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बड़ा खुलासा : फेसबुक और भाजपा में है सांठ-गांठ, जानबूझ कर नहीं हटाई जातीं साम्प्रदायिक पोस्ट

Janjwar Desk
17 Aug 2020 7:43 AM GMT
बड़ा खुलासा : फेसबुक और भाजपा में है सांठ-गांठ, जानबूझ कर नहीं हटाई जातीं साम्प्रदायिक पोस्ट
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(file photo) 

जब बीजेपी नेताओं ने मुसलमानों द्वारा जान-बूझकर कोरोनावायरस फ़ैलाने, देश के खिलाफ साज़िश रचनेऔर हिन्दू औरतों से शादी रचा कर 'लव जिहाद' अभियान चलाने सम्बन्धी पोस्ट डालीं तो इस फेसबुक ने नहीं की कोई कार्रवाई...

नेवले पुर्नेल और जेफ़ हॉर्विट्ज़ की रिपोर्ट

भारत के राजनेता टी राजा सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट्स में और जनता के बीच भी यह बात कही है कि अप्रवासी रोहिंगिया मुसलमानों को गोली मार दी जानी चाहिए, उन्होंने मुसलमानों को देशद्रोही कहा और मस्जिदों को ध्वस्त करने की धमकी भी दी।

facebook कंपनी के वे कर्मचारी इन पोस्ट्स पर नज़र बनाये हुए थे जिन पर कंपनी की नीतियों को तय करने का ज़िम्मा है। इस साल मार्च महीने में वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि श्रीमान सिंह ने ना केवल कंपनी की नफरत पैदा करने वाली भाषा सम्बन्धी नियमों का उल्लंघन किया था, बल्कि खतरनाक होने का दर्ज़ा भी हासिल कर लिया था। यह दर्ज़ा हासिल करने का मतलब है कि फेसबुक ऐसे व्यक्ति की फेसबुक प्लेटफॉर्म से इतर गतिविधियों का भी जायजा लेता है। फेसबुक के उन वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने यह जानकारी दी है जो इससे अवगत रहे हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि सांप्रदायिक हिंसा और हालिया धार्मिक तनाव के भारत के इतिहास को देखते हुए उसकी आलंकरिक भाषा वाकई समाज में हिंसा पैदा कर सकती है, इसलिए उसे दुनियाभर में फैले कंपनी के सभी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित कर देना चाहिए। कंपनी के वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों के अनुसार इस तरह का दंड अमेरिका में रेडिओ होस्ट अलैक्स जोन्स, नेशन ऑफ़ इस्लाम के नेता लुइ फर्रखान और आस्था को सर्वोपरि मानने वाले अनेक श्वेत संगठन।

इस सबके बावजूद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिन्दू राष्ट्रीय पार्टी का यह सदस्य अभी भी फेसबुक और इंस्ट्राग्राम में सक्रिय है जहां इसके सैकड़ों-हज़ारों फॉलोवर्स हैं। कंपनी के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि भारत में कंपनी की जनसंबन्धी नीतियों को देखने वाली कार्यकारी अधिकारी आँखी दास ने टी राजा सिंह और कंपनी द्वारा रेखांकित किये गए हिंसा को बढ़ावा देने वाले तीन अन्य हिन्दू राष्ट्रवादी व्यक्तियों या समूहों के खिलाफ नफरत फ़ैलाने वाली भाषा के इस्तेमाल संबंधी नियमों को लागू करने से इंकार कर दिया था।

वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि आँखी दास ने अपने साथ के कर्मचारियों से कहा कि मोदी की पार्टी के किसी राजनेता द्वारा किये गए नियमों के उल्लंघन में उसे सजा देने का मतलब है भारत में फेसबुक के व्यापारिक हितों को नुकसान पहुँचाना क्योंकि यूज़र्स की संख्या के हिसाब से फेसबुक के लिए भारत दुनिया की सबसे बड़ी बाजार है। ग़ौरतलब है कि आँखी दास की ज़िम्मेदारी फेसबुक की तरफ से भारत सरकार में लॉबिंग करना भी थी।

