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वैक्सीनेशन के कारण उत्पन्न हो रहे कोरोना के नए वेरिएंट, नोबेल पुरस्कार विजेता ल्यूक मोंटेग्नियर ने किया दावा

Janjwar Desk
21 May 2021 3:00 AM GMT
वैक्सीनेशन के कारण उत्पन्न हो रहे कोरोना के नए वेरिएंट, नोबेल पुरस्कार विजेता ल्यूक मोंटेग्नियर ने किया दावा
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फ़्रांस के वैज्ञानिक ल्यूक मोंटेग्नियर:- टीकों के कारण फैल रही कोरोना महामारी 
महामारी विशेषज्ञ इस बारे में जानते हैं। वायरस के कारण उत्पन्न एंटीबॉडी ही संक्रमण को और प्रभावी बनाने में मददगार होते हैं। जिसे हम कहते हैं एंटीबॉडी डिपेंडेंट एन्हांसमेंट।

जनज्वार ब्यूरो। कोरोनावायरस के नए वेरिएंट्स ने सभी लोगों की चिंता बड़ा दी है । ऐसे समय में जब कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन के ऊपर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है वैक्सीनेशन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। फ्रांस के नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक व वायरोलॉजिस्ट ल्यूक मोंटेगनियर ने कहा है कि कोरोना वायरस के नए वेरिएंट वैक्सीनेशन के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। प्रोफेसर मोंटेग्नियर को एचआईवी की खोज के लिए वर्ष 2008 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने पेरिस के पाश्चर इंस्टिट्यूट व चीन की संघाई यूनीवर्सिटी में अपनी सेवायें दी हैं।

ल्यूक मोंटेग्नियर का कहना है, टीकाकरण के कारण ही कोरोना के नये वैरीएंट उत्पन्न हो रहे हैं। मोंटेग्नियर ने यह खुलासा इस महीने के शुरुआत में दिए एक साक्षात्कार में किया है। यह लंबा साक्षात्कार होल्डअप मीडिया पर लिया गया है। इसकी क्लिप को अमेरिका के आरएआईआर फाउंडेशन ने इंग्लिश में ट्रांसलेट किया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

अस्वीकार्य वैज्ञानिक और मेडिकल गलती

मोंटेग्नियर से सवाल पूछा जाता है कि टीकाकरण शुरू होने के बाद से जनवरी से नए मामले और मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं, खासतौर पर युवाओं में। इस पर आप क्या कहते हैं? इसके जवाब में मोंटेग्नियर ने कहा यह एक ऐसी वैज्ञानिक व मेडिकल गलती है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसे इतिहास में दिखाया जाएगा। क्योंकि टीकाकरण ही नए वेरिएंट उत्पन्न कर रहा है। चीनी वायरस के लिए एंटीबॉडी है जो वैक्सीन से आती है तो वायरस क्या करता है? मर जाता है? या कोई और रास्ता ढूंढता है?

आगे जवाब में वे कहते हैं तब नए तरह के वेरिएंट्स उत्पन्न होते हैं।और यह टीकाकरण का परिणाम है। आप देख सकते हैं यह हर देश में एक जैसा ही है। टीकाकरण का ग्राफ मौत के ग्राफ के साथ चल रहा है। मैं करीब से इसका अनुसरण कर रहा हूं। मैं संस्थान में मरीजों के साथ प्रयोग कर रहा हूं। जो वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए हैं। इससे पता चलता है कि वह ऐसे वैरीअंट बना रहे हैं जिन पर वैक्सीन कम प्रभावी है।

एंटीबॉडी डिपेंडेंट एन्हांसमेंट के कारण होता है ऐसा-

टीकाकरण की आवश्यकता से संबंधित एक दूसरा सवाल पूछे जाने पर वे कहते हैं- बहुत से लोग इस बारे में जानते हैं लेकिन वह चुप हैं। महामारी विशेषज्ञ इस बारे में जानते हैं। वायरस के कारण उत्पन्न एंटीबॉडी ही संक्रमण को और प्रभावी बनाने में मददगार होते हैं। जिसे हम कहते हैं एंटीबॉडी डिपेंडेंट एन्हांसमेंट। जब होस्ट सेल में कोई एंटीबॉडी वायरस को प्रवेश करने से रोकती है तो वायरस अपने प्रति रूप में बदलाव करता है, इसके लिए फाइगोसायटिक का इस्तेमाल करता है। इसी बदलाव को म्यूटेशन कहा जाता है और परिणाम स्वरूप वायरस का नया वेरिएंट सामने आता है । जिसका मतलब है एंटीबॉडीज एक निश्चित तरह के संक्रमण में मददगार होते हैं।

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