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WHO के बाद IMA ने भी उठाए सवाल, महाराष्ट्र में कोरोनिल की बिक्री पर लगी पूर्ण पाबंदी

Janjwar Desk
23 Feb 2021 1:56 PM GMT
WHO के बाद IMA ने भी उठाए सवाल, महाराष्ट्र में कोरोनिल की बिक्री पर लगी पूर्ण पाबंदी
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अनिल देशमुख ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी सक्षम स्वास्थ्य संगठन जैसे डब्ल्यूएचओ या आईएमए से उचित प्रमाण मिले बिना कोरोनिल को महाराष्ट्र में बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुम्बई। बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ द्वारा निर्मित कोविड-19 की कथित दवा कोरोनिल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सवाल उठाने के अगले ही दिन महाराष्ट्र में कोरोनिल की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस बात की जानकारी महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने दी है।

अनिल देशमुख ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी सक्षम स्वास्थ्य संगठन जैसे डब्ल्यूएचओ या आईएमए से उचित प्रमाण मिले बिना कोरोनिल को महाराष्ट्र में बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्री अनिल देशमुख ने आईएमए की आपत्तियों का भी जिक्र किया।

गौरतलब है कि डब्लूएचओ का कोरोनिल से पल्ला झाड़ने के बाद आईएमए ने भी कोरोनिल के कथित क्लीनिकल ट्रायल पर सवाल उठाया है। डब्ल्यूएचओ ने इसके कोरोना के इलाज में प्रभावी होने का प्रमाण पत्र देने के पतंजलि आयुर्वेद के दावे को खारिज कर दिया है। इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने पत्र जारी कर जल्दबाजी में किसी दवा को लॉन्च करना और दो केंद्रीय मंत्रियों द्वारा उसका प्रचार करना खेदजनक बताया है।

पतंजलि आयुर्वेद द्वारा निर्मित कोरोना की दवा को बीती शुक्रवार 19 फरवरी को बाबा रामदेव ने एक बार फिर से लॉन्च किया था। इसम मौके पर दो केंद्रीय मंत्री जिसमे स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन सहित सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में बाबा रामदेव ने दावा किया कि उनकी दवा को डब्ल्यूएचओ ने प्रमाणित किया है और इसे 158 देशों में बिक्री की अनुमति दी है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कोरोनिल को लेकर दुनिया के प्रतिष्ठित जर्नल में अब तक 9 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

यह विवाद डब्ल्यूएचओ के जारी बयान जिसमें कहा गया था कि 'इस तरह की किसी भी पारम्परिक दवा को कोरोना वायरस के इलाज के लिए सर्टिफिकेट नहीं दिया' के बाद विवाद शुरू हो गया है। डब्लूएचओ के आये बयान के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी रामदेव की दवा पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रचार करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। आईएमए ने एक आधुनिक डॉक्टर होने के नाते डॉ हर्षवर्धन द्वारा किसी दवा का प्रचार करने को अनैतिक भी बताया है।

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