निस्संदेह दुनियाभर में फैले इसके प्लेटफॉर्म्स पर डाले जाने वाले संदेशों की भारी संख्या के चलते नफरत फ़ैलाने वाली पोस्ट्स पर नज़र बनाये रखना फेसबुक के लिए भारी चुनौती है। हालाँकि भारत के हिन्दू राष्ट्रवादियों के सन्दर्भ में इसने जिस तरह अपने नफरत फ़ैलाने वाले वक्तव्यों सम्बन्धी नियमों का पालन किया है उससे दिखाई पड़ता है कि इस जोड़-तोड़ में राजनीतिक हितों का भी ध्यान रखा जाता है।

"फेसबुक में मूल समस्या यह है कि प्लेटफॉर्म सम्बन्धी नीतिगत फैसले लेना और सरकारों को खुश करना दोनों काम एक ही व्यक्ति या विभाग देखता है।" यह बात मई महीने में ट्विटर पर फेसबुक के पूर्व मुख्य सुरक्षा अधिकारी और अब स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेट ऑब्ज़र्वेटरी के निदेशक एलेक्स स्टेमॉस ने लिखी थी। उनका इशारा वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे उस लेख की तरफ था, जिसमें कहा गया था कि फेसबुक के अधिकारी अमेरिका में इस प्लेटफॉर्म को कम भेदभाव करने वाला बनाने में कंपनी के भीतरी प्रयासों को रोक देते हैं, जबकि आम चिंता यह रहती है कि किये जाने वाले बदलाव को एक तरफ़ा समझा जा सकता है। फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी विभाग में काम करने वालों ने कहा कि वे स्टेमॉस के दावे से इत्तफ़ाक रखते हैं।

फेसबुक की छपने वाली सामग्री सम्बंधित नीतियां लगातार अमेरिका में एक बड़ा मुद्दा बनी हुयी हैं, जहाँ कंपनी पर लगातार राजनीतिक पक्षपात करने का आरोप मढ़ा जाता है। हाल ही में कुछ बहुत बड़े विज्ञापन दाताओं ने इसके द्वारा नफरत फ़ैलाने वाली सामग्री को ठीक से संचालित ना करने के कारण इसके प्लेटफॉर्म का बहिष्कार कर दिया था।

सोशल मीडिया पर मोदी के साथ भारत में फेसबुक की कार्यकारी अधिकारी आंखी दास का यह फोटो हो रहा वायरल

वहीं फेसबुक का कहना है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में हिंसा भड़काने के लिए वो अपने प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करता है। कंपनी के मुख्य अधिकारी मार्क ज़ुकरबर्ग अमेरिका में अपने कर्मचारियों और विज्ञापनदाताओं को इस बात के लिए आश्वस्त करते रहे हैं कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हिंसा भड़काने या लोकताँत्रिक प्रक्रिया में रूकावट डालने में नहीं होने देगी।

मई महीने में राष्ट्रपति ट्रंप की ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में पूछने पर ज़ुकरबर्ग ने कहा था, "लोगों को समझ जाना चाहिए कि फेसबुक पर राजनेता क्या कहते हैं लेकिन हर बात की सीमा होती है और हम उसका पालन करवाएंगे।"

फेसबुक के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि श्री सिंह की तरफ से सुश्री दास का हस्तक्षेप फेसबुक द्वारा मोदी की भारतीय जनता पार्टी और हिन्दू कट्टरवादियों के प्रति पक्षपात करने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

फेसबुक के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने यह स्वीकार किया कि सुश्री दास ने श्री सिंह को एक खतरनाक व्यक्ति घोषित किये जाने के राजनीतिक दुष्परिणामों के बारे में चिंता जताई थी, लेकिन साथ में यह भी कहा कि उनका विरोध अकेला कारण नहीं था श्री सिंह के प्लेटफॉर्म पर बने रहने का। प्रवक्ता ने कहा कि अभी भी फेसबुक प्रतिबंध पर विचार कर रहा है।

