Bhagwat Geeta In Gujarat School : गुजरात के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाएगी भगवत गीता, राज्य के शिक्षा मंत्री बोले- 'भारतीय संस्कृति' को मिलेगा बढ़ावा

(गुजरात के सभी स्कूलों में पढ़ायी जाएगी भगवत गीता )
Bhagwat Geeta In Gujarat School : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात (Gujarat) के सभी स्कूलों में अब भगवत गीता को अनिवार्य कर दिया गया है। गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वघानी (Jeetu Vaghani) ने कहा है कि भगवत गीता कक्षा छह से बारह तक के छात्रों को सिखायी जाएगी।
खबरों के मुताबिक, भगवत गीता (Bhagwat Geeta) को स्कूल के सिलेबस का अनिवार्य हिस्सा बनाने के पीछे भारतीय संस्कृति और ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देना है। यह कदम आगामी शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 से गुजरात के स्कूलों में लागू होने की उम्मीद है।
समाचार एजेंसी एशिया न्यूज इंटरनेशनल (ANI) की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के शिक्षा मंत्री वघानी ने कहा है कि भगवत गीता का परिचय भागों में किया जाएगा। कक्षा छह से आठ तक के लिए इस पवित्र पाठ को पाठ्य पुस्तकों में कहानी और पाठ के रूप में पेश किया जाएगा। कक्षा नौ से बारह तक के लिए इसे पहली भाषा की पाठ्य पुस्तक में कहानी और पाठ के रूप में पेश किया जाएगा।
गुजरात के स्कूलों में सिलेबस में भगवत गीता रखने के लिए इस नए विचार के बारे में अधिक बता करते हुए वघानी ने कहा कि भगवत गीता के पाठ को प्रार्थना कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि नई अध्ययन सामग्री की शुरूआत के साथ कदम आगे बढाया जाएगा। यह संभावना है कि पाठ्य पुस्तकों को या तो नया रूप दिया जाएगा या नई किताबों को पेश किया जाएगा जो पूरी तरह से भगवत गीता से जानकारी प्राप्त करने पर केंद्रित होंगी।
गुजरात में सरकार के इस फैसले पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने टिप्पणी की है। सिसोदिया ने कहा कि मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं ये एक अच्छा फैसला है। लेकिन जो लोग इसे लेकर आए हैं, उन्हें पहले अपने जीवन में गीता का अनुसरण करना चाहिए। उसके बाद ही ऐसा कोई फैसला लेना चाहिए।
गुजरात सरकार ने स्कूलों में भगवत गीता को पढ़ाने का फैसला ऐसे समय में लिया है जब कुछ महीनों पर राज्य चुनाव की तरफ बढ़ रहा है। इसलिए भी विपक्ष भी नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस नेता रहमान खान ने कहा कि इसमें भाजपा का स्वार्थ निहित है। हर धार्मिक पुस्तक धर्म सिखाती है, आप यह नहीं कह सकते हो कि यह केवल गीता है जो धर्म या भारतीय संस्कृति सिखाती है। अगर ऐसा है तो सभी धार्मिक पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।











