स्वास्थ्य

कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट क्यों है इतना खतरनाक, वैक्सीन की दोनों डोज कब असरदार और कब बेअसर ?

Janjwar Desk
14 Aug 2021 9:11 AM GMT
कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट क्यों है इतना खतरनाक, वैक्सीन की दोनों डोज कब असरदार और कब बेअसर ?
x

(सीडीसी और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डेल्टा वायरस सामान्य कोरोना वायरस से कई गुना तेजी से फैलता है।)

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लगभग समाप्ति के साथ-साथ ही डेल्टा वैरिएंट ने अपनेआप में फिर से थोड़ा बदलाव कर लिया जिससे ये पहले से थोड़ा और ज्यादा खतरनाक बन गया....

मोना सिंह की रिपोर्ट

जनजवार। कोरोना वायरस के नए रूप डेल्टा प्लस वैरिएंट ने खतरे की दस्तक दे दी है। पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र में डेल्टा वैरिएंट से मरने वालों की संख्या 3 हो गई है। हाल में ही मुंबई के रायगढ़ में इस नए वैरिएंट से 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हुई है। इसकी पुष्टि रायगढ़ की कलेक्टर निधि चौधरी ने मीडिया से की है। इससे पहले महाराष्ट्र के ही घाटकोपर में 63 वर्षीय महिला और रत्नागिरी में 80 वर्षीय महिला की डेल्टा वैरिएंट से मौत की पुष्टि हो चुकी है।

रायगढ़ में महिला की हुई मौत में एक बहुत ही चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दरअसल, इस महिला को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थी। इसके बाद भी 21 जुलाई को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

24 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुईं और 27 जुलाई को मौत हो गई। 11 अगस्त को राज्य स्वास्थय विभाग ने मौत के पीछे डेल्टा वैरिएंट की वजह की पुष्टि की। इससे आप समझ सकते हैं कि डेल्टा प्लस वैरिएंट वाकई में बहुत खतरनाक है।

क्या है डेल्टा वैरिएंट

हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने भारत में किस कदर तबाही मचाई। इस लहर के लिए डेल्टा वैरिएंट को जिम्मेदार माना गया था। दरअसल, डेल्टा वैरिएंट कोरोना वायरस का ही थोड़ा बदला हुआ रूप है।

अब समझते हैं कि कोरोना वायरस और इसका बदला हुआ रूप डेल्टा वैरिएंट आखिर है क्या चीज़। कोरोना प्रोटीन और RNA से बना वायरस है। अब इसके खिलाफ जब तमाम वैक्सीन आने लगीं। तब इसने खुद को बचाए रखने के लिए अपने प्रोटीन में बदलाव कर लिया। इसे ही साइंस में म्यूटेशन कहते हैं। इस बदलाव से वो पहले से ज्यादा खतरनाक बन गया। प्रोटीन में बदलाव के बाद जो नया वायरस बना उसे ही डेल्टा वैरिएंट का नाम दिया गया।

ऐसे पड़ा नाम

कोरोना वायरस के नए-नए नाम कैसे तय किए जाते हैं। अब इसे भी समझ लीजिए। दरअसल, डेल्टा वैरिएंट से पहले तीन और वैरिएंट आए थे। इनके नाम थे अल्फा, बीटा और गामा। लेकिन ये वैरिएंट इतने खतरनाक नहीं थे। इसलिए इनका नाम चर्चा में नहीं आया था।

दरअसल, ये नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने दिए थे। WHO ग्रीक वर्णमाला के 14 अक्षरों का नए-नए वैरिएंट के नाम के लिए प्रयोग कर रहा है। उसी वर्णमाला का चौथा शब्द डेल्टा है। अल्फा, बीटा और गामा के बाद डेल्टा नाम दिया गया। इसी डेल्टा के ज्यादा खतरनाक रूप को डेल्टा प्लस वैरिएंट नाम दिया गया है। डेल्टा वैरिएंट नाम का पहली बार इस्तेमाल 31 मई 2021 को किया गया था।

क्यों इतना ख़तरनाक है डेल्टा वैरिएंट

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेल्टा वायरस सामान्य कोरोना वायरस से कई गुना तेजी से फैलता है। और कोरोना से ज्यादा संक्रामक भी है। उदाहरण के लिए ओरिजिनल कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति अगर 2 और व्यक्तियों में इंफेक्शन यानी संक्रमण फैलाता है तो डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति दो से तीन गुना ज्यादा यानी 5 से 6 लोगों को संक्रमित कर सकता है। जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी है उनमें ये संक्रमण और तेजी से फैलेगा।

