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सोशल मीडिया के कारण अभी समाज में जितना बिखराव, उतना नहीं देखा गया पहले कभी : रचनात्मकता को प्रभावित करता है स्मार्टफ़ोन

Janjwar Desk
3 Jan 2023 6:13 AM GMT
सोशल मीडिया के कारण अभी समाज में जितना बिखराव, उतना नहीं देखा गया पहले कभी : रचनात्मकता को प्रभावित करता है स्मार्टफ़ोन
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दुनिया में 5.11 अरब लोग मोबाइल का उपयोग करते हैं, इन्टरनेट का उपयोग 4.39 अरब, सोशल मीडिया का उपयोग 3.48 अरब लोग करते हैं, दुनिया में 3.26 अरब लोग अपने स्मार्टफोन पर ही सोशल मीडिया से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया की पहुँच दुनिया के लगभग सभी देशों में है। दुनिया में औसतन लोग दिनभर में 6 घंटे 43 मिनट इन्टरनेट का इस्तेमाल करते हैं और 2 घंटे 16 मिनट सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं....

महेंद्र पाण्डेय की टिप्पणी

Smartphone reduces original creativity of addicted users. चीन के वैज्ञानिकों के एक दल ने अपने अध्ययन में बताया है कि स्मार्टफ़ोन का अत्यधिक उपयोग मनुष्य की मौलिक रचनात्मकता को कम कर देता है और धीरे-धीरे ख़त्म कर देता है। इस अध्ययन को सोशल कौग्निटीव एंड अफेक्टिव न्यूरोसाइंस नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

स्मार्टफ़ोन के असंख्य फायदे गिनाये जाते हैं - इससे पूरी दुनिया की जानकारी हमेशा हमारे पास रहती है, हम हमेशा दुनिया से जुड़े रहते हैं, हम कभी अकेले नहीं पड़ते, हम कभी उबते नहीं। कहा तो इन्हें फायदा जाता है, पर इससे एक बड़ा नुकसान भी है। यदि हम स्मार्टफ़ोन का बहुत उपयोग करते हैं तो हमारा मस्तिष्क सही मायने में खाली नहीं रहता, हम कभी केवल अपने साथ या अपने परिवेश के साथ नहीं होते।

वैज्ञानिकों के इस दल ने अपने अध्ययन को 18 से 25 वर्ष के 48 लोगों पर किया था। इसमें आधे लोग अपने स्मार्टफ़ोन का लगातार उपयोग करते थे और शेष आधे इसका कम इस्तेमाल करते थे। इन्हें दो समूहों में विभाजित कर इनके मौलिक रचनात्मकता का परीक्षण किया गया। इसके साथ ही इनके मस्तिष्क के प्रीफ्रोंटल कोर्टेक्स और टेम्पोरल हिस्से का विस्तृत अध्ययन न्यूरोइमेजिंग द्वारा किया गया।

मस्तिष्क के प्रीफ्रोंटल कोर्टेक्स और टेम्पोरल हिस्से ही मनुष्य की रचनात्मकता को नियंत्रित करते हैं। इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि स्मार्टफ़ोन का अत्यधिक उपयोग करने वालों में मस्तिष्क के रचनात्मकता प्रभावित करने वाले हिस्से अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहते हैं। स्मार्टफ़ोन का अत्यधिक उपयोग करने वाले लोगों को प्रवाह, लचीलापन और मौलिकता के परीक्षण में कम अंक मिले थे।

समाज वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक लम्बे समय से बताते रहे है कि मनुष्य की मौलिक रचनात्मकता एकाकीपन से होने वाले तथाकथित उबाऊ माहौल की देन होती है। इसे हम भले ही बेकार समय आंते हों, पर जब आप शांत भाव से फुर्सत में बिना किसी विषय पर ध्यान केन्द्रित कर बैठे होते हैं तभी आप रचनात्मक होते हैं। मार्क मैकजीनियस ने एक बार कहा था – स्मार्टफ़ोन के बाद से आप कभी एकाकी नहीं होते, उबाऊ माहौल में नहीं रहते तब संभव है यह आपकी रचनात्मकता की मृत्यु का समय हो।

