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विमर्श

कोरोना के बाद भाजपा शासित इन तीन राज्यों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा, हरियाणा में सबसे ज्यादा तो कर्नाटक में सबसे कम बेरोजगार

Janjwar Desk
20 Sep 2020 11:23 AM GMT
कोरोना के बाद भाजपा शासित इन तीन राज्यों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा, हरियाणा में सबसे ज्यादा तो कर्नाटक में सबसे कम बेरोजगार
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चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस ने भारत समेत पूरी दुनिया को 2 महीने के लिए बंद कर दिया था। इंसान से इंसान के जरिए फैलने वालेकोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हती है।डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है।

जिसके बाद दुनिया सहितपूरे भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे भारत में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। इस दौरान कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक काम धंधों, फैक्ट्रियों, दुकानों को पूरी तरह से बंद करना पड़ा था।लॉकडाउन के कारण पूरे देश की अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई थी। लॉकडाउन लगने के बाद भारत में बड़ी संख्या में मजदूरों और कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी थी। काम बंद होने के बाद देश में आजादी के बाद का सबसे बड़ा पलायन भी देखने को मिला, ऐसे में लॉकडाउन के बाद देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर CMIE ने डाटा जारी कर देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर आंकड़ों को सामने रखा है। सर्वे के अनुसार मार्च के महीनें में लगे लॉकडाउन के बाद अगस्त तक बेरोजगारी की स्थिति को सुधारने में किसी तरह की सफलता सरकार को नहीं मिली है।

बेरोजगारी समेत अन्य समस्याओं को लेकर आकंड़ों का संग्रहण करने वाली CMIE की स्थापना 1976 में की गई थी।CMIE ने मार्च में लगाए गए लॉकडाउन से लेकर अगस्त महीने तक का डाटा जारी कर सरकार को चिंता में डाल दिया है। CMIE की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जनवरी और फरवरी के मुकाबले अगस्त में बेरोजगारी काफी ज्यादा है। जनवरी में जहां बेरोजगारी दर 7.76 फीसदी थी।जो मार्च में 8.75 और अप्रैल में 23.52 तक बढ़ गई थी। उस समय शहरों में 25 प्रतिशत और गांव में 23 प्रतिशत लोग बेरोजगार थे। कोरोना के कारण बेरोजगारी का सबसे ज्यादा असर हरियाणा में पड़ा है।

कोरोना के बाद बेरोजगारी के आंकड़ों में सबसे ज्यादा मार झेलने वाला राज्य हरियाणा है। जहां पर 33.5 फीसदी लोग यानी राज्य का हर तीसरा आदमी बेरोजगार है। इसके बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य त्रिपुरा जहां पर 27 फीसदी लोग बेरोजगार है। वहीं तीसरे नंबर पर 17.5 फीसदी के साथ राजस्थान, 15.8 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश चौथे और 15 फीसदी के साथ पश्चिम बंगाल पांचवे नंबर पर है। जनज्वार ने आंकड़ों के जरिए जनवरी से लेकर अगस्त तक के महीने में बेरोजगारी के आकंड़ों को इकट्ठा कर के आपके सामने रखा है-

किन मानकों के आधार पर बेरोजगारी दर तय की जाता है ?

मुख्य रूप से पांच मानकों को तय करते हुए बेरोजगारी के आकंड़ों को तैयार किया जाता है। जिसमें LF ( LABOUR FORCE), GFR (GREAT LABOUR FORCE), LPR ( LABOUR PARTICIPATION RATE ), UER ( UNEMPLOYMENT RATE), GUER ( GREAT UNEMPLOYMENT RATE) में काम कर रहे लोगों को आंकड़ें में शामिल किया जाता है।

हरियाणा

हरियाणा में अगस्त की तिमाही में सबसे ज्यादा बेरोजगार युवा इसी राज्य में है। यहां पर बेरोजगारी का प्रतिशत 33.5 प्रतिशत है। हरियाणा में 15-19 उम्र वालों में 94 फीसदी और 20-24 उम्र के 73 फीसदी युवा बेरोजगार है। वही हरियाणा के पुरुषों की बात की जाए तो 15-19 उम्रके 92 फीसदीऔर 20-24 उम्र के 69 फीसदी लोगों के पास किसी तरह का काम धंधा नही है। वही महिलाओं की स्थिति पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा खराब है। 15-19 उम्र की महिलाओं में करीब 100 फीसदी 20-24 वर्ष की 97.59 फीसदी महिलाएं अभी भी बेरोजगार है।

पढ़े- लिखे युवाओं को सरकार रोजगार नहीं दे पाई है। करीब 12 वीं पास युवाओं में कुल 8688 लोग है। जिसमें से 49 फीसदी युवा ही रोजगार प्राप्त कर पाए इनमें से से अभी भी 33 फीसदी युवा ऐसे है जिनकी कोरोना वायरस में लगे लॉकडाउन के कारण नौकरी चले जाने के कारण या तो रोजगार की तलाश में है या इन्हें रोजगार प्राप्त ही नहीं है। वही 21 फीसदी ग्रेजुएट युवा अभी भी घरों में बेरोजगार बैठे हुए है।हरियाणा में बेरोजगारी दर की बात की जाए तो लॉकडाउन लगने के बाद यहां पर 43.2 फीसदी लोग बेरोजगार हो गई थे। मई जून जुलाई में थोड़ी स्थिति सुधरने के बाद जुलाई में फिर 33.5 फीसदी बेरोजगारी दर है।