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल की एक रिसर्च के अनुसार, वैक्सीन की दो डोज ले चुके स्वास्थ्यकर्मी भी डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित हो रहे हैं। कोरोना वायरस की तरह डेल्टा वैरिएंट से प्रभावित लोगों में भी सर्दी, खांसी, बुखार, सिरदर्द, सूंघने और स्वाद पहचानने की क्षमता खत्म हो जाती है। इस संक्रमण की वजह से फेफड़े खराब हो जाते हैं। और ये सीधे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र यानी एंटीबॉडी पर हमला करता है।

जिससे हमारा शरीर दूसरे रोगों से लड़ने की क्षमता में कमजोर हो जाता है। या ये कहें कि डेल्टा वैरिएंट और डेल्टा प्लस जैसे वैरिएंट हमारी इम्यूनिटी को पूरी तरह से ख़त्म कर देते हैं। जिस वजह से अगर किसी को पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो उसकी मौत जल्दी हो जाती है। इसलिए वैक्सीन की दोनों डोज है जरूरी

सर गंगा राम अस्पताल की रिसर्च रिपोर्ट ये बताती है कि कोरोना वैक्सीन लेने पर संक्रमित होने का खतरा कम तो होता ही है साथ ही साथ हॉस्पिटल में भर्ती होने पर जान जाने का खतरा भी कम हो जाता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं है तो। इसलिए टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है।

रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने पर भी यह जरूरी नहीं है की व्यक्ति संक्रमित नहीं होगा। भारत में कोविशील्ड और को-वैक्सीन ज्यादातर टीकाकरण के लिए उपयोग में लाई जा रही है।

वैक्सीन कितनी असरदार, जानें

NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, कोविशील्ड की एक डोज 36 प्रतिशत और दो डोज से 75 प्रतिशत बचाव संभव है। जबकि को-वैक्सीन के 1 डोज से 30 प्रतिशत और दो डोज से 65 प्रतिशत तक बचाव संभव है। इस तरह अगर दोनों डोज लगी है तो हॉस्पिटल में भर्ती होने और जान जाने के खतरे दोनों में 90 से 96 प्रतिशत तक कम आ जाती है।

इसके अलावा स्पूतनिक-वी को डेल्टा वैरिएंट पर 90 प्रतिशत तक प्रभावी है। जबकि ये कोरोना वायरस के खिलाफ 92% प्रभावी है। मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन भी डेल्टा वैरिएंट पर प्रभावी है। लेकिन ये अभी भारत में उपलब्ध नहीं है।

डेल्टा वैरिएंट का बदला रूप है डेल्टा प्लस वैरिएंट

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लगभग समाप्ति के साथ-साथ ही डेल्टा वैरिएंट ने अपनेआप में फिर से थोड़ा बदलाव कर लिया। जिससे ये पहले से थोड़ा और ज्यादा खतरनाक बन गया। इस नए बदले हुए डेल्टा वैरिएंट को ही डेल्टा प्लस वैरिएंट का नाम दिया गया है। भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न (Varient of concern) कहा है। ये भारत में आने वाली तीसरी लहर का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट के अब तक 50 मरीज भारत में मिल चुक हैं। इनकी पहचान अभी तक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में हुई है। 13 अगस्त तक महाराष्ट्र में तीन की मौत की पुष्टि भी हो चुकी है।

डेल्टा प्लस वैरिएंट के लक्षण डेल्टा वैरिएंट की तरह ही होते हैं। डेल्टा प्लस फेफड़ों को पहले के वायरस की तुलना में और तेजी से खराब कर देता है। इसके साथ ही हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को बहुत तेजी से नष्ट कर देता है। इसलिए जिन दवाओं और स्टेरॉइड से डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीजों का इलाज अब तक हो रहा था, वे दवाएं डेल्टा प्लस वैरिएंट पर बेअसर साबित हो रहीं हैं।

भारत समेत 9 देशों में नया वैरिएंट, रहें अलर्ट

लेकिन अगर वैक्सीन या टीके की 2 डोज ली हुई है तो संक्रमण से बचाव संभव है। इसके साथ इंसान की बेहतर इम्यूनिटी भी जरूरी है। अब तक भारत समेत 9 देशों में डेल्टा प्लस वैरिएंट मिलने की पुष्टि हुई है। इसमें यूएस, यूके, चीन, नेपाल, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल शामिल हैं।

डेल्टा प्लस वैरिएंट पर भी भारत में उपलब्ध वैक्सीन असरदार हैं। डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट से बचाव के लिए जरूरी है कि वैक्सीन या टीके के दोनों डोज जरूर लें। और पहले की तरह अलर्ट रहें। मास्क लगाएं और समय-समय पर हैंड वॉश करें। इसके साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भोजन जरूर लें ताकि शरीर में रोगों से लड़ने वाली प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जा सके।

Next Story

विविध

Share it