा किया और तोड़फोड़ की। मेरा उनसे निवेदन है कि किसी तय तारीख को सांची स्तूप के पास आएं और मुद्दों पर बहस करें। स्वागत है। संवाद की तैयारी कीजिए। मैं अपने साथ संविधान, संविधान सभा की बहस और तमाम राष्ट्र निर्माताओं की किताबें लेकर आऊंगा। आप भी मनुस्मृति और गोडसे तथा गोलवलकर की किताबें लेकर आइए। लाइव डिबेट करते हैं। लाइव प्रसारण हो। हो सकता है कि आप मुझे परास्त कर दें। आइए तो सही। डरिए मत।'

दिलीप मंडल ने आगे लिखते हैं, 'दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में विचारधारा की लड़ाई तर्कों के आधार पर लड़ी जाती है। मैं फरवरी महीने में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय मीडिया में जातिवाद पर बोलूंगा। वहां मुझसे असहमति रखने वाले दुनिया भर के विद्वान होंगे। लेकिन वे मुझे सुनेंगे और मैं भी उन्हें सुनूंगा। आपको भी तोड़फोड़ की जगह संवाद का तरीका अपनाना चाहिए। अपने विचार को संवाद की कसौटी पर कसने से डरिए मत। आइए सांची स्तूप, ज्ञान की भूमि पर, लाइव शास्त्रार्थ के लिए। आपका, दिलीप मंडल।'

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प्रो. दिलीप मंडल के समर्थन में में छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें छात्रों ने लिखा है कि

भारत के संविधान ने सभी नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है जिसे विभिन्न माध्यमों के द्वारा प्रेषित किया जा सकता है। इस स्वतंत्रता का उपयोग विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक या छात्र समान रूप से कर सकते हैं। देखने में आ रहा है कि कुछ लोग इस स्वतंत्रता में बाधक बन रहे हैं और जातिवाद व वर्गवाद से जोड़कर देख रहे हैं जो कि अनुचित है। हम इसके पक्षधर नहीं है और इसकी कड़ी आलोचना करते हैं। उम्मीद करते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधक लोगों से संवैधानिक तरीके निपटा जाएगा।

दिलीप मंडल कहते हैं, 'आरएसएस के बगलबच्चा संगठन एबीवीपी से निवेदन है कि मेरी किन ट्विट से उनकी आत्मा को कष्ट पहुंचा है, ये बताएं। ज्यादा तकलीफ हो गई हो, तो मानहानि का मुकदमा कर दें। मैं तार्किक व्यक्ति हूं। मैं आपत्ति पर विचार करने के लिए तैयार हूं लेकिन गुंडागर्दी और हिंसा की वजह से कुछ नहीं हटेगा।'

आगे कहते हैं, 'विश्वविद्यालय यानी यूनिवर्सिटी सिस्टम का अर्थ है विश्व के हर विचार, चाहे वे आपकी नजर में बेतुके हों या जिनसे आपकी भावनाएं आहत होती हों, उन्हें सुनना और विचारधाराओं के अबाध प्रवाह के बीच सिंथेसिस तक पहुंचने की कोशिश करना। मैं किसी विचार से नहीं डरता। किसी को भी डरना नहीं चाहिए।'

छात्र धर्मेंद्र कमरिया जनज्वार से बात करते हुए कहते हैं कि विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग और पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों ने कुलपति महोदय को ज्ञापन दिया है और उनसे अनुरोध किया है कि दिलीप सी मंडल जैसे विद्वान प्रोफेसर की हमें जरूरत है अगर उनके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही की जाती है तो छात्र उनके समर्थन में आएंगे।

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