JNU Violence Updates : तो मेस वार्डन की सलाह को न मानना कावेरी के छात्रों के लिए साबित हुआ बैड संडे!

JNU Violence Updates : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कावेरी हॉस्टल ( Cauvery Hostels ) के कुछ छात्र अगर समझदारी का परिचय देते तो 10 अप्रैल को हिंसक ( JNU Violence ) घटनाएं शायद न न होती। खास बात यह है कि हिंसक घटनाओं की आशंकाओं को भांपते हुए मेस वर्डन ने छात्र सचिव को एक दिन पहले यानि रविवार को नॉन वेज मेन्यू में न शामिल न करने का सुझाव दिया था, लेकिन नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए उस पर अमल करने से इनकार कर दिया गया।
मेस वार्डन ने दिया था ये सुझाव
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( JNU News ) कावेरी छात्रावास के मेस सचिव को एक वार्डन का संदेश मिला था। अपने संदेश में मेस वार्डन ने कहा था कि रविवार को मेस में मांसाहारी भोजन नहीं परोसा जाना चाहिए। इस बाबत संपर्क किए जाने पर मेस वार्डन गोपाल राम ने पुष्टि की कि उन्होंने शनिवार को इस संबंध में मैसेज किया था, लेकिन उन्होंने कहा कि यह छात्रों के बीच किसी भी तरह की "झगड़े" से बचने के लिए एक "सुझाव" था। छात्रावास का मेन्यू मेस समिति द्वारा तय किया जाता है। एक निर्वाचित छात्र निकाय इसे तय करती है। इसमें वार्डन की कोई भूमिका नहीं होती है।
वार्डन गोपाल राम ने कहा कि जो छात्र रामनवमी पूजा करना चाहते थे, उन्होंने अनुरोध किया कि रविवार को नॉन-वेज न पकाया जाए तो अच्छा होगा। अन्य लोग नॉन-वेज चाहते थे क्योंकि यह मेनू में निर्धारित था। चूंकि, मैं एक्टिंग मेस वार्डन हूं, इसलिए मैंने पूछा कि अगर नॉन-वेज को दूसरे दिन शिफ्ट किया जा सकता है, तो यह टकराव से बचने का सबसे अच्छा तरीका होगा। वह एक सुझाव था, उन पर दबाव बनाने के लिए कोई निर्देश या लिखित आदेश नहीं।
गोपाल राम ने यह पूछे जाने पर कि क्या हवन किए जाने का कोई विरोध हुआ था, उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कुछ छात्रों ने ऐसा किया था। यह पूछे जाने पर कि क्या समारोह के लिए अनुमति ली थी। उन्होंने कहा कि हमसे कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इफ्तार पार्टी के लिए भी अनुमति नहीं ली गई थी। उन्हें अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन नहीं ली।
मेस सचिव ने वार्डन से लिखित में मांगा सुझाव
मेस सचिव रागीब ने कहा कि उन्हें परिसर के एक शिक्षक और वार्डन गोपाल राम का संदेश मिला था। मुझसे कहा गया था कि मांसाहारी भोजन नहीं बनाना चाहिए, केवल शाकाहारी खाना चाहिए। हमारे मेस मेन्यू के मुताबिक बुधवार, शुक्रवार और रविवार को नॉनवेज बनाया जाता है। मैंने उससे कहा कि अगर वह इसमें बदलाव चाहता है तो वह मुझे लिखित में दे दे। उन्होंने लिखित में देने से मना कर दिया। नॉनवेज खाने वाले 300 छात्रों में 170-180 छात्र हैं।
जीबीएम की नहीं हुई थी बैठक
रागिब ने एबीवीपी ( ABVP ) के इस दावे का भी खंडन किया कि एक सप्ताह पहले एक आम सभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि रविवार को रामनवमी का दिन होने की वजह से मांसाहार नहीं परोसा जाएगा। अगर कोई जीबीएम था, तो उसके कुछ पोस्टर या जीबीएम के कुछ मिनट होने चाहिए। ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी। हम महीने की शुरुआत में पूरे महीने के लिए मेन्यू तय करते हैं। यह दिन-प्रतिदिन के आधार पर तय नहीं होता है।
तो ये है मामला
वहीं एनएसयूआई कावेरी छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि वह रामनवमी पूजा में शामिल हुए थे। यह बिना किसी समस्या के आयोजित किया गया था। किसी ने इसका विरोध नहीं किया। मैंने भी इसमें शिरकत की और बाद में प्रसाद खाया। समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने चिकन देने आए वेंडर को भगा दिया गया।
