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अमित शाह का अंडमान और निकोबार दौरा: स्थानीय प्रशासन की सख्ती से बंधक से बन गए पर्यटक

Janjwar Desk
14 Oct 2021 6:34 PM GMT
अमित शाह का अंडमान और निकोबार दौरा: स्थानीय प्रशासन की सख्ती से बंधक से बन गए पर्यटक
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अमित शाह का अंडमान और निकोबार दौरा: कल से तीन दिन के लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह पोर्ट ब्लेयर में आ रहे है। वह ऐतिहासिक जेल सेल्युलर जेल का दौरा भी करेंगे। उनके दौरे से पोर्ट ब्लेयर में घूमने आए पर्यटकों को स्थानीय प्रशासन ने कहीं भी आने जाने से रोक दिया है। पर्यटकों में भारी गुस्सा बोले हमें गृह मंत्री के दौरे में हमें क्यों बंधक बना रहे हैं

अमित शाह का अंडमान और निकोबार दौरा: देश के गृह मंत्री अमित शाह सुबह अंडमान और निकोबार द्वीप में तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे है। उनके दौरे को देखते हुए पोर्ट ब्लेयर प्रशासन ने इतने कड़े सुरक्षा प्रबंध कर दिए कि वहां गए पर्यटक खुद को बंधक सा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि गृहमंत्री का दौर ठीक है, लेकिन इस कोशिश में उन्हें क्यों तंग किया जा रहा है। वह यहां छुट्टी मनाने आए है। अब लग रहा है कि यहां आकर फंस गए हैं।

जयपुर से पोर्ट ब्लेयर पत्नी के साथ घूमने गए प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि वह 11 से 18 तारीख तक के लिए यहां आए हुए हैं। उन्होंने अपना होटल और जहां जहां जाना था, वहां की बुकिंग अग्रिम करा ली थी। निश्चित तारीख को वह यहां पहुंचे। यहां आते ही महसूस हुआ कि जैसे वह फंस से गए हो। उन्हें कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया। यहां तक कि होटल में भी उन्हें हिदायत दी जा रही है कि वह ज्यादा यहां वहां न जाए। बस अपने कमरे में रहे।

उन्होंने बताया कि वह इतनी दूर होटल के कमरे में कैद होने के लिए नहीं आए हैं। इसके बाद भी होटल कर्मचारी उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि वह टैक्सी हायर कर बाहर जाते हैं तो जगह जगह पुलिस उन्हें रोकती है। पूछताछ करती है। इसके बाद ही उन्हें वहां से जाने दिया जाता है।

पर्यटकों ने बताया कि यहां के सभी टूरिस्ट स्पॉट को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। वहां किसी को भी आने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इस तरह से वह न तो बाहर घूमने जा सकते हैं, क्योंकि बाहर जाए भी तो कहां?

अगस्त से ही अमित शाह के पोर्ट ब्लेयर दौरे की तैयारियां चल रही है। तैयारियां कितनी जोरो पर है,इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त में यहां प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों को सर्कुलर जारी कर छुट्टियों पर रोक लगा दी थी।

हालांकि तब उनके आने की डेट फाइनल नहीं हुई थी। बताया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सितंबर के मध्य में यहां आ सकते है। लेकिन वह अब यहां अक्टूबर में आ रहे हैं। अपनी यात्रा के दौरान शाह के राष्ट्रीय स्मारक सेलुलर जेल जाने और स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इसके साथ ही वह वहां के पर्यटक स्थलों का भी दौरा करेंगे।

इस वजह से यहां के स्थानीय प्रशासन ने न सिर्फ कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा रखी है, बल्कि लगातार तैयारी भी की जा रही ळै। सेलुलर जेल को नए तरीके से संवारा जा रहा है। इसी तरह से दूसरे पर्यटक स्थलों को भी संवारने और सजाने का काम चल रहा है।

यह तैयारियां यहां आने वाले पर्यटकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। उन्हें टूरिस्ट स्पॉट तक जाने नहीं दिया जा रहा है। पर्यटकों का कहना है कि यदि ऐसा ही करना है तो फिर पर्यटकों को इस बारे में पहले ही अवगत करा दिया जाता तो बेहतर रहता। वह अपना टूर कैंसिल कर लेते। अब वह यहां आकर फंस गए हैं। न तो यहां रह सकते हैं और न यहां से जा सकते हैं।

क्योंकि यहां आना ही बेकार हो गया है, वह होटल के कमरे में रहने तो यहां आए नहीं है, वह तो यहां घूमने फिरने के लिए आए थे। अब उन्हें कहीं भी जाने जाने नहीं दिया जा रहा है। यदि होटल के स्टाफ से कोई जानकारी मांगी जाती है तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता है। ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि उन्हें हर वक्त यह संशय बना रहता है कि पता नहीं क्या हो जाएगा?

उन्होंने बताया कि भारी खर्च कर वह यहां आए थे तो अवकाश मनाने। गृह मंत्री के दौरे से उनका अवकाश तकलीफ में तब्दील हो रहा है।

प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि अपने ही देश में पर्यटकों के साथ इस तरह का व्यवहार से उन्हें बहुत तकलीफ हो रही है। देश के गृह मंत्री आ रहे हैं, उनका सरकारी दौरा हो सकता है। इस दौरे की वजह से उन्हें क्यों और कैसे तंग किया जा सकता है। यह उनके घूमने फिरने के अधिकार का हनन है। जिसका वह पुरजोर तरीके से विरोध करते है। पर्यटकों ने बताया कि यदि देश के गृह मंत्री की सुरक्षा की इतनी ही चिंता है तो फिर पहले ही शेड्यूल बनाना चाहिए था, तब तक पर्यटकों के टूर को कैंसिल कर दिया जाता। इस तरह से वह यहां आकर परेशानी से बच सकते थे।

उन्होंने बताया कि यहां ऐस माहौल बनाया जा रहा है कि हर कोई डर के साए में जी रहा है। वह चाह कर भी इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं।

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