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कोविड -19

कोरोना की भयावहता के बीच ऑक्सफ़ोर्ड के टीके का परीक्षण रुका, पूरी ​दुनिया को लगा झटका

Janjwar Desk
11 Sep 2020 7:10 AM GMT
कोरोना की भयावहता के बीच ऑक्सफ़ोर्ड के टीके का परीक्षण रुका, पूरी ​दुनिया को लगा झटका
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file photo

आक्सफोर्ड के टीके के परीक्षण को इंग्लैंड और फिर भारत समेत पूरी दुनिया में फिलहाल रोक दिया गया है, यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि इस टीके का इंतज़ार पूरी दुनिया बेसब्री से कर रही है...

जनज्वार संवाददाता। कोविड 19 का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है, बल्कि भारत जैसे देशों में तो हरेक दिन रिकॉर्ड संक्रमण हो रहा है, और हरेक दिन इससे 1100 से भी अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो रही है। पूरी दुनिया इसके टीके की आस में बैठी है और दुनियाभर में दर्जन भर से अधिक कम्पनियां इसके टीके के परीक्षण के चरण में हैं।

रूस और चीन जैसे देशों ने बिना पर्याप्त परीक्षण किये ही टीकों को बनाने का दावा कर दिया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्वीकृति नहीं दी गई है। परीक्षण के दौर में जितने टीके हैं उनमें सबसे चर्चित ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका नामक कंपनी द्वारा संयुक्त तौर पर विकसित किया जाने वाला टीका है, जिसका तीसरे और अंतिम चरण का परीक्षण भारत समेत दुनिया के अनेक देशों में किया जा रहा है।

सभी परीक्षण पूरे करने के बाद उम्मीद है कि सबसे पहले यही टीका दुनिया में उपलब्ध होगा। हमारे देश के प्रतिष्ठित सीरम इंस्टिट्यूट को इसके उत्पादन का काम दिया गया है।

एस्ट्राज़ेनेका के टीके के तीसरे और अंतिम चरण का चरण का परीक्षण दुनियाभर में 50000 से 60000 लोगों पर किया जा रहा है, और अब तक इसके नतीजे भी अच्छे मिले हैं। पर 9 सितम्बर को इसके परीक्षण को इंग्लैंड और फिर भारत समेत पूरी दुनिया में फिलहाल रोक दिया गया है। यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि इस टीके का इंतज़ार पूरी दुनिया बेसब्री से कर रही है।

परीक्षण को फिलहाल रोकने का कारण इंग्लैंड की एक महिला जिसपर टीके का परीक्षण किया जा रहा था, उसका गंभीर बीमारी से पीड़ित होना बताया गया है। उस महिला को संभवतः रीढ़ की हड्डी के अन्दर फैले तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित कोई गंभीर बीमारी परीक्षण के दौरान हो गई है। इसीलिए परीक्षण रोककर उसके रोग का अध्ययन किया जा रहा है, फिर यह अध्ययन किया जाएगा कि उसकी बीमारी स्वाभाविक है या फिर टीके के कारण है और फिर पूरी जांच की रिपोर्ट एक स्वतंत्र कमेटी के सामने प्रस्तुत की जायेगी। यह कमेटी सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद निर्णय लेगी कि परीक्षण फिर से कब शुरू करना है।

ऐसे कारणों से टीके के परीक्षण कुछ दिनों के लिए रोक देना एक सामान्य प्रक्रिया है, और एस्ट्राज़ेनेका को पहले चरण के परीक्षण के दौरान भी कुछ समय के लिए विराम लगाना पड़ा था। परीक्षण में शरीक महिला को तंत्रिका तंत्र की जो बीमारी हुए है, वह बीमारी दुसरे रोगों के टीके के परीक्षण के आरंभिक चरण में देखी जा चुकी है। वर्ष 2018 में वैज्ञानिकों के एक दल ने पिछले 30 वर्षों के दौरान विकसित टीके के परीक्षणों के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया था।

इन अध्ययनों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि इसी प्रकार का रोग हेपेटाइटिस बी के टीके के परीक्षण के दौरान भी कुछ लोगों को हुआ था। पर, दूसरे टीकों और कोविड 19 के टीके का बुनियादी फर्क यह है कि दूसरे टीके लम्बी अवधि में तैयार किये गए और इन पर पूरी दुनिया की निगाह नहीं थी, पर कोविड 19 एक नया रोग है जो पूरी दुनिया में फैला हुआ है इसलिए दुनियाभर को टीके का इंतज़ार है और इसका विकास अपेक्षाकृत अल्प अवधि में करने की मजबूरी है।

एस्ट्राज़ेनेका के चीफ एग्जीक्यूटिव पास्कल सोरिओट को उम्मीद है कि जल्दी ही इसका परीक्षण फिर से शुरू कर दिया जाएगा और इस वर्ष के अंत तक या अगले वर्ष के शुरू तक यह टीका उपलब्ध हो जाएगा। यदि सारी स्वीकृति मिल गई तो कोविड 19 के तीन अरब टीके बनाये जायेंगे। अगले वर्ष के आरम्भ तक शायद भारत, अमेरिका और फ्रांस में विक्सित किया जाने वाला टीका भी उपलब्ध हो जाएगा।

इस बीच इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रमुख ने कहा है कि दुनिया भर की करीब 8 अरब आबादी तक एक बार थी टीके पहुंचा पाना कार्गो कंपनियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। अनुमान है कि दुनियाभर में टीके को पहुंचाने के लिए 8000 जम्बोजेट की जरूरत पड़ेगी, और इस टीके के लिए एक वेशेष तापमान की जरूरत होगी जिसमें सभी विमान सक्षम नहीं होंगे।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार दुनियाभर की सरकारों और कार्गो कंपनियों को अभी से ही टीके को समय पर मंगाने के लिए प्रभावी योजना बनाने की जरूरत है।

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