Begin typing your search above and press return to search.
हाशिये का समाज

10 सालों में सीवर-सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 की मौत, तमिलनाडु टॉप पर

Janjwar Desk
21 Sept 2020 4:13 PM IST
10 सालों में सीवर-सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 की मौत, तमिलनाडु टॉप पर
x

मेनहोल की सफाई करते श्रमिकों की दम घुटने की खबरें छायी रहती हैं मीडिया में, मगर रामदास अठावले के लिए ये नहीं हैं मौतें (file photo)

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने सीवर और सेप्टिक टैकों की सफाई के दौरान 2010 से मार्च 2020 के बीच हुई मौतों के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में यह जानकारी दी है.

जनज्वार। देश में पिछले 10 वर्षों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 लोगों की जान गई है. इन 10 सालों में सबसे ज्यादा 122 मौतें तमिलनाडु में हुई हैं. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने सीवर और सेप्टिक टैकों की सफाई के दौरान 2010 से मार्च 2020 के बीच हुई मौतों के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में यह जानकारी दी है.

आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 631 लोगों की मौत हुई. इनमें से सबसे ज्यादा 115 लोगों की मौत 2019 में हुई. वहीं, पिछले 10 वर्षों में इस वजह से सबसे ज्यादा 122 लोगों की मौत तमिलनाडु में हुई. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 85, दिल्ली और कर्नाटक में 63-63 तथा गुजरात में 61 लोगों की मौत हुई. हरियाणा में 50 लोगों की मौत हुई.

इस साल 31 मार्च तक सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान दो लोगों की मौत हुई है. 2018 में इस वजह से 73 तो 2017 में 93 लोगों की मौत हुई. आंकड़ों के अनुसार 2016 में 55 लोगों की मौत हुई जबकि 2015 में 62 और 2014 में 52 लोगों की मौत हुई. इसके अलावा 2013 में 68 तथा 2012 में 47 और 2011 में 37 लोगों की मौत हुई. 2010 में 27 लोगों की मौत हुई थी.

एनसीएसके ने बताया कि आंकड़े विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर है और वास्तविक आंकड़े अलग हो सकते हैं.आरटीआई आवेदन के तहत दी गई जानकारी में कहा गया कि अद्यतन होने पर ये आंकड़े बदलते रहते हैं. इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि सफाई राज्यों का विषय है और एनसीएसके के पास राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से मिला आंकड़ा होता है.

हालांकि सफाईकर्मियों के अधिकारों के लिए काम करनेवाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि मैला ढोना रोजगार निषेध व पुनर्वास अधिनियम को सही से लागू नहीं करने की वजह से इससे जुड़ी मौतें हो रही हैं.

मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने की दिशा में काम करनेवाले संगठन 'सफाई कर्मचारी आंदोलन' के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि कानून सही तरीके से लागू नहीं होने से सफाई कर्मी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.

Next Story

विविध