हाशिये का समाज

India अनाथ बच्चों का अलग देश होता तो उनकी आबादी होती ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंका से ज्यादा, अहम सवाल : मोदी राज में भी नहीं सुधरे हालात?

Janjwar Desk
26 Aug 2022 9:33 AM GMT
India अनाथ बच्चों का अलग देश होता तो उनकी आबादी होती ऑस्ट्रेलिया-श्रीलंका से ज्यादा, अहम सवाल : मोदी राज में भी  नहीं सुधरे हालात?
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Orphand Child India : जस्टिस चंद्रचूड़ ने अनाथ बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया पर भारत सरकार को फटकार लगाई है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को थकाऊ करार दिया है। साथ ही यह हिमनद की गति से खिसकने वाली प्रक्रिया है।

Orphand Child India : मानव समाज के किसी भी सदस्य का अनाथ होना अपने आप में एक मानवीय त्रासदी है, लेकिन भारत में ऐसे बच्चों की आबादी भी इतनी बड़ी है, जिसके बारे में सुनकर आपको विश्वास नहीं होगा लेकिन विश्व पटल पर तेजी से उभरते भारत ( India ) की यही हकीकत भी है। बस आप इसी से अंदाजा लगाइए कि अगर भारत में रहने वाले अनाथ बच्चों को एक अलग देश होता तो वो ऑस्ट्रेलिया ( Australia ) और श्रीलंका ( Srilanka ) से ज्यादा आबादी वाला राष्ट्र होता। ताज्जुब है कि भारत सरकार के सामने इतनी बड़ी त्रासदी मुंह बाये खड़ी है, लेकिन उसको लेकर जो जटिल नीति है उससे तो भारत कभी इस आपदा से मुक्त ही नहीं हो पाएगा।

इन्हीं अनाथ बच्चों को लेकर चिंतित चैरिटेबल ट्रस्ट द टेंपल ऑफ हीलिंग के सचिव डॉ. पीयूष सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में हाल ही में दायर की है। सक्सेना की याचिका के मुताबिक भारत में तीन करोड़ अधिक बच्चे अनाथ हैं। इनमें सिर्फ 4000 बच्चों को ही हर साल गोद लिया जाता है। ऐसा नहीं है कि बच्चों को गोद लेने के लिए आवेदक नहीं हैं। हजारों की संख्या में ऐसे बांझ दंपति हैं जो बच्चा पाने के लिए बेताब हैं, पर उनकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं पा रही है।

गोद लेने की गति मंद क्यों?

दरअसल, भारत में गोद लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। जिन बच्चों को गोद दिया गया उनमें से कुछ मामले ऐसे आये जिसकी वजह से सरकार ने अनाथ बच्चों की गोद देने की प्रक्रिया पर सख्ती से अमल कर रही है। इस बात को देश के कुछ वरिष्ठ जजों ने भी स्वीकार किया है। खुद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक सुनवाई के दौरान अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में एक मामले को निपटाया था। वह मामला इंटर कंट्री बच्चे को गोद लेने का था। बच्चे को गोद लेने के लिए दिया गया। बच्चे के माता-पिता को दूसरे माता-पिता से बदल दिया गया लेकिन वह मामला सुलझ नहीं सका। बच्चा बड़ा हो गया और किसी ने नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया। बाद में वह बच्चा किसी ड्रग के मामले में फंस गया। यह सब इंसान के साथ दुर्व्यवहार की भयावह स्थितियां हैं। आप अनाथ को गोद लेते हैं, जिम्मेदारी नहीं निभाते। परेशानी होने पर बच्चे को ऐसी जगह पर छोड़ देते हैं, जहां वो पैदा नहीं हुई, उसकी भाषा वहां वाली नहीं होती, इसलिए हमें ऐसी स्थिति पैदा करना होगा जहां गोद लेने वाले बच्चे के साथ कोई दुर्व्यवहार न हो।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने किस बात पर लगाई मादी सरकार को फटकार

यहां पर सवाल यह उठता है कि तो क्या अनाथ बच्चों को उनकी नियति पर छोड़ दिया जाए। ऐसा ही एक सवाल चैरिटेबल ट्रस्ट द टेंपल ऑफ हीलिंग के सचिव डॉ. पीयूष सक्सेना ने अदालत के समझ उठाया है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने दो दिन पहले टिप्पणी की करते हुए कहा कि अनाथ बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया वर्तमान में हिमनद गति से खिसक रही है। इससे काम नहीं चलेगा। हमें बेहतर माहौल विकसित करना होगा। धीमी प्रक्रिया को लेकर उन्होंने भारत सरकार को फटकार लगाई है। पूरी प्रक्रिया को थकाऊ करार दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की तत्काल आवश्यकता है।

क्या करने की है जरूरत

अनाथ की स्थिति सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करने वाले याचिकाकर्ता पीयूष सक्सेना ने कहना है कि गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है। चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स इंफॉर्मेशन एंड गाइडेंस सिस्टम 2006 की इनकम टैक्स प्रिपेयरर स्कीम की तर्ज पर कुछ प्रशिक्षित गोद लेने के लिए तैयार करने वाले अधिकारी नियुक्त कर सकता है। वे संभावित माता-पिता को गोद लेने के लिए आवश्यक बोझिल कागजी कार्रवाई को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। हिंदू दत्तक और रखरखाव अधिनियम 1956 कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा संचालित होता है। जबकि अनाथों के पहलू को महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा निपटाया जा रहा है। इस मसले को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के हवाले करने की जरूरत है। हमें ऐसा माहौल विकसित करना होगा कि बच्चों को गोद लेने वाले अपनी जिम्मेदारी जीवनपर्यंत पालन करें। समाज में अनाथ बच्चों की सामाजिक स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाना होगा।

Orphand Child India : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी करना होगा ये काम

1. अनाथों के पंजीकरण को डिजिटल बनाना होगा।

2. अनाथ दत्तक ग्रहण दस्तावेज बुकलेट तैयार करना होगा।

3. ब्लॉक स्तर पर कुछ लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना जरूरी।

4. गोद लेने की प्रक्रिया को सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए कागजी कार्रवाई को कम करना होगा।

5. गोद कम होने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जवाबदेही तय की जाए।

6. गोद लेने की दर 1000 हजार बच्चों में सिर्फ एक से ज्यादा करने की जरूरत

7. देशभर में समाज के प्रमुख लोगों और आम लोगों को इस मुहिम से जोड़ना होगा।

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