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स्वास्थ्य

लगातार बढ़ रही हेल्थ एंग्जायटी, जनस्वास्थ्य चिकित्सक ने बताया डिजिटल डिटॉक्स क्यों है जरूरी !

6 Feb 2026 6:44 PM IST
लगातार बढ़ रही हेल्थ एंग्जायटी, जनस्वास्थ्य चिकित्सक ने बताया डिजिटल डिटॉक्स क्यों है जरूरी !
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Digital Anxiety : लगातार नकारात्मक, डरावनी और स्वास्थ्य संकटों से भरी खबरों को देखते रहने से चिंता और मानसिक थकान (Mental fatigue) बढ़ रही है। इसमें चम्पू और गोदी मीडिया का बड़ा योगदान है...

जनस्वास्थ्य चिकित्सक डॉ. एके अरुण की टिप्पणी

Digital Anxiety : डिजिटल माध्यमों के कारण लोगों में 'हेल्थ एंग्जायटी' बढ़ने की खबरें लगातार आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में डिजिटल माध्यमों के कारण 'हेल्थ एंग्जायटी' (स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक चिंता) एक महामारी की तरह बढ़ रही है।

भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में डिजिटल एडिक्शन और इससे जुड़ी मानसिक समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई है। 2026 में हेल्थ एंग्जायटी के प्रमुख डिजिटल कारण निम्नलिखित हैं :

AI वियरेबल्स और डेटा ओवरलोड

आज के समय में फिटनेस ट्रैकर और स्मार्टवॉच अब हृदय गति,ऑक्सीजन स्तर और तनाव (Stress) का निरंतर डेटा देते हैं। स्वस्थ लोगों द्वारा भी इस डेटा की अति-निगरानी उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि कहीं कुछ गलत तो है, जिससे लोगों में "डिजिटल हेल्थ एंग्जायटी" बढ़ रही है।

डूम स्क्रॉलिंग (Doom scrolling)

लगातार नकारात्मक, डरावनी और स्वास्थ्य संकटों से भरी खबरों को देखते रहने से चिंता और मानसिक थकान (Mental fatigue) बढ़ रही है। इसमें चम्पू और गोदी मीडिया का बड़ा योगदान है।

गलत सूचना (Misinformation)

सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारियों का प्रसार अनावश्यक डर और घबराहट पैदा करता है।

स्व-निदान (Self-diagnosis) और AI

लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय AI और इंटरनेट सर्च के आधार पर बीमारी के लक्षणों का खुद ही विश्लेषण करते हैं, जो अक्सर मामूली समस्याओं को भी गंभीर बीमारी के रूप में दिखाने लगता है। यह एक खतरनाक ट्रेंड है।

सोशल तुलना (Social Comparison)

सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट' फिटनेस और लाइफस्टाइल को देखकर युवाओं में अपनी शारीरिक स्थिति को लेकर हीन भावना और एंग्जायटी विकसित हो रही है। यह भी सेहत के लिए हानिकारक है।

नींद में व्यावधान

रात में देर तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन प्रभावित होता है, जिससे नींद की कमी होती है और मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इन प्रभावों को कम करने के लिए विशेषज्ञ डिजिटल वेल-बीइंग (Digital Wellbeing) और स्क्रीन-टाइम मैनेजमेंट को अपनाने की सलाह है। (हील इनिशिएटिव)

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