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अब रेलवे इंजीनियरिंग कंपनी IRCON की हिस्सेदारी बेचने की फिराक में मोदी सरकार

Janjwar Desk
9 Nov 2020 4:35 AM GMT
अब रेलवे इंजीनियरिंग कंपनी IRCON की हिस्सेदारी बेचने की फिराक में मोदी सरकार
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मोदी सरकार ना-ना कहते हुए लगातार रेलवे के निजीकरण की दिशा में कदम बढा रही है। ट्रेनों के संचालन में प्राइवेट पार्टी की भागीदारी के बाद अब रेलवे की इंजीनियरिंग कंपनी की हिस्सेदारी को सरकार बेचने की तैयारी में है...

जनज्वार। केंद्र सरकार रेलवे की इंजीनियरिंग कंपनी IRCON इंटरनेशनल लिमिटेड की 15% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के जरिए होगी। मौजूदा समय में IRCON इंटरनेशनल में सरकार की 89.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

मनी भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि हम दिसंबर तक OFS के जरिए IRCON की हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, यह बिक्री बाजार के हालात पर निर्भर करेगी। अधिकारी ने बताया कि बिक्री की जाने वाली हिस्सेदारी 10 से 15% की रेंज में हो सकती है।

रेलवे की इंजीनियरिंग सब्सिडियरी IRCON इंटरनेशनल की 2018 में शेयर बाजारों में लिस्टिंग हुई थी। IPO के जरिए IRCON ने 467 करोड़ रुपए जुटाए थे। शुक्रवार को BSE में IRCON इंटरनेशनल का शेयर 77.95 रुपए प्रति यूनिट पर बंद हुआ था। ताजा शेयर प्राइस के आधार पर IRCON की 15% हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को 540 करोड़ रुपए मिलेंगे।

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.10 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य तय किया है। इसमें 1.20 लाख करोड़ रुपए सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) की हिस्सेदारी बेचकर जुटाए जाएंगे। वहीं, 90 हजार करोड़ रुपए वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी बिक्री से जुटाए जाएंगे। इसमें LIC की 10% हिस्सेदारी बिक्री भी शामिल है।

चालू वित्त वर्ष में CPSE की हिस्सेदारी बिक्री से अब तक सरकार को 6,138 करोड़ रुपए मिले हैं। कोविड-19 महामारी के कारण सरकार भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री नहीं कर पा रही है। इसके अलावा इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया भी चल रही है। इन दोनों कंपनियों की बिक्री भी OFS के जरिए की जानी है।

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