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फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय के छात्रों का आंदोलन जारी, वाइस चांसलर ने कहा 15 दिन के भीतर होगा समाधान

Vikash Rana
23 Nov 2019 2:23 PM GMT
फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय के छात्रों का आंदोलन जारी, वाइस चांसलर ने कहा 15 दिन के भीतर होगा समाधान
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उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय से जुड़े हिमालयी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के छात्रों का फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ आंदोलन जारी, उच्च न्यायालय के आदेश को नजरअंदाज कर रहा विश्वविद्यालय प्रशासन..

जनज्वार, देहरादून। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्रों की फीस वृकद्ध वापस लिए जाने की मांगें मान ली गयी हैं, लेकिन उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय के छात्रों का आंदोलन अभी भी जारी है। उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध हिमालयी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में छात्र अपनी मांगों को लेकर 10 अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके आंदोलन और आमरण अनशन को 40 दिन पूरे हो चुके हैं।

ससे कई दिन पहले से बढ़ी हुई फीस और बेक पेपर कराए जाने समेत कई अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत छात्र धरने पर बैठे हुए थे। कांग्रेस और उत्तराखण्ड क्रांति दल समेत अन्य कई राजनीतिक-सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने के बावजूद सरकार छात्रों की मांगों को सुनने तक के लिए तैयार नहीं थी।

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पिछले महीने 3 अक्टूबर को छात्रों का आंदोलन तब हंगामे में तब्दील हो गया था, जब अपनी मांगों की कोई सुनवाई न हुई तो गुस्साए छात्रों ने विश्वविद्यालय में सभी की आवाजाही रोक दी। इसके कारण स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच टकराव पैदा हो गया। इसके बाद आंदोलनकारी छात्रों के लिए कुलपति ने पांच अक्तूबर को त्रिपक्षीय बैठक बुलाई थी। 4 अक्टूबर को आंदोलनरत छात्रों ने यह कहते हुए आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के पुतले की शवयात्रा निकाली कि फीस संबंधी मामला पिछले काफी वक्त से चल रहा है, पर मंत्री ने इसे सुलझाने की कभी पहल नहीं की।

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आंदोलन को लेकर आयुर्वेद विश्वविद्यालय की छात्रा प्रगति ने जनज्वार को बताया, 'उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नियमों को न मानने के कारण डांट लगाई है। 9 अगस्त, 2018 की रिट याचिका 1565/2018 में सुनवाई कर उच्च न्यायालय ने फीस बढ़ोतरी पर रोक लगा दी थी जिसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार कोर्ट के आदेश की अवेहलना कर रहा था।

सके बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर एक महीने के भीतर विश्वविद्यालय उच्च न्यायलय के नियमों का पालन नहीं करता है तो विश्वविद्यालय प्रशासन के ऊपर आयुर्वेद विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 की धारा- 37(1) के तहत कठोर कार्यवाही की जाएगी। साथ ही उच्च न्यायलय ने प्रशासन द्वारा कार्यवाही कर न्यायालय को जानकारी देने को भी कहा है।

आंदोलन को लेकर आयुर्वेद विश्वविद्यालय की आंदोलनरत छात्रा प्रगति ने कहा, ‘उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी हम विद्यार्थी प्रशासन की और से आदेश आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई संतुष्ट जवाब हम लोगों को नहीं दिया है, जिस कारण आंदोलन को हम सब ने अभी भी जारी रखा हुआ हैं। जब तक प्रशासन हमारी मांगों को लिखित रुप से नहीं मानता तब तक हम आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों की संख्या कम हो गई है, क्योंकि कुछ छात्र क्लास लेना शुरू कर चुके हैं, लेकिन आंदोलन अभी तक खत्म नहीं हुआ है।

प्रगति ने बताया कि कुछ छात्रों के माता-पिता बच्चों को क्लास में भेजकर खुद आंदोलन कर रहे हैं, जिसके बाद छात्र क्लास लेकर छात्र भी आंदोलन में अपनी भागीदारी दे रहे हैं लेकिन उच्च न्यायलय की फटकार लगने के बाद भी अभी तक विश्वविद्यालय का प्रशासन कोई जबाव नहीं दे रहा है।

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ढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के छात्रों को बढ़ी हुई फीस लौटाने पर आयुर्वेद कॉलेज के एक आंदोलनकारी छात्र कहते हैं, 'गढ़वाल विश्वविद्यालय से जुड़ा मामला सरकारी था इसलिए सुलझ गया, मगर 80 करोड़ रुपये वसूलने वाले प्राइवेट आर्युवेद कॉलेज चुप हैं। प्राइवेट कॉलेजों ने 80,000 से बढ़ाकर सालाना फ़ीस एकाएक 2.15 लाख रुपये कर दी, जो हमारे साथ सरासर अन्याय है।'

उधर आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सुशील जोशी ने जनज्वार से बात की और कहा कि प्रशासन को सरकार की तरफ से मैसेज मिल गया है। मामले की जांच करके 15 दिन के अंदर छात्रों की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

रकार सैकड़ों आयुर्वेद छात्रों के अनशन और आंदोलन पर ध्यान नहीं ही दे रही है, वहीं मोटी फीस वसूलने वाले निजी कॉलेज मालिकों को भी छात्रों की कोई फिक्र नहीं है। इस बीच मीडिया में एक निजी कॉलेज उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के मालिक अश्विनी कॉम्बोज का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह आंदोलन कर रहे छात्रों को धमका रहा है कि हम तुम्हारा कैरेक्टर खराब कर देंगे, जल्दी अपना आंदोलन वापस ले लो।

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