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Femicide – Another Global Pandemic: विश्वव्यापी समस्या है महिलाओं की ह्त्या

Janjwar Desk
3 Oct 2021 7:17 AM GMT
Femicide – Another Global Pandemic: विश्वव्यापी समस्या है महिलाओं की ह्त्या
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Femicide – Another Global Pandemic: हमारी दुनिया में जब एक समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि पहले से अधिक विकराल होती जाती है तब उस समस्या से ध्यान भटकाने के लिए उसे एक नए कलेवर में प्रस्तुत किया जाता है|

महेंद्र पाण्डेय

Femicide – Another Global Pandemic: हमारी दुनिया में जब एक समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि पहले से अधिक विकराल होती जाती है तब उस समस्या से ध्यान भटकाने के लिए उसे एक नए कलेवर में प्रस्तुत किया जाता है| 1970 के दशक से दुनिया वायु प्रदूषण और महिला अधिका रों (women empowerment and air pollution) पर चर्चा कर रही है, खूब चर्चाएँ की गईं पर कोई असर नहीं निकला| आज हालत यह है कि दुनिया की 90 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या प्रदूषित हवा में सांस ले रही है| जब दुनिया से वायु प्रदूषण का मसला नहीं संभला, तब उसे जलवायु परिवर्तन (climate crisis) के स्वरुप में नए कलेवर में प्रस्तुत किया गया| यह सभी जानते हैं कि जिन कारकों से वायु प्रदूषित होती है, वही कारक जलवायु परिवर्तन के लिए भी जिम्मेदार हैं – पर अब सरकारें वायु प्रदूषण की चर्चा नहीं करतीं बल्कि जलवायु परिवर्तन की चर्चा लगातार करती हैं| इसी तरह का मुद्दा महिलाओं की हत्या (femicide) का भी है, यह विश्व्यापी समस्या है और धीरे-धीरे इतनी सामान्य हो चली है कि अब तो कोई समाचार भी नहीं बनता| साल दर साल महिला ह्त्या का दायरा व्यापक होता जा रहा है, पर दुनिया अब लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण (gender equality & women empowerment) की चर्चाओं में महिला ह्त्या का मुद्दा भूल गयी है|

हाल में ही हमारे देश में नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (National Crime Records Bureau) द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार देश में हरेक दिन औसतन 19 महिलाओं की ह्त्या केवल दहेज़ कारणों (dowry related) से होती हैं| यह केवल दहेज़ मामलों की हत्याओं की संख्या है, इसके अतिरिक्त देश भर में हरेक दिन 77 बलात्कार (rape) होते हैं और इनमें से बहुत सारी पीड़िताओं की ह्त्या साक्ष्य छुपाने के लिए कर दी जाती है| कई बार तो पुलिस और अस्पताल भी बलात्कार पीडिता की ह्त्या में शरीक रहते हैं| हॉनर किलिंग (honor killing) या परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर हमारे देश में लगभग 100 महिलाओं की ह्त्या हरेक वर्ष कर दी जाती है| आश्चर्य यह है कि सरकारी नीतियाँ और मीडिया महिला ह्त्या के सन्दर्भ में खामोश रहते हैं, और क़ानून व्यवस्था पूरी तरह से लचर है|

हाल में ही एमनेस्टी इन्टरनेशनल (Amnesty International) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मेक्सिको (Mexico) में हरेक दिन औसतन 10 महिलाओं की ह्त्या कर दी जाती है| मेक्सिको में पिछले तीन वर्षों से हरेक तबके की महिलायें इसके विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं पर हत्याओं के मामले बढ़ाते ही जा रहे हैं| एक अध्ययन के अनुसार मेक्सिको में पिछले 5 वर्षों के दौरान महिलाओं की ह्त्या के मामलों में 137 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गयी है| दक्षिण अमेरिकी (Latin America) देशों में यह समस्या बहुत विकराल है| कोलंबिया (Colombia) में हरेक महीने औसतन 15 महिलाओं की ह्त्या कर दी जाती है| दक्षिण अमेरिका के 25 देशों में से 14 देशों में यह समस्या बहुत विकराल है| महिलाओं की प्रति एक लाख आबादी के सन्दर्भ में एल साल्वाडोर (El Salvador) में 6.1 हत्याएं, होंडुरस (Honduras) में 5.1 हत्याएं, ब्राज़ील (Brazil) में 1.1 और अर्जेंटीना (Argentina) में भी 1.1 ह्त्या होती है| अफ्रीका महाद्वीप (Africa Continent) के देशों के लिए यह संख्या 3.1 ह्त्या है| महिलाओं की हत्या के सन्दर्भ में विश्व औसत प्रति एक लाख महिला आबादी में 2.17 ह्त्या है| दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में हरेक दिन औसतन 6 महिलाओं की ह्त्या कर दी जाती है, यह संख्या विश्व औसत की तुलना में 5 गुना अधिक है|

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में औसतन हरेक वर्ष 87000 महिलाओं की ह्त्या वर्ष 2019 तक होती थी, पर वर्ष 2020 में कोविड 19 के कारण विश्व्यापी लॉकडाउन (global lockdown) के बाद यह समस्या और भी गंभीर हो गयी है| संयुक्त राष्ट्र के अनुसार महिलाओं की कुल हत्या में से विभिन्न देशों में 50 से 90 प्रतिशत तक हत्याएं पति, पूर्व पति, पुरुष दोस्त, या फिर दूसरे ऐसे जानने वालों द्वारा की जाती है जिन्हें महिलायें अपना विश्वस्त या भरोसेमंद (trustworthy) मानती हैं| हमारे देश में इस तर्क को समझाना आसान है क्योंकि दहेज़ कारणों से की जाने वाली सभी हत्याओं में पति और उनके रिश्तेदार शामिल रहते हैं| इसके अतिरिक्त सभी तथाकथित हॉनर-किलिंग में भे पिता, भाई या अन्य रिश्तेदार शामिल रहते हैं| संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में हरेक वर्ष 50000 से अधिक महिलाओं की ह्त्या उनके पहचान वालों या सम्बन्धियों द्वारा की जाती है|

यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में वर्ष 2019 तक औसतन 120 महिलाओं की ह्त्या प्रतिवर्ष की जाती थी, पर वर्ष 2020 के मार्च से अगस्त महीनों के बीच ही 180 हत्याएं दर्ज की गईं थीं| फ्रांस (France) में वर्ष 2021 में अब तक 80 से अधिक महिलाओं की ह्त्या की जा चुकी है| हाल में ही फ्रांस के बौर्डिओक्स (Bordeaux) शहर में पुलिस के बड़े अधिकारियों पर इस सम्बन्ध में लापरवाही के आरोप से सम्बंधित मुक़दमा भी दायर किया गया है| चाहिनेज़ बौटा (Chahinez Boutea) नामक एक महिला ने स्थानीय पुलिस से अपने पति के खिलाफ मार्च में शिकायत दर्ज कराई थी, शिकायत के अनुसार उसके पति मौनिर बौटा (Mounir Boutea) उसके साथ मारपीट करते और जान से मारने की धमकी भी देते थे| पर पुलिस ने इस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की और दो महीने बाद ही उसके पति ने चाहिनेज़ बौटा को पहले गोली मारी और फिर बीच सड़क पर उसके शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गयी| शुरुआती जांच से पता चला है कि पुलिस ने उसकी शिकायत ठीक से नहीं लिखी थी और जिस पुलिस अधिकारी ने शिकायत दर्ज की थी वह भी घरेलू हिंसा के आरोप में सजा काट चुका है|

भारत, फ्रांस, अफ़ग़ानिस्तान, टर्की, होंडुरास और मेक्सिको (India, France, Afghanistan, Turkey, Honduras and Mexico) जैसे देश तो महिला ह्त्या के संदर्भ में दुनियाभर में बदनाम हैं, पर अमेरिका (United States of America) में भी यह समस्या बहुत गंभीर स्वरुप ले चुकी है| सेंटर फॉर डिजीज कन्ट्रोल (Centre for Disease Control) के अनुसार 19 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं में होने वाली मौतों में ह्त्या चौथा सबसे बड़ा कारण है, जबकि 20 से 44 वर्ष की उम्र की महिलाओं में मृत्यु का यह पांचवां सबसे बड़ा कारण है| बदनाम फ्रांस में वर्ष 2018 में 120 महिलाओं की ह्त्या की गयी, जबकि उसी वर्ष अमेरिका में 1014 महिलाओं की ह्त्या की गयी| वर्ष 2019 में अमेरिका में स्थिति और भी खराब थी| इस वर्ष बदनाम टर्की में 474 महिलाओं की ह्त्या की गयी थी, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 2991 तक पहुँच चुका था|

जिस तरीके से हमारे देश में पिछड़ी जातियों और आर्थिक स्तर (Backward Castes & economically weaker sections) पर कमजोर लोगों में महिला ह्त्या की समस्या शेष आबादी से अधिक विकराल है, उसी तरह अमेरिका में भी अश्वेतों और जनजातियों (Indigenous people) में यह समस्या अधिक गंभीर है| नेशनल इंडिजेनस विमेंस रेस्पोंस सेंटर (National Indigenous Women's Response Centre) के आंकड़ों के अनुसार अश्वेतों और जनजातियों में यह समस्या श्वेत महिलाओं की तुलना में 6 गुना अधिक है| पुलिस इनके मामलों में लापरवाह भी रहती है| लापता श्वेत लोगों में से 81 प्रतिशत का सुराग पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के एक सप्ताह के भीतर ही लगा लेती है, जबकि अश्वेतों के लिए यह संख्या 61 प्रतिशत ही है| फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (Federal Bureau of Investigation) के अनुसार अमेरिका में 92 प्रतिशत महिलाओं की ह्त्या उनके जानने वालों द्वारा की जाती है, जबकि 63 प्रतिशत हत्याएं तो वर्तमान पति द्वारा ही की जाती हैं| अमेरिका में एक नर्स, डौन विलकॉक्स निजी तौर पर ऐसी नहिलाओं का रिकॉर्ड एकत्रित करती हैं जिनकी ह्त्या की गयी हो, उनके अनुसार यह समस्या समाज में इतनी गहराई तक पसरी है कि इसे हम सामान्य समझने लगे हैं और इसपर कोई आवाज नहीं उठती| कानून की समस्या यह है कि अधिकतर हत्याएं पति या फिर अन्तरंग मित्रों द्वारा की जाती हैं, जिनपर महिलायें भरोसा करती हैं – ऐसी हत्याओं का कोई गवाह नहीं होता, और महिला की मृत्यु हो चुकी होती है|

महिला समानता और महिला सशक्तीकरण का नारा बुलंद करते-करते समाज में महिला ह्त्या एक नया सामान्य हो चला है| दुनिया के देश अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं पर आंसू बहाकर अपने देश की स्थिति पर आसानी से पर्दा डाल लेते हैं|

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