ऑस्ट्रेलिया के आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार स्मार्टफोन के उपयोग के आधार पर आपके व्यक्तित्व की सही जानकारी दी जा सकती है। पहले भी इस तरह के दावे किये गए हैं, पर उनका आधार आप कितनी देर और कितनी बार दिन में स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, या फिर आप किस तरह के मैसेज करते हैं, रहा है। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का आधार स्मार्टफोन में लगे ऐक्सेलेरोमीटर हैं, जिनसे आप गति वाले गेम्स खेलते हैं या फिर आप कितने कदम दिनभर में चले, यह जानते हैं। इन वैज्ञानिकों के अनुसार विभिन्न व्यक्तित्व वाले लोगों की शारीरिक गतिविधियाँ अलग-अलग तरीके से होतीं हैं।

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक फ्लोरा सलीम के अनुसार हम किस गति से और कितनी दूर तक टहलते हैं, हम दिन या रात में कब फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं, इन सबकी जानकारी के बाद किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की सही जानकारी दी जा सकती है। इन वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के दौरान पांच प्रमुख प्रकार के व्यक्तित्व – बहुर्मुखी, खुलापन, आसानी से सहमत होने वाले, कर्त्तव्यनिष्ठ और मनोविक्षुब्ध – का अध्ययन किया।

दुनिया में 5.11 अरब लोग मोबाइल का उपयोग करते हैं, इन्टरनेट का उपयोग 4.39 अरब, सोशल मीडिया का उपयोग 3.48 अरब लोग करते हैं, दुनिया में 3.26 अरब लोग अपने स्मार्टफोन पर ही सोशल मीडिया से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया की पहुँच दुनिया के लगभग सभी देशों में है। दुनिया में औसतन लोग दिनभर में 6 घंटे 43 मिनट इन्टरनेट का इस्तेमाल करते हैं और 2 घंटे 16 मिनट सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार जो लोग हरेक शाम एक जैसी दूरी तय करते हैं, वे अंतर्मुखी होते हैं जबकि हरेक दिन बदलाव वाली दूरी से उनके बहुर्मुखी होने का पता चलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब आप एक जैसी दूरी तय करते हैं, इसका मतलब यह है की आप नए लोगों से मिलना नहीं चाहते और एक जैसी सामाजिक जिन्दगी जीते हैं जबकि रोज दूरी बदलने का मतलब है आप नए-नए लोगों से मिलना और बातें करना पसंद करते हैं।

जब आप सप्ताह में हरेक दिन अलग-अलग दूरी तय करते हैं और शाम को अधिक व्यस्त रहते हैं, इसका सीधा सा मतलब है कि आप जल्दी ही लोगों से सहमत हो जाते हैं और आपकी अपनी राय कोई मतलब नहीं रखती। अध्ययन के अनुसार मनोविक्षुब्ध महिलायें, जो अधिक संवेदनशील और बैचैन रहती हैं सुबह अपने फ़ोन के साथ एक निश्चित गति से एक जैसी दूरी तय करतीं हैं।

स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के जरिये आज भले ही विश्व की आबादी का बड़ा हिस्सा, इतिहास के किसी भी दौर की तुलना में, अधिक संख्या में एक दूसरे से जुड़ा है पर वास्तविकता यही है कि समाज में इसी सोशल मीडिया के चलते आज जितना बिखराव है वह पहले किसी दौर में नहीं रहा। अब लोग एक दूसरे से मिलते नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मैसेज करते हैं। लोग अपने समाज को छोड़कर एक आभासी समाज का हिस्सा हो गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि एक दूसरे से लगातार मैसेज के माध्यम से जुड़े रहने वाले लोग भी आमने सामने मिलने पर बात नहीं कर पाते, लोगों की बातें करने की आदत धीरे-धीरे कम हो रही है। मैसेज करने की आदत ने लोगों की भाषा भी बदल डाली है।

ऐसे में इसका प्रभाव लोगों के व्यक्तित्व और रचनात्मकता पर भी पड़ रहा है। आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के अध्ययन से आपके सामान्य व्यक्तित्व का तो पता चलता है, पर इसमें जो अंतर आ रहा है इसका पता नहीं चलता। वैज्ञानिकों को जल्दी ही परम्परागत व्यक्तित्व से अलग हट कर नए व्यक्तित्व को भी तलाशना होगा क्योंकि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लोगों के व्यवहार को तेजी से बदलता जा रहा है।

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