त्रिपुरा

हरियाणा के बाद कोरोना से सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला राज्य त्रिपुरा है। यहां पर 27 फीसदी युवा पूरी तरह से बेरोजगार है। पहले से बेरोजगारी की मार झेल रहा त्रिपुरा को लॉकडाउन ने ओर बेरोजगारी की खाई में डाल दिया। त्रिपुरा में जनवरी के महीने में जहां बेरोजगारी दर 32.7 थी वहीं लॉकडाउनके बाद ये दर बढ़ कर 42 फीसदी तक पहुंच गई। अर्थव्यवस्था खोले जाने के बावजूद यहां पर किसी तरह का कोई सुधार देखने को नहीं मिला है। त्रिपुरा में जुलाई महीने में जहां 18 फीसदी लोग बेरोजगार थे वो अगस्त में 27 फीसदी तक पहुंच गए।

त्रिपुरा में लॉकडाउन के बाद करीब 47 फीसदी 12वी पास और 32 फीसदी ग्रेजुएट युवा बेरोजगार थे। इनमें शहरों में 18 फीसदी पुरुष और 62 फीसदी महिलाएं और ग्रामीण में 17 फीसदी पुरुष और 63 फीसदी महिलाएं बेरोजगार थी।वही 20-24 उम्र के करीब 67 फीसदी युवा शहरों में और 64 फीसदी ग्रामीण इलाकों में बेरोजगार है।

राजस्थान

बेरोजगारी के मामले में तीसरा नंबर राजस्थान का है जहां पर 17.5 फीसदी युवा बेकाम बैठे हुए हैं। लॉकडाउन से पहले जहां 15.2 फीसदी लोग राजस्थान में बेरोजगार थे वहीं लॉकडाउन के बाद ये संख्या 17.7 फीसदी तक पहुंच चुकी थी। हालाकि अनलॉक होने के बाद कुछ सुधार के साथ अगस्त महीने में ये दर कुछ बढ़ कर 17.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है। लेकिन यहां पर भी अच्छा सुधार देखने को नहीं मिला है। राजस्थान में की 26 फीसदी 12वी पास और 22 फीसदी ग्रेजुएट युवा अभी भी बेरोजगार है। वही 20-24 उम्र के 54 फीसदी पुरूष और 94 फीसदी महिलाओं के हाथ में किसी तरह का रोजगार नहीं है।

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी दर की बात की जाए तो अगस्त तक इस राज्य में 15.8 फीसदी लोग हिमाचल में बेरोजगार हो चुके है। इसकी तुलना अगर जनवरी और मार्च के महीने के बाद की जाए तो फरवरी में जहां ये दर 16.8 फीसदी थी। तो लॉकडाउन के बाद बढ़कर 27 फीसदी तक पहुंच चुकी थी। हांलाकि तमाम सुधारों के साथ जुलाई की तुलना में इसमें काफी सुधार देखने को मिला है। जुलाई में जहां 24.3 फीसदी बेरोजगार थे जो अगस्त में आकर 15.8 तक हो चुके है। शिक्षा के स्तर से बात की जाए तो काम में लगे सबसे ज्यादा संख्याबल 12वी पास लोगों की है। जिसमें से 19.38 फीसदी लोग अभी भी बेरोजगार है। वही गेजुएट युवाओं की संख्या 655 है। जिसमें से लगभग 71 फीसदी लोगं काम कर रहे है। इनमें भी 28.36 फीसदी लोग अभी भी बेरोजगार है। वही 60 फीसदी 20-24 उम्र के युवा और 90 फीसदी महिलाएं अभी भी राज्य में बेरोजगार है।

4 महीने में गई 66 लाख पेशेवर लोगों की नौकरी

कोरोना काल में 4 महीनों के अंदर ही 66 लाख पेशेवर लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी की ये स्थिति मई से अगस्त महीने के दौरान पैदा हुई है। बीते 4 महीनों में जिन लोगों पर लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर पड़ा उनमें इंजीनियर, फिजीशियन, टीचर्स, अकाउंटेंट्स समेत कई अन्य पेशे वाले लोग है। आंकड़ों के मुताबिक मई- अगस्त 2019 के दौरान ऐसे 18.8 करोड़ लोग नौकिरयों कर जो जिनकी संख्या 12.2 करोड़ हो चुकी इस दौरान करीब 66 लाख पेशेवर लोगोने अपना रोजगार खाया है।

इससे पहले राहुल गांधी लगातार भाजपा सरकार पर नोटबंदी समेत, गलत तरीके से लगाए गए लॉकडाउन को लेकर सरकार को घेरते रहे है।


राहुल ने 15 सितंबर को ट्वीट करते हुए कहा था कि मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं।तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई।

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