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शिक्षा

UGC : अब बिना डिग्री और यूजीसी नेट के विश्वविद्यालयों में बन सकेंगे प्रोफेसर, विशेषज्ञों की होगी सीधी नियुक्ति, जानिए पूरी जानकारी

Janjwar Desk
23 Aug 2022 8:08 PM IST
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UGC : अब बिना अकादमिक डिग्री और यूजीसी नेट के भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रोफेसर बन सकेंगे, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है...

UGC : अब बिना अकादमिक डिग्री और यूजीसी नेट के भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रोफेसर बन सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों के महारथी शैक्षिक योग्यता के बिना भी प्रोफेसर बनकर दो साल तक सेवाएं दे सकेंगे। बात दें कि इसमें गायक, नृतक, उद्योग, समाजसेवी से लेकर अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। आईआईटी और आईआईएम में पहले से प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना लागू है।

UGC की बैठक में 3 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

इसके तहत इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ देश के इन सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 18 अगस्त को यूजीसी की बैठक आयोजित हुई थी। इसमें तीन प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। बात दें कि इसमें सबसे प्रमुख प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को मंजूरी के बाद अब विश्वविद्यालयों में नेट और पीएचडी के बगैर भी प्रोफेसर बनकर सेवाएं देने का रास्ता खुल गया है।

जानिए वर्तमान में क्या है नियम

बता दें कि अभी तक यूजीसी से मान्यता प्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्यों के विश्वविद्यालयों समेत डीम्ड -टू-बी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने के लिए शैक्षिक योग्यता में नेट और पीएचडी होना जरूरी है। हालांकि, इस प्रस्ताव के बाद अपने-अपने क्षेत्रों के महारथी भी पढ़ाई करवा सकेंगे। हालांकि उनकी नियुक्ति के लिए यूजीसी ने मानक तय किए हैं।

ऑटोनॉमस कॉलेज का दर्जा देने के नियमों में बदलाव

साथ ही ऑटोनॉमस कॉलेज यानी स्वायत्त कॉलेज का दर्जा देने के नियमों में बदलाव किया गया है। अभी तक यूजीसी की टीम निरीक्षण के आधार पर कॉलेजों को स्वायत्त होने का दर्जा देती है लेकिन नए नियम के तहत यूजीसी की टीम अब निरीक्षण नहीं करेगी। बता दें कि नैक की टीम छह मानकों पर कॉलेजों की जांच करेगी, उसी के आधार पर उन्हें स्वायत्त का दर्जा मिलेगा। वहीं, अब स्वायत्त कॉलेज का दर्जा पांच के बजाय 10 साल तक मान्य रहेगा।

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