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि "किसी की भी राजनीतिक हैसियत या राजनीतिक दल के साथ जुड़ाव पर तवज्जो दिए बगैर" फेसबुक दुनियाभर में नफरती भाषा और हिंसा पर प्रतिबन्ध लगाती है। उसने बताया कि इस साल के शुरुआत में नयी दिल्ली में भयानक विरोध-प्रदर्शन के दौरान इसने प्लेटफॉर्म पर से वो सामग्री हटा ली जो हिंसा पैदा कर सकती थी।

ना तो आँखी दास, ना ही श्रीमान सिंह और उनके राजनीतिक दल भाजपा के प्रवक्ता ने वक्तव्य के लिए हमारी गुज़ारिश को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

मुख्य बाज़ारों की राजनीतिक वास्तविकताओं से मेल खाने के लिए फेसबुक कभी-कभी अपनी नीतियों में फेरबदल करती है। उदहारण के तौर पर, अमेरिका या किसी और देश की तुलना में जर्मनी में फेसबुक नफरती भाषा सम्बन्धी कहीं ज़्यादा कठोर नियमों को लागू करने के लिए तैयार हो गयी। अपने एशियाई कामकाज के गढ़ सिंगापुर में तो यह उन न्यूज़ स्टोरीज़ के साथ "सुधार नोटिस" नत्थी करने को तैयार हो गई है, जिन्हें सरकार झूठा मानती है। वियतनाम में गैर-कानूनी मानी जाने वाली मतभेद रखने वाली सामग्री तक पहुँच को नियंत्रित रखने को यह तैयार हो गयी, लेकिन बदले में इसने फेसबुक के स्थानीय सर्वर में अड़ंगा डालने की सरकारी प्रवृत्ति को ख़त्म करने का आश्वासन हासिल कर लिया। गौरतलब है कि सर्वर में अड़ंगा डालने की सरकारी प्रवृत्ति के चलते फेसबुक के प्लेटफॉर्म की गति बहुत धीमी हो गयी थी।

फेसबुक के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है। एक अरब से ज़्यादा जनसंख्या वाला दूसरा देश चीन है, लेकिन चीन में काम करने की अनुमति फेसबुक को नहीं है। किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप यूज़र्स सबसे ज़्यादा हैं। फेसबुक ने इसे एक ऐसे बाजार के रूप में चुना है जहाँ वो भुगतान, एन्क्रिप्शन और ऐसी पहलकदमी की शुरुआत कर सके जिससे वो अपने उत्पादों को एक साथ उन नए तरीकों से बाँध सके जो बकौल ज़ुकरबर्ग अगले दस सालों तक फेसबुक को सक्रिय रक्खे।

अप्रैल माह में फेसबुक ने कहा था कि भारत में अपना धंधा बढ़ाने के लिए फेसबुक एक भारतीय टेलकम ऑपरेटर के साथ जोड़ी बनाकर 5.7 बिलियन डॉलर्स खर्च करेगी। यह इसका सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा।

चीन के साथ तनाव के बीच जून महीने में भारत ने एक चीनी वीडियो ऐप टिकटॉक पर प्रतिबन्ध लगा दिया। फेसबुक ने भी भारतीय रेगुलेटर्स की तरफ से प्रतिरोध का सामना किया है।

"फ्री बेसिक्स" नामक एक मुफ्त फेसबुक केंद्रित दूरसंचार सेवा मुहैय्या कराने का फेसबुक का प्रस्ताव 2016 में इस आधार पर रोक दिया गया था कि ये नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन करता है। नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इन्टरनेट पर हर यूजर के साथ समानता का व्यवहार किया जाये। अर्थात सभी यूजर्स को सोशल मीडिया, ईमेल, वॉइस कॉल, ऑनलाइन शॉपिंग और यूट्यूब वीडियो जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए इन्टरनेट की एक समान स्पीड और एक्सेस उपलब्ध हो।

देशभर में व्हाट्स ऐप भुगतान लॉन्च करने की फेसबुक की योजना सरकारी हरी झंडी के अभाव में दो साल से अटकी पड़ी है।

एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि आँखी दास ने 2011 में फेसबुक में काम करना शुरू किया था। भारत और दक्षिण एवं केंद्रीय एशिया में जनता के लिए बनायीं जाने वाली नीतियों वाले विभाग की प्रमुख होने के नाते वो उस टीम का नेतृत्व करती है जो यह तय करती है कि प्लेटफॉर्म पर क्या सामग्री जाएगी।

उस पूर्व कर्मचारी ने बताया कि जब बीजेपी नेताओं ने मुसलमानों द्वारा जान-बूझकर कोरोनावायरस फ़ैलाने की, देश के खिलाफ साज़िश रचने की और हिन्दू औरतों से शादी रचा कर 'लव जिहाद' अभियान चलाने सम्बन्धी पोस्ट डालीं तो इस टीम ने कोई कारवाई नहीं की।

वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सुश्री दास ने बीजेपी को चुनाव सम्बन्धी मुद्दों पर अनुकूल माहौल दिया।

फेसबुक के पूर्व कर्मचारियों के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में भारत के आम चुनाव के लिए मतदान होने के कुछ दिनों पहले फेसबुक ने घोषणा करी कि उसने पाकिस्तान की सेना और भारतीय जनता पार्टी की मुख्य विरोधी कांग्रेस पार्टी से जुड़े अप्रमाणित पेजों को हटा लिया है। लेकिन फेसबुक ने यह नहीं बताया कि इसने उन पेजों को भी हटा दिया जिनमें बीजेपी से जुडी झूठी ख़बरें दी गयी थीं। ऐसा सुश्री दास के हस्तक्षेप से किया गया था

2017 में आँखी दास ने मोदी की तारीफ करते हुए एक निबंध लिखा था। इसमें फेसबुक के खड़ा अंगूठा वाले लोगों को भी दर्शाया गया था। इसे मोदी की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया और मोदी के मोबाइल ऐप की शोभा भी बढ़ाता रहा।

खुद के फेसबुक पेज पर सुश्री दास ने एक पूर्व पुलिस अधिकारी की पोस्ट शेयर की जिसमें वो कहता है कि वो मुसलमान है, जिसमें वो भारत के मुसलमानों को पारम्परिक रूप में एक ऐसा "पतित समुदाय" कहता है, जिसके लिए "मज़हब की पवित्रता और शरिया को लागू करने" के अलांवा कुछ मायने नहीं रखता है।

सुश्री दास ने लिखा- पोस्ट ने "पिछली रात मुझसे बात की। इसे "बाकी भारत से भी बात करनी चाहिए।"

बीजेपी विधायक राजा सिंह द्वारा अपने मुस्लिम-विरोधी भाषणों और "गद्दारों" को खदेड़ने के लिए सतर्कता सेना के गठन के लिए किये जा रहे तथाकथित प्रयासों की तेजी ने राष्ट्र का ध्यान आकर्षित किया है। उसने फेसबुक का इस्तेमाल यह कहने के लिए किया है कि जो मुसलमान हिन्दुओं द्वारा पूजी जाने वाली गाय को मारता है उसकी भी बलि वैसे ही दी जानी चाहिए। उसने नंगी तलवार के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट की है जिसमें लिखित शब्दों में यह घोषणा की गयी है कि हिन्दुओं का अस्तित्व मुसलमानों के खिलाफ गैर-कानूनी कदम उठाने पर ही निर्भर है। श्री सिंह के अपने फेसबुक पेज और उनके समर्थकों के पेजों पर 4 लाख फॉलोवर्स हैं।


वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि फेसबुक की सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि श्री सिंह की आलंकरिक भाषा मांग करती है कि फेसबुक की "खतरनाक व्यक्ति एवं संगठन" नीति के तहत विधायक जी को स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाये। अमेरिका में रिचर्ड स्पेंसर जैसे आस्था को सर्वोपरि मानने वाले श्वेत पर लागू की गयी यह नीति कंपनी के कठोरतम दंड को अंजाम देती है। और यह दंड है प्लेटफॉर्म से निष्कासन।

जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने फेसबुक से श्री सिंह की पोस्ट्स के बारे में जानकारी चाही तो फेसबुक ने उनकी कुछ पोस्ट्स को हटा दिया। इसने कहा कि श्री सिंह को अब आधिकारिक सत्यापित खाता रखने की अनुमति नहीं है। उसे एक नीले रंग की पट्टी से सुशोभित कर दिया गया।

बीजेपी के एक सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने अपने फेसबुक पेज पर ऐसे निबंध और कार्टून डाले हैं जो आरोप लगाते हैं कि" कोरोना जिहाद" छेड़ने के षड्यंत्र के तहत मुसलमान देश में कोविड-19 फैला रहे हैं। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ऐसे निराधार आरोप, जो खुद भी फेसबुक के नफरती भाषण सम्बन्धी नियमों का उल्लंघन हैं, हिंदुस्तान में मुसलमानों पर आक्रमण से जोड़े जाते हैं और जिन्हें ट्विटर इंक द्वारा नफरती भाषण का खिताब दिया गया है।

ऐसी पोस्ट के चलते जबकि ट्विटर ने हेगड़े का एकाउंट कुछ समय के लिए बंद (सस्पेंड) कर दिया, जिसका हेगड़े ने कंपनी की जाँच की मांग कर विरोध भी किया लेकिन फेसबुक ने उस समय तक कोई कारवाई नहीं की जब तक वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हेगड़े के "कोरोना जिहाद " पोस्ट के बारे में कंपनी से वक्तव्य की मांग नहीं की। पिछले बृहस्पतिवार को फेसबुक ने कुछ पोस्ट्स को हटाया है। सांसद हेगड़े ने वक्तव्य देने की गुज़ारिश का कोई जवाब नहीं दिया।

फरवरी में बीजेपी के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने अपने भाषण में पुलिस को धमकी देते हुए कहा था कि अगर वो मुसलमानों को ना शामिल करने वाले नागरिकता विधेयक के खिलाफ धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को नहीं हटाते हैं तो फिर उसके समर्थक ज़बरदस्ती ऐसा करेंगे।

इस वीडियो सन्देश को कपिल मिश्रा द्वारा फेसबुक पर डाले जाने के कुछ घंटों के भीतर ही दंगे भड़क गए, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए। मरने वाले ज़्यादातर मुसलमान थे। पुलिस द्वारा दाखिल किये गए और भारतीय अख़बारों में छपे कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार दंगे में मुसलमानों की हत्याओं की कुछ घटनाएँ फेसबुक के व्हाट्सऐप के माध्यम से आयोजित की गयी थीं

जून के महीने में टाउनहॉल में हुई कर्मचारियों की बैठक में ज़ुकरबर्ग ने बिना नाम लिए कपिल मिश्रा की पोस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी राजनेता से इस तरह का व्यवहार प्लेटफॉर्म बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके बाद कंपनी ने उस वीडियो पोस्ट को हटा लिया।

कपिल मिश्रा ने स्वीकार किया कि फेसबुक ने वीडियो हटा लिया है, हालाँकि उसने यह भी कहा कि वीडियो से कोई दंगा नहीं भड़का। उसने कहा कि उसकी पोस्ट्स नफरती भाषण की श्रेणी में नहीं आती हैं। उसका यह भी कहना था कि वो मानता है कि फेसबुक ना ही उसे और ना ही बीजेपी को तरजीह देती है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा प्रतिक्रिया मांगे जाने पर फेसबुक ने कपिल मिश्रा की कुछ पोस्ट्स हटा लीं।

फेसबुक के मालिकाना हक़ वाले एनालिटिक्स टूल 'क्राउड टैंगल' से हासिल डाटा बताता है कि कपिल मिश्रा का वीडियो पोस्ट होने के 2 महीने के भीतर ही कपिल मिश्रा के फेसबुक पेज को देखने वालों की संख्या प्रति माह 2 लाख से बढ़ कर 25 लाख तक पहुँच गईं।

(यह लेख पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित, हिंदी में पहली बार इसे जनज्वार ने अनूदित कर प्रकाशित किया है।)

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