अंधविश्वास

भुवनेश्वर-बरहामपुर में तर्कवादियों पर हमले में शामिल धार्मिक चरमपं​थियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग, प्रगतिशीलता को बढ़ावा दे सरकार

Janjwar Desk
13 Nov 2022 7:54 AM GMT
भुवनेश्वर-बरहामपुर में तर्कवादियों पर हमले में शामिल धार्मिक चरमपं​थियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग, प्रगतिशीलता को बढ़ावा दे सरकार
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Odisha News : तर्कवादी ( rationalist ) सूर्य और चंद्र ग्रहण के दिन सरकारी अवकाश के पटनायक सरकार के फैसले को जीवन और समाज के प्रति तर्कहीन और अवैज्ञानिकता को बढ़ावा देने वाला मानते हैं।

Odisha News : पांच दिन दिन पहले यानि आठ नवंबर को ओडिशा ( Odisha ) की राजधानी भुवनेश्वर ( Bhuvneshwar ) और बरहामपुर ( Berhampur ) सहित कई स्थानों पर धार्मिक चरमपंथियों ( religious extremist ) ने तर्कवादी समूहों ( rationalist ) पर हमला बोला था। इस हमले में कई लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद से ओडिशा के तर्कवादी संगठनों से जुड़े लोगों के बीच असंतोष चरम पर है। इन संगठनों ने चरमपंथियों के हमले की घोर निंदा की है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

यह घटना 8 नवंबर, 22 यानि चंद्र ग्रहण के दिन की है। उस दिन तथाकथित स्वयंभू हिंदू चरमपंथियों ( religious extremist ) के एक समूह ने भुवनेश्वर में लोहिया अकादमी के साथ-साथ ओडिशा के बेरहामपुर शहर में तथाकथित परंपरा की रक्षा के लिए तर्कवादियों की आंतरिक बैठक पर बेवजह हमला किया। तर्कवादियों का कहना है कि हमला नापाक था। यह हमला न केवल सूर्य या चंद्र ग्रहण की अवधि के दौरान भोजन न करने के समर्थन में बल्कि जीवन और समाज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के खिलाफ है। इतना ही नहीं, चरमपंथियों ने ऐसा कर संविधान की मूल भावनाओं का भी उल्लंघन किया है।

दरअसल, आठ नवंबर को तर्कवादियों के अलग-अलग समूहों द्वारा ओडिशा के अलग-अलग शहरों में चंद्र ग्रहण के समय दावतों का आयोजन किया था। तर्कवादियों के इस दावत को परंपरावादियों ने हिंदू धर्म की मान्यताओं के खिलाफ माना था। इतना ही नहीं, चरमपंथियों ने समूह में भुवनेश्वर और बरहामपुर में आयोजित तर्कवादियों के दावतों पर हमला भी बोला था।हमलावरों ने ऐसा चंद्रग्रहण के समय दावत के आयोजन को धार्मिक प्रथाओं के खिलाफ मानते हुए किया।

हमला : प्रगतिशील सोच को खत्म करने वाला

वैसे तो हिंदू धर्म में कई विविधताएं और प्रवृत्तियां हैं लेकिन गुंडों का यह हमला पंचांग और ज्योतिषियों के काम को शीर्ष पर स्थापित करने के लिए मजबूर करने वाला है। यह हमला हमारे समाज के प्रगतिशील दृष्टिकोण को भी खत्म करने के लिए है। बता दें कि ओडिशा सरकार ने राज्य सरकार द्वारा सूर्य ग्रहण यानि 25 अक्टूबर 2022 को अवकाश की घोषणा की थी। सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों, राजस्व न्यायालयों, बैंकों और अन्य बैंकिंग संस्थानों को सूर्य ग्रहण के कारण बंद करने का निर्देश दिया था। इसका मतलब सूर्य ग्रहण के दिन हिंदू धार्मिक परंपराओं हांडी छड़ा (खाना पकाना) का पालन सभी को करना था।

सरकार के इस फैसले को तर्कवादियों ने जीवन और समाज के प्रति तर्कहीन और अवैज्ञानिकता को बढ़ावा देने वाला माना। साथ ही अंधविश्वास और कट्टरता को बढ़ावा देने और समाज को विभाजित करने वाला बताया था। तर्कवादियों का कहना है कि तर्कहीन धार्मिक गुंडे इससे पहले नरेंद्र दावोलकर, एमएम कुलबर्गी, गोविंद पनसरे, गौरी लंकेश आदि व्यक्तित्व की हत्या की घटना को अंजाम दे चुके हैं।

Odisha News : क्या है मामला

हिंदू परंपरा में सूर्य ग्रहण ( Solar eclipse ) और चंद्र ग्रहण ( Lunar eclipse ) के खान-पान वर्जित है। देश के लगभग सभी हिस्सों में इस परंपरा का लोग निर्वहन करते हैं। ओडिशा में सूर्य ग्रहण के दिन सरकारी अवकाश की घोषणा भी राज्य सरकार ने की थी। इस लिहाज से परंपरा का पालन करना सरकारी आदेश जैसा था। दूसरी तरफ तर्कवादी सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय कुछ नहीं खाने की बात को अंधविश्वास और अवैज्ञानिकता से जोड़कर देखते हैं। वह मानते हैं कि सूर्य और चंद्र ग्रहण की अवधि में भोजन करने का मानव शरीर या स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं है। इसके पीछे तर्कवादियों का कहना है कि अतीत में हिंदू समाज में व्याप्थ इन्हीं बुराईयों को दूर करने के लिए ईश्वरचंद्र विद्यासागर, राममोहन राय, ज्योतिबा फुले, सावित्री फुले, पेरियार, भीमा भोई, अम्बेडकर जैसे कई शख्सियतों ने भारतीय समाज के विभिन्न तर्कहीन उपयोगों को सुधारने की कोशिश की थी। यही वजह है कि तर्कवादी चंद्र और सूर्य ग्रहण के दिन खुले स्थान पर 'सामूहिक भोज' ओडिशा में आयोजित करते हैं। इस बार भी उन्होंने दावत का आयोजन किया था। ऐसा तर्कवादी समूह से जुड़े लोग इस धारणा के तहत करते हैं कि भोजन करने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। यदि ऐसा होता तो तर्कवादियों को सबसे पहले नुकसान होता, क्या उनका इरादा था। इसके अलावा बुद्धिवादी राज्य में मरणोपरांत 'देहदान', डायन शिकार आदि के विरुद्ध अभियान भी चला रहे हैं। लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन के हिस्से के रूप में GASS ने हमेशा उनकी भूमिका का समर्थन किया है।

अंधविश्वास को बढ़ावा देने से दूर रहे सरकार

अब गणतांत्रिक अधिकार सुरक्षा संगठन ओडिशा के अध्यक्ष गोलक बिहारी नाथ और महासचिव देबारंजन ने ओडिशा सरकार से अपील की है कि इस तरह के धार्मिक दृष्टिकोण से बचना चाहिए। राज्य और धर्म के संबंध में संवैधानिक दिशा बनाए रखनी चाहिए। बहारी और देबारंजन ने सरकार से इन गुंडों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया है। इससे एक खुले और प्रगतिशील समाज का निर्माण करने में मदद मिलेगी।

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