एबीवीपी ने नॉन वेज परोसने का किया था विरोध
जेएनयूएसयू ( JNUSU ) ने आरोप लगाया है कि एबीवीपी के सदस्यों ने रामनवमी के दिन मांसाहार परोसने पर विद्यार्थियों और मेस कर्मियों पर हमला किया जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध छात्र संगठन ने कहा कि वामपंथियों ने रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में की जा रही पूजा को बाधित किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई के अध्यक्ष रोहित कुमार ने सोमवार को कहा कि सात दिन पहले कावेरी छात्रावास मेस समिति की आम सभा की बैठक बुलाई गई थी जिसमें सर्वसम्मति से फैसला किया गया था कि रविवार को रामनवमी के अवसर पर छात्रावास के मेस में मांसाहारी व्यंजन नहीं पकेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम छात्रों ने भी फैसले पर सहमति जताई थी। तीन दिन पहले जब रामनवमी पूजा का पोस्टर साझा किया गया तो वामपंथी समूह के विद्यार्थियों ने मांस और हड्डियां फेंक पूजा को बाधित करने की धमकी दी थी।
दूसरी तरफ कावेरी मेस के सचिव राघिब ने एबीवीपी के दावे से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि आम सभा की बैठक बुलाने के लिए 24 घंटे पहले फैसला किया जाता है। इसके लिए लिखित दस्तावेज होता है और उसपर हस्ताक्षर होता है। क्या वे उस दस्तावेज को दिखा सकते हैं? कावेरी छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि मेस का मेन्यू पहले से ही तय होता है और इसे अंतिम समय में नहीं बदला जा सकता है। एबीवीपी के सदस्य रविवार दोपहर दो बजे से ही मांस की आपूर्ति करने वाले का प्रवेश रोकने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें कह रहे थे कि मांस की आपूर्ति नहीं करने दी जाएगी। एबीवीपी वालों ने नॉन वेज लाने वाले वेंडर को उसे वापस जाने को कहा था।
वार्डन और डीन ऑफ स्टूडेंट्स ने विद्यार्थियों से कहा कि यह उनका अपना मामला है। यह परिपाटी है कि मेस में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन अलग-अलग पकाया जाता है, लेकिन वे अपने खाने की पसंद थोपना चाहते थे। शाम को जब पूजा हुई तो सभी ने प्रसाद लिया और इफ्तार भी शांतिपूर्ण तरीके से बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ। कुमार ने कहा कि शाम साढ़े सात बजे से रात नौ बजे तक विद्यार्थी रोजाना मेस में खाना खाने आते हैं।
मेन्यू को अचानक नहीं बदला जा सकता
JNU Violence Updates : बात दें कि रविवार यानि 10 अप्रैल को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ( JNU News) के कावेरी छात्रावास ( Cauvery Hostels ) में मांसाहार परोसे जाने को लेकर विद्यार्थियों के दो गुटों में हुई झड़प हुई थी। एक गुट का कहना था कि रामनवमी की वजह से मांसाहार को न परोसा जाए। इसके जवाब में मेस के प्रतिनिधियों ने सोमवार को कहा कि मेन्यू पहले से ही निर्धारित होता है और अंतिम समय में व छात्रावास में रहने वालों की सहमति के बिना उसे नहीं बदला जा सकता है। इस पर विवाद बढ़ गया और एबीवीपी और जेएनयूएसयू के बीच हिंसक ( JNU Violence ) झड़प हुई, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। नॉन वेज को लेकर घटित हिंसक घटना के बाद से विवाद अभी थमी नहीं है। वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्रों ने एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए हैं। धरना-प्रदर्शन का सिलसिला भी जारी है। वामपंथी छात्र संगठन से जुड़े लोग इस मुद्दे पर आज भी प्रदर्शन करेंगे।











