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जिस सिरप को बच्चों को स्वस्थ होने लिए दिया था वह जहरीला निकला, 12 की मौत

Janjwar Team
12 March 2020 8:01 AM GMT
जिस सिरप को बच्चों को स्वस्थ होने लिए दिया था वह जहरीला निकला, 12 की मौत
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पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के रिसर्च से खुलासा, कोल्ड बेस्ट कफ सिरप में जहरीले रसायन से हुई थी 12 बच्चों की मौत....

जनज्वार ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर में अस्पताल में बीमार 17 बच्चों में से 12 बच्चों की मौत की वजह वह सिरप था, जो उन्हें इलाज के लिए दिया गया था। इस सिरप में जहरीले तत्व की मात्रा 34.97 थी। सिरप पीने से बच्चों की किडनी खराब हो गयी। जो उनकी मौत की वजह बनी। यह तथ्य बच्चों की मौत के बाद पीजीआई चंडीगढ़ की डाक्टरों की टीम ने उजागर किया। टीम ने बच्चों की मौत के कारणों पर रिसर्च किया तो पाया कि कोल्ड बेस्ट कफ सिरप में जहरीले रसायन था।

नवरी में ही जम्मू कश्मीर में बीमार होने पर बच्चों को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। यहां यकायक उनकी मौत हो गयी। फौरी तौर पर मौत की वजह का पता नहीं चल पाया था। बाद में पीजीआई चंडीगढ़ ने इस पर रिसर्च किया। तकरीबन एक माह की जांच के बाद पता चला कि सिरप डायथाइलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक रयासन है। जो बच्चों की दवा में नहीं होना चाहिए। दो मार्च को डाक्टरों की टीम ने रिपोर्ट को जारी किया। चंडीगढ़ की रीजनल ड्रग्स टेस्टिंग लेबोरेटरी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश स्थित डिजिटल विज़न फार्मा ने यह सिरप तैयार किया था। इसे कई राज्यों में बेचा गया था।

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डाक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दवा का निर्माण करने वाली कंपनी ने सुरक्षा मानकों की ओर ध्यान नहीं दिया। यह कंपनी में दवा निर्माण में भारी अनियमितता बरती जा रही है। दवा तैयार करते वक्त तो सुरक्षा मानकों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि दवा बनने के बाद भी इसकी जांच कोई प्रावधान नहीं है। यहं वजह रही कि जहरीली दवा बाजार में सप्लाई कर दी गयी।

का कहना है कि दवा निर्माण उद्योग में ऐसे कई स्तर है, जहां गड़बड़ी को पकड़ा जा सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब दवा निर्माता कंपनी तय मानकों पर काम कर रही हो। इसमें क्वालिटी की ओर पूरा ध्यान दिया जा रहा हो। इस केस में ऐसा लगता है कि कंपनी एक भी तय प्रावधान का पानल नहीं कर रही है। यहीं वजह रही कि घटिया सिरप बाजार में पहुंच गया।

जानकारों का यह भी कहना है कि कंपनी ने जहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा, वहीं राज्य दवा नियंत्रक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि राज्य की प्रयोगशालाओं में भी दवा क जांच होती है। यदि इस केस में जांच हो जाती तो 12 बच्चों की जान बच सकती थी। लेकिन राज्य के दवा नियंत्रक अधिकारियों ने भी अपनी भूमिका को अच्छे से नहीं निभाया।

जानकारों का यह भी कहना है कि दवा विक्रेता इस गड़बड़ी को पकड़ नहीं पाते। क्योंकि वह तो सिर्फ विक्रेता होते हैं। दवा की गुण्वत्ता के लिए सीधे सीधे कंपनी ही जिम्मेदार है।

धर हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हम कंपनी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे। किसी को भी इस तरह से जान से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

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रियाणा ड्रग कंट्रोलर एनके अहिजा ने कहा कि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए, दवाओं का उपयोग करने से पहले मरीजों का परीक्षण करना 'अनिवार्य' बना दिया गया है। इस बारे में हम पहले ही ध्यान रहे दे रहे हैं। फिर भी आगे इस तरह की घटनाएं न हो, इसके लिए विभाग की ओर से पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि निश्चित ही दवा में जहर होना चिंता का विषय है।

के खिलाफ मामला दर्ज किय गया इधर आरोपी कंपनी के खिलाफ जम्मू, कश्मीर,हिमाचल, पंजाब व हरियाणा में अलग अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस इस संबंध में अपनी जांच कर ही है। कंपनी का दवा बनाने का लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया गया है।

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