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#FarmersProtest किसान नेताओं ने कहा - आठ का भारत बंद पूर्व नियोजित, नौ को वार्ता में हल न निकला तो तय करेंगे नई रणनीति

Janjwar Desk
6 Dec 2020 4:07 AM GMT
#FarmersProtest किसान नेताओं ने कहा - आठ का भारत बंद पूर्व नियोजित, नौ को वार्ता में हल न निकला तो तय करेंगे नई रणनीति
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दिल्ली के बाॅर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की सुबह ली गई तसवीर।

किसान संगठनों की अगर नौ दिसंबर की सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता विफल रहती है तो वे नए सिरे से आगे के आंदोलन की रणनीति तय करेंगे। वहीं, किसान नेताओं ने कहा है आठ दिसंबर का उनका भारत बंद का ऐलान पूर्व नियोजित है....

जनज्वार। किसान आंदोलन के नेताओं और नरेंद्र मोदी सरकार के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार की हुई पांचवें दौर की वार्ता भी विफल हो गई और इसके बाद वार्ता के लिए एक और नई तारीख नौ दिसंबर की तय कर दी गई। किसान नेताओं ने कहा है कि नौ दिसंबर की बैठक के बाद वे आंदोलन को लेकर नई रणनीति तय करेंगे। उनका कहना है कि सरकार कानून को वापस लेने को तैयार नहीं है और हमारी मांग है कि उसे वापस लिया जाए। किसान नेताओं ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो नए साल में भी हम यहीं धरने पर बैठे रहेंगे। वहीं किसान नेताओं ने कहा है कि आठ दिसंबर का भारत बंद पूर्व नियोजित है और यह आवश्य होगा।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी, पंजाब के नेता सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि पूरे देश के किसान एक साथ हैं और देश के किसानों ने आपस में तालमेल कर लिया है। उन्होंने कहा कि 13 राज्यों से समर्थन आ चुका है। सरकार जल्द ही इसका हल निकाले, अगर जल्दी हल नहीं निाकलता है तो नौ दिसंबर की बैठक के बाद हम आंदोलन को लेकर नई रणनीति तय करेंगे।

राकेश टिकैत सहित अन्य प्रमुख किसान नेताओं ने कहा है कि आठ दिसंबर का किसानों की मांग को लेकर भारत बंद अवश्य होगा और यह पूर्वनियोजित है।

टिकरी बाॅर्डर, सिंघु बाॅर्डर व दिल्ली-गाजियाबाद के बीच गाजीपुर बाॅर्डर पर अभी बड़ी संख्या में किसान प्रदर्शन के लिए डटे हुए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआइ ने रविवार सुबह मौके पर किसानों की तसवीरें जारी की हैं।


भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैट ने कहा है कि सरकार अपना कृषि कानून वापस लेने को तैयार नहीं है और किसान दिल्ली से वापस जाने के तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नए साल पर भी किसान यहीं रहेंगे, इससे बढिया जगह कोई है क्या।

सरकार क्या बोली?

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को किसान प्रतिनिधियों से वार्ता विफल होने के बाद कहा था कि हम लोग चाहते थे कि कुछ विषयों पर हमें स्पष्टता से सुझाव मिले, लेकिन बातचीत के दौर से यह संभव नहीं हो सका। कुछ सुझाव मिल जाते तो हमें रास्ता निकालना थोड़ा आसान हो जाता। उन्होंने कहा कि हम अभी भी इसका इंतजार करेंगे।


उन्होंने किसान संघों से आग्रह किया कि ठंड का मौसम है, इसलिए जो बुजुर्ग व बच्चे हैं, उन्हें किसान संघ के नेता घर भेज देंगे तो सुविधा रहेगी। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान संघों के अपने कार्यक्रम हैं और मैं उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि वे सभी यूनियनों एवं किसान नेताओं से कहना चाहते हैं कि वे आंदोलन का रासता छोड़ चर्चा के रास्ते पर आएं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार कई दौर की चचा्र कर चुकी है और समाधान के लिए आगे भी चर्चा करने को तैयार है।


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