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हिमाचल में नाराज ग्रामीणों ने नदी के ऊपर खुद पुल बनाकर पेश की मिसाल, सरकार को दिखाया आईना

Nirmal kant
20 Nov 2019 2:56 PM GMT
हिमाचल में नाराज ग्रामीणों ने नदी के ऊपर खुद पुल बनाकर पेश की मिसाल, सरकार को दिखाया आईना
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के घरथू- कोना गांव के ग्रामीणों ने मिसाल पेश की है। यहां के ग्रामीणों को सरकार की ओर से हर बार केवल पुल निर्माण का आश्वासन मिला। लेकिन अबतक की सरकारों के रवैये से नाराज ग्रामीणों ने खुद पुल निर्माण का कार्य कर सरकार को आईना दिखाया है..

जनज्वार। कहते हैं कि मजबूत हौसला और समाज के लिये कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी रुकावट दूर की जा सकती है। इस कहावत को हिमाचल प्रदेश के सुलह विधानसभा क्षेत्र के घरथू - कोना गांव में लोगों ने सही साबित कर दिखाया है। सरकारों की लगातार अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने खुद ही न्यूगल नदी पर 20 मीटर लंबा लोहे और लकड़ी का पुल बनाकर तैयार कर दिया। इससे अब वह एक घंटे की दूरी महज 10 मिनट में तय कर लेते हैं।

रथू - कोना गांव के वासिन्दे वर्षों से न्यूगल नदी पर स्थायी पुल की मांग कर रहे थे, लेकिन वोट लेने के बाद माननीयों ने कभी इस ओर पलट कर ध्यान नहीं दिया। मजूबरन ग्रामीणों ने खुद ही पुल बनाने की ठान ली। न्यूगल नदी पर लोहे और लकड़ी का पुल बनाने में लगभग हर साल 25 - 30 हजार रुपये का खर्च आ जाता है, जिसे गांव के लोगों ने खुद ही मिलकर वहन कर लेते हैं और यह पुल हर साल नदी में बरसात के दिनों में बह जाता है।

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स लकड़ी और लोहे की पुलिया से रोजाना बड़ी तादाद में लोग नदी पार अपने कार्यक्षेत्र और काम से थुरल कॉलेज बस स्टॉप जाते हैं। सैकड़ों छात्र भी रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पारकर दूसरी ओर जाते हैं।

रसात के दिनों में इस लोहे और लकड़ी के पुल बह जाने पर अक्सर ग्रामीणों को बस पकड़ने के लिए बस स्टॉप तक जाने के लिए ग्रामीणों को 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। हर साल की तरह इस साल भी लोहे और लकड़ी के पुल बन जाने से बाद यह दूरी महज आधा किलोमीटर की रह गई।

लोहे और लकड़ी के पुल बन जाने से लोगों ने राहत की सांस ली और कहा कि सरकार से कितनी बार गुहार लगाने के बाद भी हम लोगों को वादे के सिवा कुछ नहीं मिला। पुल बन जाने से लोगों आना-जाना बहुत आसान हो गया है।

सको लेकर ग्रामीणों ने 'जनज्वार' से कहा कि स्थानीय लोगों का कहना है 2015 16 में इस पुल को बजट में डाला गया था लेकिन किसी कारण यह बन नहीं सका। हमारी वर्तमान सरकार से अनुरोध है कि इस अधूरे कार्य को पूरा किया जाए ताकि लोगों को आने-जाने की समस्याओं से निजात मिल सके।

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ग्रामीणों ने बताया कि कोना घरथूं के लोगों की इस परेशानी को समझते हुए पूर्व विधायक जगजीवन पाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सहयोग से प्राथमिकता के आधार पर राजकीय महाविद्यालय थुरल से कोना घरथूं के लिए न्यूगल नदी पर पुल निर्माण को हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के बजट 2015-2016 में शामिल किया गया था। इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने का कार्य जारी किया था जिसकी अनुमानित राशि बजट किताब में अंकित है।

ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस पुल को बनाया जाए अन्यथा आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इसका चार-बार पांच बार सर्वेक्षण हो चुका है। हर पांच साल में सरकार बदल जाती है। शायद नया विधायक आता है तो पुराने विधायक का काम रोक दिया जाता है।

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क ग्रामीण सुरजीत सिंह ने जनज्वार को बताया कि हमारे गांव के नजदीक डिग्री कॉलेज है, बच्चों को बस से जाना पड़ता है तो दूर पड़ जाता है। गरीब बच्चों के लिए संभव नहीं है कि रोज इतना किराया देकर स्कूल जा पाएं। तीन किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता हैं वो भी इंटीरियर इलाका है जहां महिलाएं नहीं जा पाती हैं। इस पुल को हर साल बनाते हैं बारिश आती है तो बह जाता है। गांव के लोग इकठ्ठा होकर सहयोग करते हैं। दस-पंद्रह लोग रोज जाते हैं। करीब आठ-दस साल पहले भी रोपवे था तो वह बारिश में बह गया था।

सुरजीत कहते हैं कि अगर सरकार की ओर से यह मजबूत पुल निर्माण का काम हो तो हमारे बच्चे सुखी रहेंगे। पैसे वाला आदमी गाड़ी करके भी जाएगा, गरीब परिवारों के लिए बहुत दिक्कत है। जैसे किसी की तबियत बिगडती है तो बहुत दिक्कत होती है।

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